देश में आएगी नौकरियों की महा-सुनामी! 7 राज्यों में 12 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार देने का मेगा एक्शन प्लान तैयार, जानिए आपके राज्य में कब और कैसे मिलेंगे नए अवसर!
देश के बेरोजगार युवाओं और रोजगार की तलाश में जुटे लाखों प्रोफेशनल्स के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है। केंद्र सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयासों से देश के 7 प्रमुख राज्यों में युवाओं को नौकरियों की सौगात देने के लिए एक ऐतिहासिक मेगा एक्शन प्लान को अंतिम रूप दे दिया गया है। 'मेक इन इंडिया' और 'मेक फॉर द वर्ल्ड' विजन को धरातल पर उतारने के लिए सरकार ने 7 राज्यों में अत्याधुनिक मेगा टेक्सटाइल और इंडस्ट्रियल पार्कों (PM MITRA Parks) के निर्माण की गति को तेज कर दिया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के जरिए आगामी समय में 12 लाख से 20 लाख प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार (Direct & Indirect Jobs) सृजित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 70 हजार करोड़ रुपये से अधिक के भारी-भरकम निजी और सार्वजनिक निवेश के साथ यह कदम देश के औद्योगिक और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में क्रांति लाने जा रहा है।
किन 7 राज्यों में स्थापित हो रहे हैं ये मेगा जॉब हब?
इस महा-परियोजना के लिए देश के 13 राज्यों से प्राप्त 18 कड़े प्रस्तावों में से सबसे उपयुक्त 7 राज्यों और उनके प्रमुख शहरों का पारदर्शी तरीके से चयन किया गया है। इनमें उत्तर भारत से लेकर दक्षिण और पश्चिम भारत के औद्योगिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य शामिल हैं:
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उत्तर प्रदेश (लखनऊ): राजधानी लखनऊ के निकट 1000 एकड़ क्षेत्र में बन रहा मेगा पार्क पूर्वांचल और मध्य यूपी के लाखों युवाओं को रोजगार प्रदान करेगा।
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मध्य प्रदेश (धार): मालवा-निमाड़ क्षेत्र के धार जिले में विशाल इंडस्ट्रियल और टेक्सटाइल क्लस्टर तैयार हो रहा है।
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गुजरात (नवसारी): कपड़ा उद्योग के पारंपरिक केंद्र गुजरात के नवसारी में आधुनिक विनिर्माण हब बनेगा।
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महाराष्ट्र (अमरावती): विदर्भ क्षेत्र के अमरावती में स्थापित होने वाला पार्क स्थानीय युवाओं और किसानों को आर्थिक मजबूती देगा।
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तमिलनाडु (विरुधुनगर): दक्षिण भारत के इस प्रमुख औद्योगिक जिले में वैश्विक स्तर की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स लगेंगी।
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तेलंगाना (वारंगल): काकतीय मेगा टेक्सटाइल पार्क के माध्यम से तकनीकी और गैर-तकनीकी युवाओं को बंपर रोजगार मिलेगा।
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कर्नाटक (कलबुरगी): हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र के कलबुरगी में विशाल टेक्सटाइल क्लस्टर स्थानीय पलायन को रोकेगा।
पीएम मोदी का '5F' विजन: खेत से लेकर विदेशी बाजारों तक नौकरियों की बहार
यह पूरा रोजगार मॉडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विख्यात '5F' विजन यानी Farm to Fibre, Fibre to Factory, Factory to Fashion, and Fashion to Foreign (खेत से धागा, धागे से कारखाना, कारखाने से फैशन और फैशन से विदेश) पर आधारित है। अब तक देश में कपास उत्पादन, कताई, बुनाई, रंगाई, डिजाइनिंग और परिधान निर्माण अलग-अलग राज्यों और बिखरे हुए स्तरों पर होता था, जिससे लागत अधिक आती थी। इन 7 राज्यों में बन रहे मेगा पार्कों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि कच्चे माल से लेकर अंतिम ब्रांडेड कपड़े के निर्यात तक की पूरी श्रृंखला एक ही छत के नीचे उपलब्ध होगी। इससे लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी, भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनेंगे और हर चरण पर हजारों नई नौकरियों का सृजन होगा।
किन-किन सेक्टर्स में मिलेंगी नौकरियां? 10वीं पास से लेकर बीटेक होल्डर्स तक का मौका
इस योजना के तहत 12 लाख से अधिक रोजगार के अवसर केवल किसी एक वर्ग के लिए नहीं, बल्कि हर तरह की शैक्षणिक योग्यता और कौशल रखने वाले युवाओं के लिए तैयार किए जा रहे हैं:
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टेक्निकल एवं इंजीनियरिंग सेक्टर: बीटेक, डिप्लोमा और आईटीआई पास युवाओं के लिए टेक्सटाइल इंजीनियरिंग, मशीन ऑपरेटर, मेंटेनेंस इंजीनियर, ऑटोमेशन एक्सपर्ट और क्वालिटी कंट्रोलर के पद।
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डिजाइनिंग और फैशन इंडस्ट्री: निफ्ट (NIFT) और अन्य डिजाइन संस्थानों से पासआउट युवाओं के लिए फैशन डिजाइनर, टेक्सटाइल ग्राफिक डिजाइनर, फैब्रिक स्टाइलिस्ट और ट्रेंड एनालिस्ट की भूमिकाएं।
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लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन और पैकेजिंग: वेयरहाउस मैनेजमेंट, पैकेजिंग स्पेशलिस्ट, इन्वेंट्री मैनेजर, सप्लाई चेन को-ऑर्डिनेटर और ट्रांसपोर्टेशन से जुड़े लाखों रोजगार।
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मार्केटिंग, सेल्स और एक्सपोर्ट मैनेजमेंट: इंटरनेशनल बिजनेस, एक्सपोर्ट-इंपोर्ट डॉक्यूमेंटेशन, डिजिटल मार्केटिंग, रिटेल स्टोर ऑपरेशंस और ई-कॉमर्स मर्चेंडाइजिंग।
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कुशल व अर्ध-कुशल कार्यबल: सिलाई, कताई, बुनाई, प्रिंटिंग, डाइंग और फिनिशिंग जैसे कार्यों में 10वीं-12वीं पास और कौशल विकास केंद्रों से प्रशिक्षित स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा।
₹70,000 करोड़ का मेगा निवेश और ग्लोबल कंपनियों का आगमन
इन 7 मेगा पार्कों को धरातल पर उतारने के लिए केंद्र सरकार ₹4,445 करोड़ की वित्तीय सहायता बुनियादी ढांचे के विकास के लिए दे रही है, जबकि निजी क्षेत्र से ₹70,000 करोड़ से अधिक का प्रत्यक्ष निवेश आ रहा है। देश और दुनिया की शीर्ष कपड़ा, परिधान और खुदरा क्षेत्र की दिग्गज कंपनियां इन पार्कों में अपनी बड़ी विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने के लिए अनुबंध कर रही हैं। अरविंद लिमिटेड, वेलस्पन, वर्धमान और रेमंड जैसी नामी कंपनियों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय खरीदार सीधे इन केंद्रों से कपड़े और गारमेंट्स का आयात करेंगे। इस बड़े पूंजी निवेश से न केवल रोजगार बढ़ेगा बल्कि संबंधित राज्यों के टैक्स राजस्व में भी भारी बढ़ोतरी दर्ज होगी।
महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा जबर्दस्त बूस्ट
टेक्सटाइल और परिधान निर्माण उद्योग की सबसे बड़ी ताकत यह है कि इसमें 60 से 70 प्रतिशत कार्यबल महिलाओं का होता है। इन 7 राज्यों में स्थापित हो रहे पार्कों से ग्रामीण और अर्ध-शहरी पृष्ठभूमि की लाखों महिलाओं को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनने का मौका मिलेगा। स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने से गांवों से बड़े शहरों की ओर होने वाला युवाओं का पलायन थमेगा। इसके साथ ही कपास उगाने वाले किसानों को अपनी फसल का उचित मूल्य सीधे इन पार्कों की कताई मिलों से मिलेगा, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और किसानों की आय में सीधा इजाफा होगा।
स्थानीय युवाओं को तैयार करने के लिए स्किल डेवलपमेंट का रोडमैप
कंपनियों की जरूरतों के अनुरूप कुशल श्रमशक्ति तैयार करने के लिए राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) और राज्य कौशल विकास मिशनों ने विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम शुरू किए हैं। इन पार्कों के आसपास आधुनिक कौशल विकास केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं, जहां स्थानीय युवाओं को आधुनिक कंप्यूटर चालित मशीनों, डिजिटल प्रिंटिंग और औद्योगिक मानकों पर 3 से 6 महीने का नि:शुल्क प्रशिक्षण देकर सीधे इन फैक्ट्रियों में रोजगार से जोड़ा जाएगा।
यह 12 लाख नौकरियों का मेगा प्लान भारत को वैश्विक वस्त्र और विनिर्माण के नक्शे पर चीन और वियतनाम जैसे देशों के मुकाबले एक शीर्ष शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होने जा रहा है।