जॉब बदलने वाले टैक्सपेयर्स सावधान! ITR भरते समय की ये 3 गलतियां, तो सीधे घर आएगा इनकम टैक्स का नोटिस
अगर आपने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान अपनी नौकरी बदली है या एक ही साल के भीतर दो अलग-अलग कंपनियों में काम किया है, तो आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करते समय आपको अतिरिक्त सावधानी बरतने की सख्त जरूरत है। टैक्स विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ऐसे वेतनभोगी कर्मचारियों को दोनों नियोक्ताओं (कंपनियों) से मिली सैलरी को आपस में जोड़कर अपनी कुल सालाना आय घोषित करनी चाहिए। ऐसा न करने की स्थिति में आयकर विभाग (Income Tax Department) की ओर से सीधे टैक्स चोरी या विसंगति का नोटिस आ सकता है और आपके टैक्स रिफंड मिलने में भी लंबी देरी हो सकती है।
अक्सर कर्मचारी यह मान लेते हैं कि जब दोनों ही कंपनियों ने अपने-अपने स्तर पर टीडीएस (TDS) काट लिया है, तो उन्हें अब किसी अतिरिक्त जोड़-घटाव की आवश्यकता नहीं है। लेकिन टैक्स नियमों के अनुसार, दोनों कंपनियां केवल अपने द्वारा दी गई सैलरी के आधार पर ही टैक्स स्लैब और टीडीएस की गणना करती हैं। ऐसे में जब दोनों सैलरी जुड़ती हैं, तो आपकी कुल आय पर देय वास्तविक टैक्स और कटे हुए टीडीएस के बीच एक बड़ा अंतर निकल आता है, जिसे चुकाना आपकी जिम्मेदारी है।
कटौतियों और टैक्स छूटों का दो बार दावा करने की भूल न करें
टैक्स विशेषज्ञ प्रणव साई एस के अनुसार, दो अलग-अलग कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों को हाउस रेंट अलाउंस (HRA), धारा 80C (LIC, PPF आदि), धारा 80D (मेडिक्लेम) और 50,000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन जैसी टैक्स छूटों और कटौतियों का दावा पूरे वित्तीय वर्ष में केवल एक ही बार करना चाहिए।
देखा गया है कि कई कर्मचारी अनजाने में या जानकारी के अभाव में दोनों कंपनियों के डिक्लेरेशन फॉर्म में एक ही निवेश को दिखा देते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि दोनों कंपनियां आपको अलग-अलग टैक्स छूट दे देती हैं, जो कि पूरी तरह गैर-कानूनी है। आईटीआर दाखिल करते समय सबसे पहले दोनों कंपनियों से प्राप्त ग्रॉस सैलरी को एक साथ जोड़ना चाहिए और उसके बाद ही वैध कटौतियों को घटाना चाहिए।
ITR फाइल करने से पहले इन 5 बड़े दस्तावेजों का करें मिलान
विशेषज्ञों की सलाह है कि रिटर्न का फॉर्म सबमिट करने से पहले आपको अपने पास नीचे दिए गए सभी वित्तीय दस्तावेज डाउनलोड करके रख लेने चाहिए और उनका आपस में मिलान करना चाहिए:
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Form 16: दोनों कंपनियों द्वारा जारी किया गया टीडीएस सर्टिफिकेट।
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सैलरी स्लिप: दोनों कंपनियों की अंतिम महीनों की सैलरी स्लिप।
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Form 26AS: टैक्स पासबुक, जिसमें जमा हुआ टीडीएस दिखाई देता है।
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AIS और TIS: एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट और टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी।
यदि आपकी फॉर्म 16 में दिखाई गई सैलरी, एआईएस (AIS) या फॉर्म 26AS में दर्ज डिजिटल रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती है, तो रिटर्न दाखिल करने की जल्दबाजी न करें। पहले उस अंतर के तकनीकी कारण को समझें और जरूरत पड़ने पर अपनी पुरानी कंपनी के एचआर (HR) से बात कर आवश्यक सुधार करवाएं। गलत या अधूरी जानकारी के आधार पर रिटर्न भरने से आपका केस स्क्रूटनी में फंस सकता है।
क्यों आता है आयकर विभाग का नोटिस? जानिए अंदर की वजह
आयकर विभाग अब एडवांस डेटा एनालिटिक्स, एआई (AI) टूल्स और डिजिटल रिकॉर्ड की मदद से सभी टैक्स रिटर्न की बेहद बारीकी से स्वचालित जांच करता है। यदि आपके द्वारा दाखिल आईटीआर में दिखाई गई सैलरी, फॉर्म 16 या फॉर्म 26AS के रिकॉर्ड से ₹1 भी कम होती है, टीडीएस क्रेडिट मिसमैच होता है या कटौतियों का दोहरा दावा पकड़ा जाता है, तो विभाग का सिस्टम इसे तुरंत 'रेड फ्लैग' (संदिग्ध) मान लेता है और कंप्यूटर जनरेटेड नोटिस जारी कर देता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस सिरदर्द से बचने का सबसे आसान तरीका यह है कि जब भी आप साल के बीच में नौकरी बदलें, तो नई कंपनी ज्वाइन करते समय वहां के अकाउंट्स विभाग में Form 12B जरूर जमा करें। इस फॉर्म के जरिए आपकी नई कंपनी को आपकी पिछली नौकरी की सैलरी और वहां कटे टीडीएस की पूरी आधिकारिक जानकारी मिल जाती है, जिससे वे साल के अंत में आपका बिल्कुल सटीक टैक्स काटते हैं।
समय रहते दोनों कंपनियों की सैलरी, टीडीएस और अन्य स्रोतों से हुई आय का सही मिलान कर लेना ही सबसे सुरक्षित तरीका है। नौकरी बदलने वाले मिडिल क्लास कर्मचारियों के लिए आईटीआर भरते समय बरती गई थोड़ी सी सावधानी, भविष्य में कानूनी और वित्तीय परेशानियों से पूरी तरह बचा सकती है।