आरबीआई एमपीसी नतीजों से ठीक पहले शेयर बाजार धड़ाम: सेंसेक्स 450 अंक टूटा
भारतीय शेयर बाजार के लिए सप्ताह का यह सत्र काफी उतार-चढ़ाव और घबराहट भरा साबित हो रहा है। देश के केंद्रीय बैंक यानी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बहुप्रतीक्षित बैठकों के नतीजों और रेपो रेट पर आने वाले फैसले से ठीक पहले दलाल स्ट्रीट पर बिकवाली का भारी दबाव देखने को मिला है। निवेशकों में इस बात को लेकर गहरी अनिश्चितता बनी हुई है कि केंद्रीय बैंक इस बार ब्याज दरों को लेकर क्या कड़ा रुख अपनाने वाला है, जिसके चलते बाजार में चौतरफा मुनाफावसूली हावी हो गई। प्रमुख संवेदी सूचकांक सेंसेक्स (Sensex) कारोबार के दौरान औंधे मुंह गिरते हुए 450 अंकों से अधिक का गोता लगा चुका है, जबकि व्यापक बाजार का पैमाना माना जाने वाला निफ्टी-50 (Nifty 50) भी मनोवैज्ञानिक स्तर को तोड़ते हुए 22,650 अंकों के अहम सपोर्ट लेवल के नीचे फिसल गया है। इस अचानक आई बड़ी गिरावट से निवेशकों की गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा कुछ ही घंटों में स्वाहा हो गया है, जिससे वित्तीय बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है।
एमपीसी की बैठकों और ब्याज दरों को लेकर बाजार की नर्वसनेस
भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ दिनों से लगातार सुस्ती और करेक्शन का दौर चल रहा था, लेकिन आज की बिकوالियों ने स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया है। बाजार के जानकारों और विश्लेषकों का मानना है कि इस भारी गिरावट का सबसे बड़ा कारण आरबीआई एमपीसी के संभावित नतीजों को लेकर निवेशकों का डर है। देश में महंगाई के आंकड़ों और वैश्विक अर्थव्यवस्था के रुख को देखते हुए यह कयास लगाए जा रहे हैं कि रिजर्व बैंक इस बार भी ब्याज दरों को लेकर कोई नरमी दिखाने के मूड में नहीं है या फिर दरों को यथावत रख सकता है। जब भी नीतिगत ब्याज दरों या लिक्विडिटी को लेकर केंद्रीय बैंक का कोई बड़ा फैसला आने वाला होता है, तो बैंकिंग, ऑटो, रियल्टी और फाइनेंशियल सेक्टर के शेयर सबसे पहले दबाव में आते हैं। आज के सत्र में भी ठीक यही नजारा देखने को मिला, जहां बड़े वित्तीय संस्थानों और दिग्गज कंपनियों के शेयरों में ताबड़तोड़ बिकवाली के कारण सूचकांक नीचे लुढ़कते चले गए।
सेक्टोरल सूचकांकों में हाहाकार, बैंकिंग और ऑटो शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली
सेंसेक्स और निफ्टी में आई इस तेज गिरावट के दौरान देश के लगभग सभी प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। बैंक निफ्टी (Bank Nifty) में आई भारी कमजोरी ने पूरे बाजार का मूड खराब कर दिया, क्योंकि निवेशक इस बात को लेकर डरे हुए हैं कि यदि रेपो रेट में कोई बदलाव होता है या ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो इसका सीधा असर बैंकों के मार्जिन और कंपनियों के कर्ज पर पड़ेगा। इसके अलावा, ऑटोमोबाइल, मेटल, रियल्टी और आईटी शेयरों में भी बिकवाली का दबाव साफ तौर पर महसूस किया गया। मझोले और छोटे शेयरों (Midcap and Smallcap) में हुई तेज बिकवाली ने खुदरा निवेशकों (Retail Investors) की चिंता को और बढ़ा दिया है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि उच्च स्तरों पर वैल्यूएशन काफी महंगे हो चुके थे, जिसके चलते एक स्वस्थ करेक्शन की गुंजाइश पहले से ही बनी हुई थी, और एमपीसी के नतीजों ने इस करेक्शन को और अधिक ट्रिगर कर दिया है।
निवेशकों के लिए आगे की क्या होनी चाहिए रणनीति
इस उथल-पुथल भरे बाजार के माहौल में आम और खुदरा निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि उन्हें इस समय क्या करना चाहिए। वित्तीय सलाहकारों का यह सुझाव है कि घबराहट में आकर (Panic Selling) अपने अच्छे और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों को कोड़ियों के भाव बेचने की गलती बिल्कुल न करें। बाजार के इस प्रकार के उतार-चढ़ाव आर्थिक चक्र का एक स्वाभाविक हिस्सा होते हैं। यदि लंबी अवधि का नजरिया रखा जाए, तो हर बड़ी गिरावट क्वालिटी स्टॉक्स को कम कीमत पर खरीदने का एक बेहतरीन अवसर प्रदान करती है। हालांकि, ट्रेडर्स को सलाह दी जाती है कि वे मौजूदा समय में बिना स्टॉप-लॉस के नई पोजीशन लेने से बचें, क्योंकि जब तक आरबीआई गवर्नर की तरफ से आधिकारिक मौद्रिक नीति के नतीजे घोषित नहीं हो जाते, तब तक बाजार में वोलेटिलिटी (Volatilitiy) अपने चरम पर बनी रहेगी। निवेशकों को अब पूरी तरह से केंद्रीय बैंक के आगामी फैसलों और वैश्विक संकेतों पर नजर बनाए रखनी चाहिए।