भाई-बहन के प्यार का प्रतीक: क्या भाई द्वारा बहन को दी गई प्रॉपर्टी पर लगता है टैक्स? जानें गिफ्ट डीड के नियम

भाई-बहन के प्यार का प्रतीक: क्या भाई द्वारा बहन को दी गई प्रॉपर्टी पर लगता है टैक्स? जानें गिफ्ट डीड के नियम

भारतीय संस्कृति में भाई और बहन के रिश्ते को सबसे पवित्र और अनमोल रिश्तों में से एक माना जाता है, जहां भाई अक्सर रक्षाबंधन या अन्य विशेष अवसरों पर अपनी बहन को तरह-तरह के तोहफे और उपहार देते हैं। कई बार भाई अपनी बहन के नाम पर कोई घर, जमीन, फ्लैट या अन्य अचल संपत्ति (Property) गिफ्ट करना चाहते हैं ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके। लेकिन, जैसे ही संपत्ति के ट्रांसफर की बात आती है, आम आदमी के मन में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि क्या इतनी बड़ी संपत्ति भाई से मिलने पर आयकर (Income Tax) के दायरे में आएगी या नहीं? आमतौर पर लोगों के मन में यह डर रहता है कि सरकार प्रॉपर्टी के ट्रांसफर पर भारी-भरकम टैक्स वसूल सकती है। इस वित्तीय और कानूनी उलझन को दूर करने के लिए आयकर अधिनियम (Income Tax Act) में बहुत स्पष्ट और पारदर्शी नियम बनाए गए हैं, जिन्हें जानना हर भाई-बहन के लिए बेहद जरूरी है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की कानूनी परेशानी से बचा जा सके।

इनकम टैक्स की धारा 56(2)(x) के तहत भाई-बहन को माना जाता है करीबी रिश्तेदार

आयकर नियमों और वित्तीय प्रावधानों के अनुसार, भारत में इनकम टैक्स, 1961 की धारा 56(2)(x) के अंतर्गत भाई और बहन के रिश्ते को 'क्लोज रिलेटिव' यानी करीबी रिश्तेदार की श्रेणी में रखा गया है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह मिलता है कि यदि कोई भाई अपनी बहन को बिना किसी मौद्रिक प्रतिफल यानी बिना पैसों के लेन-देन के अपनी कोई अचल संपत्ति या घर गिफ्ट के तौर पर देता है, तो उस गिफ्ट की गई प्रॉपर्टी पर प्राप्ति के समय कोई टैक्स नहीं लगता है। यानी जब प्रॉपर्टी बहन के नाम ट्रांसफर की जाती है, तब टैक्स विभाग की तरफ से कोई टैक्स देनदारी नहीं बनती है। यह नियम केवल अचल संपत्ति ही नहीं, बल्कि नकदी, शेयर या अन्य कीमती उपहारों पर भी लागू होता है बशर्ते वह भाई-बहन के बीच कानूनी रूप से बिना किसी कमर्शियल डील के ट्रांसफर किया गया हो। हालांकि, लोगों को अक्सर यह गलतफहमी हो जाती है कि टैक्स छूट मिलने का मतलब यह है कि इस संपत्ति से कभी भी किसी भी रूप में टैक्स नहीं वसूला जाएगा, जबकि नियम इसके थोड़े अलग और तकनीकी हैं।

भविष्य में जब बहन बेचेगी प्रॉपर्टी, तब कैसे होगी कैपिटल गेन टैक्स की गणना?

यह बात बहुत ही महत्वपूर्ण है कि भले ही भाई द्वारा बहन को प्रॉपर्टी गिफ्ट करते वक्त तुरंत कोई टैक्स नहीं देना पड़ता है, लेकिन इसका यह कतई मतलब नहीं है कि भविष्य में वह प्रॉपर्टी पूरी तरह टैक्स फ्री रहेगी। यदि आने वाले समय में बहन उस गिफ्ट में मिली हुई संपत्ति या जमीन को किसी अन्य व्यक्ति को बेचती है, तो उस पर कैपिटल गेन टैक्स (Capital Gains Tax) के नियम लागू हो जाएंगे। जब बहन उस प्रॉपर्टी को बेचेगी, तो टैक्स की गणना करते समय एक अहम नियम काम करता है। कैपिटल गेन निकालते समय बहन के लिए उस संपत्ति की लागत (Cost of Acquisition) वह कीमत नहीं होगी जिस दिन उसे गिफ्ट मिली थी, बल्कि उस मूल कीमत को आधार बनाया जाएगा जिस कीमत पर भाई ने उस प्रॉपर्टी को खुद खरीदा था। इसके अलावा, भाई के पास जितने समय तक वह संपत्ति रही, उस समयावधि को भी जोड़ा जाएगा ताकि यह तय किया जा सके कि यह शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन है या लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन। इसलिए भाई द्वारा खरीदे गए पुराने दस्तावेज और खरीद की रसीद संभाल कर रखना बेहद आवश्यक है।

प्रॉपर्टी गिफ्ट करते समय इन जरूरी कानूनी और कागजी बातों का रखें ध्यान

जब भी कोई भाई अपनी बहन के नाम पर कोई संपत्ति ट्रांसफर करे, तो केवल मौखिक या पारिवारिक सहमति काफी नहीं होती है, बल्कि कानूनी रूप से सभी दस्तावेजों को दुरुस्त रखना अनिवार्य है। सबसे पहला और मुख्य कदम यह है कि संपत्ति के ट्रांसफर के लिए एक रजिस्टर्ड 'गिफ्ट डीड' (Gift Deed) जरूर बनवाई जानी चाहिए और उसका विधिवत रजिस्ट्रेशन होना चाहिए। बिना रजिस्टर्ड गिफ्ट डीड के कानून की नजर में प्रॉपर्टी का मालिकाना हक ट्रांसफर नहीं माना जाता है। इसके अलावा, भाई की ओर से संपत्ति की मूल खरीद से जुड़े सभी दस्तावेज, बैंक ट्रांजैक्शन के कागजात और टैक्स रसीदें सुरक्षित रखनी चाहिए। गिफ्ट देने और लेने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि इसके बदले में कोई मौद्रिक भुगतान न किया गया हो। यदि बहन इसके बदले में भाई को कोई बहुत बड़ी या महंगी चीज देती है, तो आयकर विभाग इसे साधारण उपहार की बजाय एक कमर्शियल ट्रांजैक्शन मान सकता है, जिससे टैक्स के नियम पूरी तरह बदल सकते हैं।

किन-किन करीबी रिश्तेदारों से मिलने वाले गिफ्ट पूरी तरह होते हैं टैक्स फ्री?

भारतीय आयकर कानून के दायरे में केवल भाई-बहन ही नहीं, बल्कि परिवार के कुछ चुनिंदा और करीबी रिश्तेदारों से मिलने वाले सभी प्रकार के उपहार पूरी तरह से टैक्स फ्री होते हैं। कानून के मुताबिक पति या पत्नी से मिलने वाले उपहार, माता-पिता से मिलने वाली संपत्ति, माता-पिता के भाई या बहन (यानी चाचा, ताऊ, बुआ, मामा, मौसी आदि), खुद की संतान और उनके जीवनसाथी तथा पति या पत्नी के माता-पिता यानी सास-ससुर से मिलने वाले गिफ्ट पर इनकम टैक्स अधिनियम के तहत कोई टैक्स नहीं लगाया जाता है। हालांकि, इन रिश्तेदारों की सूची के बाहर यदि किसी दूर के रिश्तेदार या मित्र से कोई बड़ी संपत्ति या कीमती उपहार मिलता है, तो पचास हजार रुपये से अधिक की कुल राशि होने पर वह पूरा उपहार कर योग्य (Taxable) हो जाता है। इसलिए भाई-बहन के रिश्ते को मिले इस विशेष कानूनी प्रावधान का सही इस्तेमाल करते हुए नियमानुसार ही संपत्ति का आदान-प्रदान करना चाहिए, ताकि परिवार में प्रेम भी बना रहे और कानून का पूरी तरह से पालन भी हो सके।

Latest Posts