दुनिया की पहली सोलर एंबुलेंस 'Stella Juva' ने पूरी की 800KM टेस्टिंग, बिना बिजली अंदर ही होगा X-Ray और अल्ट्रासाउंड

दुनिया की पहली सोलर एंबुलेंस 'Stella Juva' ने पूरी की 800KM टेस्टिंग, बिना बिजली अंदर ही होगा X-Ray और अल्ट्रासाउंड

हेल्थकेयर और ग्रीन एनर्जी टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी उपलब्धि दर्ज हुई है। नीदरलैंड्स स्थित 'आइंडहोवेन यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी' (Eindhoven University of Technology) की छात्र टीम द्वारा विकसित दुनिया की पहली सोलर पावर्ड एंबुलेंस 'स्टेला जुवा' (Stella Juva) ने अफ्रीका के केन्या में अपना कड़ा और चुनौतीपूर्ण 800 किलोमीटर का परीक्षण (Field Testing) सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। अमरेफ हेल्थ अफ्रीका (Amref Health Africa) के सहयोग से दुर्गम, बिना सड़क और बिना बिजली वाले सुदूर इलाकों में किए गए इस ट्रायल ने यह साबित कर दिया है कि सूर्य की ऊर्जा से न केवल वाहन को लंबी दूरी तक दौड़ाया जा सकता है, बल्कि इसके अंदर जटिल मेडिकल ऑपरेशंस भी आसानी से संचालित किए जा सकते हैं।

न पेट्रोल न चार्जिंग स्टेशन: सिर्फ धूप से दौड़ेगा यह चलता-फिरता अस्पताल

पारंपरिक एंबुलेंस को चलाने के लिए महंगे डीजल-पेट्रोल या ग्रिड आधारित इलेक्ट्रिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता होती है। लेकिन 'स्टेला जुवा' पूरी तरह से ऑफ-द-ग्रिड और सेल्फ-सस्टेनेबल वाहन है। इसकी पूरी छत पर अत्याधुनिक ऑल-ब्लैक कॉन्टैक्ट (ABC) सोलर पैनल्स लगाए गए हैं। ये सोलर पैनल्स गाड़ी के चलते रहने के दौरान भी बैटरी पैक को लगातार चार्ज करते रहते हैं। इसके अलावा, जब एंबुलेंस किसी गांव या रिमोट लोकेशन में रुकती है, तो इसके दोनों किनारों से एक्सटेंडेबल सोलर विंग्स (विस्तारित होने वाले अतिरिक्त पैनल्स) बाहर निकल आते हैं। यह प्रणाली कम धूप और खराब मौसम में भी जरूरत से ज्यादा बिजली पैदा करने की क्षमता रखती है।

एंबुलेंस के अंदर ही मौजूद हैं X-Ray, अल्ट्रासाउंड और वैक्सीन फ्रिज

यह वाहन केवल मरीजों को एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाने वाली सामान्य गाड़ी नहीं है, बल्कि एक पूर्ण 'मोबाइल हेल्थकेयर क्लीनिक' है।

  • डिजिटल एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड मशीन: इसमें ऑन-बोर्ड हाई-टेक डायग्नोस्टिक उपकरण लगे हैं, जिससे दूरदराज के मरीजों को बिना किसी बड़े अस्पताल गए मौके पर ही फ्रैक्चर, फेफड़ों के संक्रमण और आंतरिक चोटों की सटीक जांच मिल जाती है।

  • गर्भवती महिलाओं के लिए सोनोग्राफी: सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं के गर्भस्थ शिशु की स्थिति की जांच के लिए अल्ट्रासाउंड स्कैनिंग ऑन-स्पॉट की जा सकती है।

  • सोलर वैक्सीन रेफ्रिजरेटर: टीकों, एंटी-वेनम (सांप के जहर की दवा) और महत्वपूर्ण जीवनरक्षक दवाओं के लिए एक विशेष कोल्ड-चेन मेडिकल फ्रिज अंदर ही मौजूद है, जो भीषण गर्मी में भी 2 से 8 डिग्री सेल्सियस का स्थिर तापमान बनाए रखता है।

  • इमरजेंसी आईसीयू और टेलीमेडिसिन सेटअप: इसमें बेसिक लाइफ सपोर्ट मॉनिटर्स और सैटेलाइट कनेक्टिविटी सिस्टम दिया गया है, जिससे ग्रामीण डॉक्टर बड़े शहरों के सुपर-स्पेशलिस्ट डॉक्टरों से लाइव परामर्श ले सकते हैं।

बिजली कटौती में भी मेडिकल उपकरण चलाने पर खपत से ज्यादा पैदा हुई ऊर्जा

केन्या के ऊबड़-खाबड़ और धूल भरे 800 किलोमीटर के रास्तों पर किए गए परीक्षण के दौरान इंजीनियर्स और डॉक्टरों की टीम ने सभी मेडिकल उपकरणों (एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, फ्रीजर और लाइट्स) को एक साथ फुल लोड पर चलाया। डेटा विश्लेषण में सामने आया कि वाहन के सोलर पैनल्स और एनर्जी मैनेजमेंट सिस्टम ने उपकरणों द्वारा खर्च की गई कुल बिजली से कहीं अधिक सौर ऊर्जा का उत्पादन किया। इसका मतलब है कि यह गाड़ी उन गांवों में जहां महीनों तक ग्रिड की बिजली नहीं आती, वहां खुद एक 'पावर स्टेशन' की तरह काम कर सकती है।

दूरदराज के क्षेत्रों और आपदा प्रभावित इलाकों के लिए जीवनदान

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के मुताबिक, अफ्रीका और विकासशील देशों की एक-तिहाई से ज्यादा ग्रामीण आबादी किसी भी बुनियादी स्वास्थ्य केंद्र से 2 घंटे से अधिक की दूरी पर रहती है। आपातकालीन स्थिति में अस्पताल पहुंचते-पहुंचते मरीजों की जान चली जाती है। ऐसे इलाकों के अलावा बाढ़, भूकंप या चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं में जब बिजली के खंभे और सड़कें तबाह हो जाती हैं, तब यह सोलर एंबुलेंस बिना किसी बाहरी ईंधन या ग्रिड सप्लाई के तुरंत पहुंचकर घायलों का इलाज शुरू कर सकती है।

भविष्य का हेल्थकेयर मॉडल: भारत जैसे देशों के लिए कितनी उपयोगी?

'स्टेला जुवा' की इस 800 किमी की सफल टेस्टिंग के बाद अब इसे विभिन्न देशों में व्यावसायिक और राहत कार्यों के लिए बड़े पैमाने पर पेश करने की योजना है। भारत के पूर्वोत्तर राज्यों, लद्दाख और उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों तथा रेगिस्तानी इलाकों में जहां आज भी प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है, वहां इस तरह की सोलर एंबुलेंस एक क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। शून्य कार्बन उत्सर्जन और जीरो रनिंग कॉस्ट वाली यह तकनीक पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ अंतिम छोर तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने का नया वैश्विक मॉडल बन गई है।

Latest Posts