Chhattisgarh culture : हैरान कर देने वाली परंपरा ,जशपुर में मां दुर्गा नहीं, शैतान महिषासुर की पूजा क्यों करते हैं लोग?

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News India Live, Digital Desk: Chhattisgarh culture : छत्तीसगढ़ की परंपराएं जितनी विविध और अनोखी हैं, उनका एक उदाहरण जशपुर में देखने को मिलता है. यहां कुछ जनजातियाँ और समुदाय ऐसे हैं, जो नवरात्रि के दौरान शक्ति की देवी मां दुर्गा की पूजा करने की बजाय, महिषासुर की पूजा करते हैं, जिन्हें आम तौर पर बुराई का प्रतीक माना जाता है. इतना ही नहीं, नवरात्रि के नौ दिनों में वे दुर्गा पूजा से पूरी तरह से दूर रहते हैं. यह उनकी अपनी संस्कृति, इतिहास और मान्यताओं का हिस्सा है, जिसे वे पीढ़ियों से निभाते आ रहे हैं.

जशपुर में महिषासुर पूजा और इसकी वजहें:

  • विभिन्न आदिवासी मान्यताएँ: जशपुर छत्तीसगढ़ का आदिवासी बहुल क्षेत्र है. यहां के कुछ जनजातीय समुदायों में, खासकर असुर समुदाय में, महिषासुर को अपना पूर्वज या संरक्षक माना जाता है. उनके लिए महिषासुर एक खलनायक नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली योद्धा थे, जिनका वध अन्यायपूर्ण तरीके से किया गया था.
  • मां दुर्गा से दूरी: चूंकि मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था, इसलिए नवरात्रि के दौरान वे दुर्गा पूजा से खुद को दूर रखते हैं और कई बार शोक मनाते हैं. इस अवधि में वे महिषासुर को याद करते हैं और उनकी पूजा करते हैं.
  • सांस्कृतिक पहचान: यह उनकी एक तरह की सांस्कृतिक पहचान और अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान जताने का तरीका है. यह दर्शाता है कि कैसे हर समुदाय की अपनी अलग-अलग मान्यताएँ और इतिहास होता है, जो उन्हें विशेष बनाता है.
  • इतिहास की अपनी व्याख्या: यह उन वैकल्पिक व्याख्याओं को भी उजागर करता है जो भारतीय इतिहास और मिथकों में मौजूद हैं, जहां एक पात्र को कुछ लोग खलनायक मानते हैं तो कुछ उन्हें हीरो के रूप में देखते हैं.

यह परंपरा हमें भारतीय समाज की समृद्ध विविधता और सह-अस्तित्व की भावना को दिखाती है. एक ही समय पर एक ही देवी की पूजा करने और महिषासुर की पूजा करने की ये परंपराएं यह सिखाती हैं कि कैसे विभिन्न समुदाय अपनी-अपनी मान्यताओं को संजोते हुए साथ रहते हैं.