किसी की मौत के बाद क्या होता है उसके बैंक अकाउंट और पैसों का? RBI क्यों भेज रहा ये मैसेज, आखिर क्या है मामला?

किसी की मौत के बाद क्या होता है उसके बैंक अकाउंट और पैसों का? RBI क्यों भेज रहा ये मैसेज, आखिर क्या है मामला?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की तरफ से ग्राहकों के जागरूक करते हुए एक खास मैसेज भेजा जा रहा है. इसके तहत किसी खाताधारक की मौत के बाद उसके बैंक खातों में जमा रकम और लॉकर के क्लेम सेटलमेंट के बारे में बताया जा रहा है. केंद्रीय बैंक के नियम के तहत बैंकों को सभी जरूरी दस्तावेज मिलने के 15 दिनों के अंदर क्लेम का पूरा निपटारा करना होता है. साथ ही बैंक खाते को बंद कर दिया जाता है, क्योंकि उसका असर मालिक अब दुनिया में नहीं है.

यह फैसला इसलिए ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि अब तक परिजनों को मृत व्यक्ति की जमा पूंजी पाने के लिए महीनों तक अदालतों और बैंक शाखाओं के चक्कर काटने पड़ते थे. नए नियमों के तहत नॉमिनी या जीवित साथी को बिना किसी उत्तराधिकार प्रमाण पत्र के पूरा पैसा मिल जाएगा. बैंक खातों में बिना रुकावट क्लेम सुनिश्चित करने के लिए सभी जमाकर्ताओं को अपने खाते में नॉमिनी का नाम दर्ज कराने की सलाह दी गई है.

नॉमिनी तुरंत जोड़ें, ताकि दिक्कत ना हो

भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से ग्राहकों को इस बात को लेकर जागरूक किया जा रहा है कि वह अपने बैंक खातों में तुरंत ही नॉमिनी जोड़ें. ऐसे में अगर कुछ अनहोनी होती है तो परिवार को मृतक के खाते में जमा पैसों के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा. अगर नॉमिनी नहीं होता है तो परिवार को पैसे हासिल करने में दिक्कत होती है.

क्लेम पाने के 3 आसान स्टेप्स: 15 दिनों में खाते का पैसा होगा ट्रांसफर

आरबीआई ने मृतक खाताधारकों के डिपेंडेंट लोगों को मानसिक और आर्थिक परेशानी से बचाने के लिए पूरी प्रक्रिया को सिर्फ 3 आसान स्टेप में बांट दिया है:

1- बैंक शाखा या वेबसाइट पर जाएं: क्लेम करने वाले व्यक्ति को संबंधित बैंक की नजदीकी शाखा में जाना होगा या बैंक के आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल पर विजिट करना होगा.

2- क्लेम फॉर्म भरें: बैंक की तरफ से जारी निर्धारित क्लेम फॉर्म में मृतक और दावेदार की सही जानकारी दर्ज करनी होगी.

3- जरूरी दस्तावेज जमा करें: खाताधारक का मृत्यु प्रमाण पत्र (डेथ सर्टिफिकेट), दावेदार का पहचान पत्र और पते का प्रमाण बैंक में जमा करना होगा.

जैसे ही ये दस्तावेज जमा होंगे, बैंक को ठीक 15 कैलेंडर दिनों के अंदर खाते में जमा पूरी रकम का भुगतान करना होगा. अगर बैंक इस समयसीमा में देरी करता है, तो उसे इसका ठोस कारण बताना होगा.

नॉमिनी और 'आइदर और सर्वाइवर' खाते

केंद्रीय बैंक ने बैंकों को सख्त हिदायत दी है कि जिन खातों में नॉमिनी दर्ज है या जो खाते 'आइदर और सर्वाइवर' (Either or Survivor) क्लॉज के तहत संचालित हो रहे थे, उनमें प्रक्रिया को बिल्कुल सरल रखा जाए:

उत्तराधिकार प्रमाण पत्र की कोई जरूरत नहीं: बैंक अब नॉमिनी या जीवित साथी से सक्सेशन सर्टिफिकेट (Succession Certificate), लेटर ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन या प्रोबेट की मांग नहीं कर सकते.

इंडेम्निटी बॉन्ड से भी राहत: खाते में चाहे कितनी भी बड़ी रकम जमा हो, बैंक दावेदार से कोई क्षतिपूर्ति बॉन्ड (Bond of Indemnity) या किसी गारंटर की मांग नहीं कर सकते.

बिना नॉमिनी वाले खातों के लिए सीमा तय: जिन खातों में नॉमिनी या सर्वाइवर क्लॉज नहीं है, उनके लिए बैंकों को एक न्यूनतम सीमा (Threshold Limit) तय करने को कहा गया है. इस सीमा तक की रकम केवल एक इंडेम्निटी लेटर लेकर बिना किसी दूसरे अदालती दस्तावेज के तुरंत जारी की जा सकेगी.

एफडी और लॉकर के लिए नियम

आरबीआई की तरफ से केवल सामान्य बचत खाते तक के लिए ही नहीं, बल्कि फिक्स्ड डिपॉजिट और सेफ डिपॉजिट लॉकर को लेकर भी स्पष्ट नियम बनाए गए हैं:

बिना किसी पेनल्टी के एफडी से निकासी: अगर किसी टर्म डिपॉजिट (FD) खाताधारक की मृत्यु हो जाती है, तो बैंक उस एफडी को समय से पहले बंद करने पर कोई भी जुर्माना या पेनल्टी चार्ज नहीं वसूलेंगे. बैंकों को खाता खोलने वाले फॉर्म में ही यह क्लॉज जोड़ना होता है.

सेफ डिपॉजिट लॉकर का एक्सेस: बैंक लॉकर या कस्टडी में रखे सामान को निकालने के लिए भी जीवित साथी या नॉमिनी के लिए वही आसान नियम लागू होंगे जो बैंक खातों के लिए तय किए गए हैं.

Conclusion

RBI की तरफ से मृतक खाताधारकों के खातों में 15 दिनों के भीतर क्लेम निपटाने का नियम देश के बैंकिंग सिस्टम को मानवीय और संवेदनशील बनाने वाला कदम है. नॉमिनी और सर्वाइवर को बिना कोर्ट कचहरी के पूरी जमा पूंजी मिलने से परिवारों को समय पर सहारा मिलेगा. पाठकों को किसी भी अनहोनी की स्थिति में अपने प्रियजनों की सहूलियत के लिए आज ही अपने बचत खातों, एफडी और लॉकर में वैध नॉमिनी का नाम दर्ज करा लेना चाहिए.