धनबाद और रांची के लिए केंद्र का मेगा प्लान डेटा-आधारित नीति से बदलेगी शहर की सूरत और बढ़ेंगे रोजगार
News India Live, Digital Desk: केंद्र सरकार ने झारखंड के दो सबसे महत्वपूर्ण शहरों, रांची और धनबाद के कायाकल्प के लिए एक विशेष रणनीति तैयार की है। केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) अब इन शहरों के लिए 'सिटी लेवल स्टैटिस्टिकल रिपोर्ट' (नगर-स्तरीय सांख्यिकी रिपोर्ट) तैयार करेगा। इस पहल का सीधा उद्देश्य इन शहरों में आर्थिक विकास, नवाचार (Innovation) और रोजगार सृजन को नई दिशा देना है।
क्यों खास है यह योजना? (Key Highlights)
अभी तक सरकारी आंकड़े मुख्य रूप से राष्ट्रीय या राज्य स्तर पर जारी होते थे, जिससे शहरों की वास्तविक जरूरतों को समझना मुश्किल होता था। अब केंद्र सरकार इन शहरों को स्वतंत्र आर्थिक इकाई मानकर काम करेगी।
डेटा-आधारित नीति: शहरों के भीतर व्यापार की स्थिति, इंटरनेट का उपयोग और रोजगार के वास्तविक आंकड़ों का संकलन किया जाएगा।
47 शहरों में चयन: देश के उन 47 शहरों को चुना गया है जिनकी आबादी 10 लाख से अधिक है। झारखंड से केवल रांची और धनबाद को इसमें जगह मिली है।
रोजगार सृजन: रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि इन शहरों में किस क्षेत्र (जैसे- सर्विस सेक्टर, मैन्युफैक्चरिंग या माइनिंग) में सबसे ज्यादा नौकरियों की संभावनाएं हैं।
किन बिंदुओं पर होगा फोकस? (Area of Focus)
रिपोर्ट तैयार करने के लिए एनएसओ निम्नलिखित मानकों पर डेटा एकत्र करेगा:
उद्यमिता (Entrepreneurship): शहर में कितने नए स्टार्टअप या प्रतिष्ठान खुले हैं।
महिला भागीदारी: महिला स्वामित्व वाले उद्यमों की हिस्सेदारी कितनी है।
डिजिटल ग्रोथ: व्यापार में इंटरनेट और डिजिटल भुगतान का उपयोग कितना बढ़ा है।
स्वामित्व पैटर्न: कितने प्रतिष्ठान किराए पर चल रहे हैं और कितने निजी स्वामित्व में हैं।
बजट 2026-27: 'सिटी इकोनॉमिक रीजन्स' (CER) का सहारा
यह योजना केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित 5,000 करोड़ रुपये की 'सिटी इकोनॉमिक रीजन्स' पहल का हिस्सा है।
रांची-देवघर-धनबाद अर्बन क्लस्टर: इस क्लस्टर को विशेष रूप से बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास के लिए चुना गया है।
खनन से इतर विकास: धनबाद जैसे शहरों की अर्थव्यवस्था को केवल कोयला खनन तक सीमित न रखकर उसे सर्विस और टेक्नोलॉजी सेक्टर की ओर मोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
आम जनता से मांगे गए सुझाव
केंद्र सरकार ने इस योजना को 'साक्ष्य-आधारित' बनाने के लिए नागरिकों की भागीदारी भी सुनिश्चित की है:
सुझाव की अंतिम तिथि: 15 मई 2026 तक कोई भी इच्छुक व्यक्ति या विशेषज्ञ अपने सुझाव सरकार को भेज सकता है।
उद्देश्य: स्थानीय लोगों की समस्याओं और अपेक्षाओं को नीति निर्माण का हिस्सा बनाना।
"यह पहल शहरों के संरचनात्मक बदलावों को समझने और उन्हें वैश्विक स्तर के व्यापारिक केंद्रों के रूप में विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।" NSO अधिकारी