ट्रंप का बड़ा फैसला: दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टो कंपनी के मालिक को किया माफ़, जानिए क्यों मचा है बवाल

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क्रिप्टो की दुनिया में आज एक बहुत बड़ी खबर आई है, जिसने सबको चौंका दिया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज बाइनेंस (Binance) के मालिक चांगपेंग झाओ (जिन्हें 'CZ' भी कहा जाता है) को माफ़ी दे दी है। झाओ को मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले में सज़ा हुई थी और वह जेल में थे।

क्यों लिया गया यह हैरान करने वाला फैसला?

व्हाइट हाउस का कहना है कि यह फैसला बाइडेन सरकार की 'एंटी-क्रिप्टो' यानी क्रिप्टो के खिलाफ चलाई जा रही मुहिम का जवाब है। ट्रंप प्रशासन यह दिखाना चाहता है कि वे क्रिप्टो इंडस्ट्री के खिलाफ नहीं हैं और उसे सपोर्ट करते हैं।

लेकिन इस माफ़ी के पीछे एक और बड़ी वजह बताई जा रही है। हाल ही में झाओ ने ट्रंप परिवार से जुड़ी एक डिजिटल क्रिप्टो कंपनी 'वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल' के साथ एक बड़ी साझेदारी की है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इसी डील ने इस माफ़ी का रास्ता साफ किया है और यह एक तरह का राजनीतिक लेन-देन हो सकता है।

क्या था चांगपेंग झाओ का गुनाह?

पिछले साल झाओ ने खुद यह बात मानी थी कि उनकी कंपनी बाइनेंस ने मनी लॉन्ड्रिंग (गलत तरीके से कमाए गए पैसे को वैध बनाना) को रोकने के लिए कड़े नियम नहीं बनाए थे। यह एक बहुत गंभीर अपराध माना जाता है।

इस गलती के लिए उन्हें चार महीने जेल की सज़ा हुई थी और उनकी कंपनी पर 4.3 अरब डॉलर (लगभग 35 हजार करोड़ रुपये) का भारी-भरकम जुर्माना भी लगा था।

इस माफी के क्या मायने हैं?

  1. बाइनेंस की अमेरिका में वापसी: ट्रंप के इस कदम से बाइनेंस के लिए अमेरिकी बाजार के दरवाजे फिर से खुल सकते हैं, जहां उस पर कई तरह की पाबंदियां लगी हुई थीं। यह कंपनी के लिए एक बहुत बड़ी राहत है।
  2. क्रिप्टो मार्केट में आएगी तेजी?: इस फैसले से पूरी क्रिप्टो इंडस्ट्री में एक सकारात्मक माहौल बन सकता है। जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में क्रिप्टो बाजार पर इसका अच्छा असर देखने को मिल सकता है, क्योंकि यह दिखाता है कि अमेरिका का एक बड़ा राजनीतिक खेमा क्रिप्टो के पक्ष में है।

हालांकि, ट्रंप के इस फैसले से अमेरिका में एक नई बहस छिड़ गई है। कुछ लोग इसे क्रिप्टो इंडस्ट्री के लिए अच्छा कदम बता रहे हैं, तो वहीं कुछ लोग इसे अपने पद का गलत इस्तेमाल और राजनीतिक फायदा उठाने का जरिया मान रहे हैं।