Stock Market Today: बाजार में मिले रिकवरी के ठोस संकेत, निफ्टी के लिए इन सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल्स पर रखें नजर

Stock Market Today: बाजार में मिले रिकवरी के ठोस संकेत, निफ्टी के लिए इन सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल्स पर रखें नजर

लगातार कई सत्रों की तेज गिरावट और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली के बाद घरेलू शेयर बाजार में स्थिरता और रिकवरी के पर्याप्त संकेत नजर आने लगे हैं। एशियाई बाजारों से मिल रहे सकारात्मक रुख और अमेरिकी बाजारों में नैस्डैक व एसएंडपी 500 की मजबूती ने दलाल स्ट्रीट पर सुस्त पड़े निवेशकों का भरोसा फिर से बढ़ाया है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी ने भी भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार के लिए राहत का काम किया है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक निफ्टी 50 अब निचले स्तरों पर मजबूत बेस बनाता दिख रहा है। लखनऊ, मुंबई, दिल्ली से लेकर देश भर के रिटेल और डीआईआई (DII) निवेशक इन स्तरों पर चुनिंदा लार्ज-कैप और क्वालिटी मिड-कैप शेयरों में वैल्यू बाइंग करते देखे जा रहे हैं। तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि इंडेक्स के ओवरसोल्ड जोन से बाहर आने के साथ ही शॉर्ट-कवरिंग रैली देखने को मिल सकती है, जिससे बाजार में ऊपर की ओर गति तेज होगी।

निफ्टी 50 के लिए प्रमुख सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल्स

ट्रेडर्स और स्विंग इन्वेस्टर्स के लिए मौजूदा बाजार में लेवल्स का ध्यान रखना सबसे अहम हो चुका है। तकनीकी चार्ट पर निफ्टी 50 के लिए सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल्स इस प्रकार हैं:

  • पहला अहम सपोर्ट: 22,500 से 22,480 का दायरा। यह स्तर पिछले कुछ सत्रों से लगातार एक मजबूत कुशन के रूप में काम कर रहा है। जब तक निफ्टी इसके ऊपर टिका है, तब तक गिरावट में खरीदारी (बाय ऑन डिप्स) का रुझान बना रह सकता है।

  • मजबूत बेस/क्रूशियल सपोर्ट: 22,400 का स्तर। किसी भी अप्रत्याशित वैश्विक झटके की स्थिति में यह स्तर बाजार को गिरने से रोकने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएगा। इसके नीचे फिसलने पर ही नई बिकवाली हावी हो सकती है।

  • पहला रेजिस्टेंस (बाधा स्तर): 22,650 से 22,700 का दायरा। निफ्टी को अपनी रिकवरी को मजबूत अपट्रेंड में बदलने के लिए इस स्तर के ऊपर टिकना और क्लोजिंग देना अनिवार्य होगा।

  • बड़ा ब्रेकआउट रेजिस्टेंस: 22,800 से 22,850 का स्तर। यदि इंडेक्स 22,700 को पार कर लेता है, तो शॉर्ट कवरिंग के दम पर निफ्टी तेजी से 22,800-22,850 के जोन की तरफ बढ़ सकता है।

टेक्निकल इंडिकेटर्स और ऑप्शन चेन का क्या है इशारा

तकनीकी संकेतकों की बात करें तो डेली चार्ट पर रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) अपने ओवरसोल्ड दायरे से धीरे-धीरे ऊपर उठकर न्यूट्रल टेरिटरी की ओर बढ़ रहा है, जो यह दर्शाता है कि मंदड़ियों (Bears) की पकड़ ढीली हो रही है। इसके अतिरिक्त, मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) पर भी नेगेटिव मोमेंटम घटता नजर आ रहा है। वहीं अगर डेरिवेटिव्स और ऑप्शन चेन (Option Chain) के आंकड़ों को देखें, तो 22,500 की स्ट्राइक पर भारी पुट राइटिंग (Put Writing) देखी जा रही है, जिससे यह स्तर एक मजबूत फ्लोर बन गया है। दूसरी तरफ, 22,700 और 22,800 की कॉल स्ट्राइक पर सबसे अधिक ओपन इंटरेस्ट (OI) जमा है, जो दर्शा रहा है कि कॉल राइटर्स इन स्तरों पर मुनाफावसूली या सप्लाई की तैयारी में हैं। अगर बाजार 22,650 के पार निकलता है, तो इन कॉल राइटर्स को अपनी पोजीशन काटनी पड़ेगी (शॉर्ट कवरिंग), जिससे इंडेक्स में 100 से 150 अंकों का एकतरफा उछाल आ सकता है।

बैंक निफ्टी और प्रमुख सेक्टर्स से मिल रहा सहारा

निफ्टी की इस संभावित रिकवरी में बैंकिंग और आईटी सेक्टर सबसे आगे खड़े नजर आ रहे हैं। बैंक निफ्टी ने भी अपने क्रूशियल सपोर्ट जोन को मजबूती से डिफेंड किया है। एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे दिग्गजों में निचले स्तरों पर लगातार डिलीवरी-बेस्ड खरीदारी देखी जा रही है। दूसरी ओर, अमेरिकी बाजारों में टेक शेयरों की रैली का सीधा फायदा भारतीय आईटी इंडेक्स (TCS, इंफोसिस, विप्रो) को मिल रहा है। इसके साथ ही ऑटो और फार्मा सेक्टर भी लगातार डिफेंसिव सपोर्ट दे रहे हैं, जबकि रियल्टी और मेटल स्टॉक्स में चुनिंदा खरीदारी का रुख देखा जा रहा है। सेक्टर-स्पेसिफिक एक्शन यह स्पष्ट कर रहा है कि बाजार में चौतरफा बिकवाली का दौर फिलहाल थमता नजर आ रहा है और ब्रॉड-बेस्ड रिकवरी की नींव तैयार हो रही है।

ट्रेडर्स और निवेशकों के लिए इस समय क्या हो सही रणनीति

मौजूदा बाजार में ट्रेडर्स को अत्यधिक आक्रामक होने के बजाय स्तरों पर आधारित रणनीति अपनानी चाहिए। लॉन्ग साइड के ट्रेडर्स को 22,500 के आसपास आने वाली किसी भी गिरावट को स्टॉपलॉस के साथ खरीदारी के अवसर के रूप में देखना चाहिए। वहीं, फ्रेश लॉन्ग पोजीशन बनाने वालों को 22,650 के ऊपर 15 से 30 मिनट की सस्टेन चाल का इंतजार करना चाहिए ताकि फेक ब्रेकआउट से बचा जा सके। वहीं, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह बाजार घबराने का नहीं, बल्कि फंडामेंटली मजबूत कंपनियों में सिस्टमैटिक तरीके से एकमुश्त या एसआईपी के जरिए अपनी पूंजी को धीरे-धीरे तैनात करने का सबसे उपयुक्त अवसर प्रदान कर रहा है। सख्त रिस्क मैनेजमेंट और स्टॉपलॉस का पालन ही इस वोलेटाइल बाजार में पूंजी सुरक्षा और बेहतर रिटर्न की कुंजी है।