बैंक में जमा चेक गायब हो जाए तो क्या करें? RBI नियमों के तहत बैंक की तय होगी जवाबदेही, मिलेगा हर्जाना
बैंक की शाखा में चेक ड्रॉप बॉक्स में डालने या काउंटर पर रसीद लेकर जमा करने के बाद कई बार ग्राहक हफ्तों तक खाते में पैसे आने का इंतजार करते रहते हैं। बाद में पता चलता है कि चेक बैंक से ही कहीं खो गया है या क्लीयरिंग हाउस के रास्ते में गुम हो गया है। ऐसी स्थिति में आम खाताधारक अक्सर घबरा जाते हैं कि उनके पैसे डूब गए या चेक का कोई गलत इस्तेमाल कर लेगा। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के ग्राहक सेवा और 'चेक कलेक्शन पॉलिसी' (Cheque Collection Policy) के दिशानिर्देशों के अनुसार, बैंक में जमा होने के बाद चेक सुरक्षित रखने और उसे भुनाने की पूरी जिम्मेदारी बैंक की होती है। यदि बैंक की लापरवाही या ट्रांजिट में चेक खो जाता है, तो बैंक अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकता।
बैंक से चेक खो जाने पर किसकी होगी जिम्मेदारी?
RBI के स्पष्ट नियमों के मुताबिक, जब कोई ग्राहक चेक बैंक में जमा कर देता है और पावती (Acknowledgement Slip) प्राप्त कर लेता है, तब वह चेक बैंक की कस्टडी में माना जाता है। क्लीयरिंग प्रक्रिया (CTS Clearing) या एक शाखा से दूसरी शाखा तक चेक भेजने (Transit) के दौरान यदि दस्तावेज खोता है, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी कलेक्टिंग बैंक या संबंधित पेइंग बैंक की होती है। उपभोक्ता संरक्षण कानून और बैंकिंग लोकपाल के आदेशों के तहत इसे 'सेवा में कमी' (Deficiency in Service) माना गया है। बैंक ग्राहक को यह कहकर वापस नहीं लौटा सकता कि चेक का खोना उसकी गलती नहीं है।
चेक खो जाने पर ग्राहक को तुरंत क्या कदम उठाने चाहिए?
अगर आपके खाते में निर्धारित समय (लोकल चेक के लिए सामान्यतः 2-3 कार्यदिवस) के बाद भी राशि क्रेडिट नहीं हुई है, तो बिना देरी किए निम्नलिखित कदम उठाएं:
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बैंक से लिखित सूचना और मिसिंग सर्टिफिकेट लें: सबसे पहले होम ब्रांच जाकर शाखा प्रबंधक से मिलें और चेक जमा करने की मूल पर्ची (Deposit Slip) दिखाएं। बैंक यदि स्वीकार करता है कि चेक खो गया है, तो उनसे लिखित में 'चेक लॉस्ट सर्टिफिकेट' (Lost Cheque Certificate / Non-Payment Certificate) जारी करने की मांग करें।
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ड्रॉअर (चेक देने वाले) को तुरंत अलर्ट करें: जिसने आपको चेक जारी किया था, उसे तुरंत फोन और ईमेल पर सूचित करें कि बैंक से चेक गुम हो गया है। उनसे कहें कि वे अपने बैंक खाते में जाकर संबंधित चेक नंबर पर तत्काल 'Stop Payment' का निर्देश दर्ज करवा दें, ताकि किसी भी स्थिति में उस खोए हुए चेक का गलत इस्तेमाल न हो सके।
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डुप्लीकेट चेक का अनुरोध करें: चेक जारीकर्ता को बैंक द्वारा जारी किया गया लॉस्ट सर्टिफिकेट या लिखित पुष्टि दिखाएं और उसी राशि का नया या डुप्लीकेट चेक जारी करने का अनुरोध करें।
RBI नियमों के तहत मुआवजे और खर्च की भरपाई का नियम
चेक खोने की स्थिति में ग्राहक को होने वाली परेशानी और वित्तीय नुकसान की भरपाई के लिए RBI ने सख्त दिशा-निर्देश तय किए हैं:
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स्टॉप पेमेंट और डुप्लीकेट चेक का खर्च: चेक देने वाले (ड्रॉअर) के बैंक द्वारा स्टॉप पेमेंट लगाने पर लगने वाले बैंक चार्ज और डुप्लीकेट चेक जारी करने के सभी प्रशासनिक खर्चों की भरपाई कलेक्टिंग बैंक को ही करनी होगी।
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ब्याज सहित हर्जाना: यदि चेक खोने की सूचना बैंक ने संग्रह अवधि (Collection Period) समाप्त होने के बाद दी है, तो बैंक को देरी की अवधि के लिए लागू बचत बैंक या फिक्स्ड डिपॉजिट ब्याज दर के अनुसार हर्जाना देना होगा। इसके अतिरिक्त, डुप्लीकेट चेक प्राप्त होने तक लगने वाले समय (आमतौर पर 15 दिन या उससे अधिक) के लिए भी बैंक को अतिरिक्त ब्याज अदा करना पड़ता है।
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लापरवाही पर मुआवजा: यदि बैंक असहयोग करता है या ग्राहक को लॉस्ट सर्टिफिकेट देने से मना करता है, जिसके कारण भुगतान पूरी तरह अटक जाता है, तो बैंक पर उपभोक्ता अदालत या बैंकिंग लोकपाल भारी हर्जाना लगा सकता है।
यदि बैंक मदद न करे तो कहां और कैसे करें शिकायत?
यदि शाखा प्रबंधक आपकी शिकायत पर ध्यान नहीं देता है या लिखित प्रमाण देने में टालमटोल करता है, तो आप इन चरणों में अपनी कानूनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं:
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बैंक के आंतरिक शिकायत निवारण (Internal Grievance Cell): बैंक के नोडल अधिकारी या प्रिंसिपल नोडल ऑफिसर (PNO) को ऑनलाइन पोर्टल के जरिए लिखित शिकायत भेजें।
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आरबीआई एकीकृत लोकपाल (RBI Integrated Ombudsman): यदि बैंक में शिकायत दर्ज कराने के 30 दिनों के भीतर संतोषजनक समाधान नहीं मिलता है या बैंक शिकायत खारिज कर देता है, तो आप आरबीआई के सीएमएस पोर्टल (cms.rbi.org.in) पर जाकर सीधे बैंकिंग लोकपाल के समक्ष शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
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उपभोक्ता फोरम (Consumer Commission): सेवा में घोर लापरवाही और मानसिक प्रताड़ना के लिए आप जिला उपभोक्ता आयोग (District Consumer Disputes Redressal Commission) का दरवाजा भी खटखटा सकते हैं, जहां कोर्ट बैंक को चेक राशि व मानसिक क्षतिपूर्ति का भुगतान करने का आदेश दे सकती है।