इस दिन ठप रहेगा UPI? व्यापारियों ने किया 'नो यूपीआई डे' का ऐलान, क्यूआर कोड पर काला कपड़ा डालकर सिर्फ कैश लेने की चेतावनी से मचा हड़कंप

इस दिन ठप रहेगा UPI? व्यापारियों ने किया 'नो यूपीआई डे' का ऐलान, क्यूआर कोड पर काला कपड़ा डालकर सिर्फ कैश लेने की चेतावनी से मचा हड़कंप

देशभर में चाय की टपरी से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल तक डिजिटल लेन-देन का सबसे लोकप्रिय जरिया बन चुके यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। खुदरा व्यापारियों, दुकानदारों और मर्चेंट एसोसिएशन्स के कुछ धड़ों ने डिजिटल पेमेंट्स से जुड़ी समस्याओं, बढ़ते अप्रत्यक्ष शुल्कों और आए दिन होने वाले सर्वर डाउन की घटनाओं के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराने के लिए 'नो यूपीआई डे' (No UPI Day) मनाने की चेतावनी दी है। व्यापारियों का कहना है कि वे इस विरोध प्रदर्शन के तहत अपनी दुकानों पर लगे फोनपे, गूगल पे, पेटीएम और भारतपे जैसे क्यूआर कोड (QR Code) पर काला कपड़ा बांधेंगे और ग्राहकों से सिर्फ नकद (Cash) में भुगतान स्वीकार करेंगे। इस संभावित हड़ताल की खबर सामने आते ही उन करोड़ों आम उपभोक्ताओं के बीच चिंता बढ़ गई है, जो अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पूरी तरह से ऑनलाइन वॉलेट और यूपीआई पर निर्भर हो चुके हैं।

क्या है 'नो यूपीआई डे' और क्यों नाराज हैं खुदरा व्यापारी?

भारत में कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए यूपीआई को गेम-चेंजर माना गया था और शुरुआत में इसे पूरी तरह फ्री रखा गया था। लेकिन समय बीतने के साथ मर्चेंट्स के सामने कई गंभीर तकनीकी और वित्तीय चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। व्यापारियों का आरोप है कि अब विभिन्न थर्ड-पार्टी एप्लिकेशन्स और फिनटेक प्लेटफॉर्म्स साउंडबॉक्स रेंटल, मंथली सर्विस चार्ज और वॉलेट ट्रांजेक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) जैसे छिपे हुए शुल्क वसूल रहे हैं। इसके अलावा, व्यस्त कारोबारी घंटों में बैंक सर्वर ठप होने के कारण ग्राहकों के खाते से पैसा कट जाता है लेकिन दुकानदार के पास नहीं पहुंचता। ऐसे में विवाद की स्थिति बनती है और अटका हुआ पैसा रिफंड होने में कई-कई दिन लग जाते हैं, जिससे छोटे व्यापारियों की वर्किंग कैपिटल फंस जाती है। इसी आक्रोश को सरकार, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) और बैंकिंग सिस्टम तक पहुंचाने के लिए व्यापारियों ने एक दिन के लिए यूपीआई लेन-देन का बहिष्कार करने का फैसला लिया है।

क्यूआर कोड पर काला कपड़ा और सिर्फ कैश पेमेंट: क्या होगा जमीनी असर?

व्यापारी संगठनों द्वारा तैयार की गई रणनीति के मुताबिक, विरोध के दिन सभी पंजीकृत दुकानें और स्थानीय आउटलेट्स अपने काउंटर पर लगे स्कैनर स्टैंड को काले कपड़े से ढक देंगे। दुकान के बाहर बड़े अक्षरों में 'आज केवल नकद स्वीकार्य है' या 'No Online Payment Today' के पोस्टर लगाए जाएंगे। अगर यह विरोध बड़े पैमाने पर लागू होता है, तो इसका सबसे सीधा असर उन शहरी और युवा उपभोक्ताओं पर पड़ेगा जो जेब में बटुआ या नकदी रखना लगभग छोड़ चुके हैं। दूध, सब्जी, किराना, पेट्रोल पंप और लोकल ट्रांसपोर्ट जैसी दैनिक आवश्यक सेवाओं में नकदी की भारी किल्लत देखने को मिल सकती है। बैंक एटीएम (ATM) पर अचानक नकदी निकालने वालों की लंबी कतारें लग सकती हैं, जिससे बैंकों के कैश मैनेजमेंट लॉजिस्टिक्स पर भी दबाव बढ़ जाएगा।

एनपीसीआई (NPCI) और सरकार का क्या है रुख?

व्यापारियों की नाराजगी के बीच एनपीसीआई और वित्त मंत्रालय ने बार-बार स्पष्ट किया है कि आम नागरिकों और छोटे खुदरा व्यापारियों (P2M ट्रांजेक्शन) के लिए सामान्य बैंक-टू-बैंक यूपीआई ट्रांसफर पूरी तरह से मुफ्त और शून्य-शुल्क व्यवस्था पर आधारित है। नियामक संस्थाओं का कहना है कि प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (PPI) जैसे मर्चेंट वॉलेट पर लागू होने वाले इंटरचेंज चार्ज का बोझ छोटे दुकानदारों पर नहीं डाला गया है। तकनीकी विफलताओं को कम करने के लिए बैंकों को अपने आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर को लगातार अपग्रेड करने और रियल-टाइम डिस्प्यूट रेजोल्यूशन मैकेनिज्म को मजबूत करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि 'नो यूपीआई डे' जैसे विरोध प्रदर्शन से डिजिटल भुगतान की गति पूरी तरह नहीं रुकेगी, लेकिन यह नीति निर्माताओं के लिए एक चेतावनी जरूर है कि फिनटेक कंपनियों की मनमानी फीस और बैंकिंग सर्वर की खामियों को तुरंत दुरुस्त किया जाए।

उपभोक्ताओं के लिए जरूरी सुझाव: संकट से कैसे बचें?

यदि आपके शहर या इलाके में व्यापारी संगठन इस तरह के विरोध प्रदर्शन में शामिल होते हैं, तो किसी भी असुविधा से बचने के लिए कुछ सावधानियां बरतना समझदारी होगी। अपने पास पर्याप्त मात्रा में 100, 200 और 500 रुपये के छोटे करेंसी नोट रखें ताकि रोजमर्रा की खरीदारी प्रभावित न हो। जहां तक संभव हो, बड़े डिपार्टमेंटल स्टोर्स या सुपरमार्केट्स में डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या नेट बैंकिंग का इस्तेमाल करें। अगर कोई दुकानदार ऑनलाइन पेमेंट लेने से मना करता है, तो विवाद करने के बजाय पास के एटीएम से कैश की व्यवस्था करें। डिजिटल युग में पूरी तरह कैशलेस होना सुविधाजनक जरूर है, लेकिन ऐसे आकस्मिक मौकों के लिए हमेशा कुछ लिक्विड कैश साथ रखना सबसे सुरक्षित वित्तीय आदत है।