Camphor Benefits : पूजा वाला कपूर आखिर बनता कैसे है, और इसमें इतनी जल्दी आग क्यों लग जाती है?

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News India Live, Digital Desk:  Camphor Benefits : जब भी घर में पूजा या आरती होती है, तो हमारी नज़र आरती की थाली में जल रहे कपूर पर जरूर जाती है। क्या आपने कभी सोचा है कि एक छोटी सी माचिस की तीली दिखाते ही यह इतनी तेजी से क्यों जलने लगता है? और यह जलकर धुआं या राख क्यों नहीं छोड़ता, बस हवा में गायब हो जाता है?

इसके पीछे कोई जादू नहीं, बल्कि सीधा-साधा विज्ञान और इसकी बनावट का राज छिपा है। चलिए, आज कपूर की इसी दिलचस्प कहानी को जानते हैं।

क्यों पकड़ लेता है तुरंत आग?

कपूर एक बहुत ही ज्वलनशील (flammable) पदार्थ है। आसान भाषा में कहें तो इसे आग पकड़ने के लिए बहुत ही कम गर्मी की जरूरत होती है। जैसे ही इसके पास जलती हुई तीली लाई जाती है, यह तुरंत अपने 'इग्निशन पॉइंट' (जिस तापमान पर कोई चीज जलना शुरू करती है) तक पहुंच जाता है और जल उठता है।

यह जलने पर कोई अवशेष, जैसे राख या काला धुआं, इसलिए नहीं छोड़ता क्योंकि यह सीधे ठोस से गैस में बदल जाता है और पूरी तरह से जलकर हवा में मिल जाता है।

आखिर यह कपूर आता कहां से है?

आपको जानकर शायद हैरानी होगी कि असली कपूर किसी फैक्ट्री में नहीं, बल्कि एक खास पेड़ की लकड़ी से निकाला जाता है।

  • कपूर का पेड़: इस पेड़ का नाम है 'सिनामोमम कैम्फोरा' (Cinnamomum camphora)। यह पेड़ चीन, जापान, ताइवान जैसे देशों में पाया जाता है और भारत में भी देहरादून, मैसूर और सहारनपुर जैसी जगहों पर इसे उगाया जाता है।
  • बनने का तरीका: कपूर बनाने के लिए इस पेड़ की लकड़ी को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर पानी में उबाला जाता है। फिर उसकी भाप को इकट्ठा किया जाता है। जब यह भाप ठंडी होती है, तो यह जम जाती है और कपूर के छोटे-छोटे दाने (क्रिस्टल) बन जाते हैं। यही असली और शुद्ध 'देसी कपूर' होता है।

असली और नकली कपूर में अंतर

आजकल बाजार में मिलने वाला ज्यादातर कपूर असली नहीं होता। वह तारपीन के तेल (turpentine oil) से रासायनिक प्रक्रिया द्वारा बनाया जाता है। यह दिखने में असली जैसा ही होता है लेकिन सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। असली कपूर की सुगंध बहुत तेज और सुकून देने वाली होती है, और यह पानी में डालने पर नीचे बैठ जाता है, जबकि नकली कपूर सतह पर तैर सकता है।

पूजा में इसका क्या महत्व है?

कपूर के जलकर बिना कोई निशान छोड़े गायब हो जाने का एक गहरा आध्यात्मिक मतलब भी है। यह हमें सिखाता है कि जैसे कपूर खुद को पूरी तरह से जलाकर वातावरण को सुगंधित कर देता है और अपना कोई अस्तित्व नहीं छोड़ता, ठीक वैसे ही इंसान को भी अपने अहंकार, अपनी बुराइयों और 'मैं' के भाव को जलाकर परमात्मा में विलीन हो जाना चाहिए।

तो अगली बार जब आप कपूर जलता हुआ देखें, तो सिर्फ उसकी सुगंध ही नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपे इस विज्ञान और गहरे अर्थ को भी याद करिएगा।