SEBI ने पकड़ा ₹1,000 करोड़ का महाघोटाला! सिर्फ ₹25 करोड़ को 34 बार घुमाकर दिखाया फर्जी लोन, कंपनी पर कसा शिकंजा
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने स्टॉक मार्केट में वित्तीय आंकड़ों और बैलेंस शीट में भारी फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करते हुए एक सूचीबद्ध कंपनी और उसके प्रमोटरों के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। सेबी की विस्तृत जांच में सामने आया कि कंपनी ने निवेशकों और बाजार को गुमराह करने के लिए मात्र 25 करोड़ रुपये की मूल पूंजी को बार-बार संबंधित संस्थाओं (Related Entities) के खातों में घुमाकर (Round-tripping) करीब 1,000 करोड़ रुपये का फर्जी लोन पोर्टफोलियो तैयार कर दिखाया था। इस तरह के वित्तीय हेरफेर का मकसद कंपनी की बैलेंस शीट को मजबूत दिखाना और शेयर की कीमतों को कृत्रिम रूप से बढ़ाना था।
सिर्फ 25 करोड़ रुपये को 34 बार घुमाने का चौंकाने वाला खेल नियामक की फॉरेंसिक और वित्तीय जांच में यह स्पष्ट हुआ कि कंपनी ने वित्तीय हेराफेरी के लिए एक सुनियोजित 'सर्कुलर रूटिंग' नेटवर्क तैयार किया था। इसमें कंपनी के मूल 25 करोड़ रुपये को कई शेल और संबद्ध कंपनियों के बैंक खातों में एक ही दिन या कुछ दिनों के भीतर लगातार ट्रांसफर किया गया। यह प्रक्रिया लगभग 34 बार दोहराई गई। कागजों पर हर ट्रांसफर को एक नए लोन वितरण (Loan Disbursement) और पुराने लोन की रीपेमेंट (Repayment) के तौर पर दर्ज किया गया। इसके चलते कंपनी के वित्तीय बहीखाते में कुल लोन बुक का आकार फूलकर 1,000 करोड़ रुपये से अधिक दिखने लगा, जबकि वास्तव में कोई नया फंड या वास्तविक उधारकर्ता मौजूद ही नहीं था।
बैलेंस शीट की चमक दिखाकर शेयरों में की गई हेराफेरी इस फर्जी लोन ग्रोथ के जरिए कंपनी ने खुद को तेजी से बढ़ती हुई वित्तीय कंपनी के रूप में पेश किया। वित्तीय परिणामों में बड़े पैमाने पर रेवेन्यू, ब्याज आय और एसेट ग्रोथ की झूठी तस्वीर पेश की गई, जिससे आम रिटेल निवेशक आकर्षित होकर कंपनी के शेयरों में खरीदारी करने लगे। प्रमोटरों और उनसे जुड़े ऑपरेटरों ने इस कृत्रिम तेजी का फायदा उठाकर ऊंचे दामों पर अपने शेयर बेचे और अवैध मुनाफा कमाया। सेबी ने इसे प्रिवेंशन ऑफ फ्रॉडुलेंट एंड अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिसेज (PFUTP) नियमों का खुला उल्लंघन करार दिया है।
कंपनी और प्रमोटरों पर सेबी का कड़ा एक्शन घोटाले की पुष्टि होने के बाद सेबी ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए संबंधित कंपनी, उसके प्रमोटरों और मुख्य प्रबंधकीय अधिकारियों (KMP) पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। सेबी ने इन सभी को सिक्योरिटीज मार्केट में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ट्रेडिंग करने से प्रतिबंधित कर दिया है। इसके अलावा, कंपनी के बैंक खातों की विस्तृत फॉरेंसिक ऑडिट के आदेश दिए गए हैं और वित्तीय धोखाधड़ी के जरिए कमाए गए अवैध मुनाफे (Unlawful Gains) को जब्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। नियामक ने साफ किया है कि बाजार में पारदर्शिता और निवेशकों के हितों से खिलवाड़ करने वाली किसी भी संस्था को बख्शा नहीं जाएगा।