RBI ने दी LIC को बड़ी मंजूरी, ICICI Bank में 9.99% तक हिस्सेदारी खरीदने का साफ हुआ रास्ता

RBI ने दी LIC को बड़ी मंजूरी, ICICI Bank में 9.99% तक हिस्सेदारी खरीदने का साफ हुआ रास्ता

भारतीय वित्तीय बाजार और बैंकिंग सेक्टर से एक बेहद बड़ी और अहम खबर सामने आ रही है। देश की सबसे बड़ी और भरोसेमंद सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम यानी LIC को देश के केंद्रीय बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से एक बार फिर से भारी-भरकम निवेश की हरी झंडी मिल गई है। हाल ही में एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) में हिस्सेदारी बढ़ाने की अनुमति मिलने के बाद अब आरबीआई ने एलआईसी को निजी क्षेत्र के दिग्गज बैंक यानी आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) में अपनी कुल हिस्सेदारी को बढ़ाकर 9.99 प्रतिशत तक करने की आधिकारिक मंजूरी प्रदान कर दी है। इस नियामकीय अनुमति के मिलने के बाद अब एलआईसी के लिए इस प्रमुख निजी बैंक में निवेश का दायरा बढ़ाने का पूरा रास्ता साफ हो गया है, जिसका असर आने वाले समय में शेयर बाजार और दोनों वित्तीय संस्थानों की चाल पर पड़ना तय माना जा रहा है।

RBI की नियामकीय फाइलिंग से हुआ बड़ा खुलासा, एक साल के भीतर पूरी करनी होगी प्रक्रिया

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा दी गई यह मंजूरी एक तय समय सीमा और निश्चित नियमों के दायरे में ही वैध होगी। एक्सचेंज फाइलिंग से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, आरबीआई की यह महत्वपूर्ण मंजूरी उसके औपचारिक लेटर जारी होने की तारीख से ठीक एक साल तक वैध रहेगी। इसका मतलब यह है कि एलआईसी को इस एक साल की निर्धारित अवधि के भीतर ही आईसीआईसीआई बैंक में अपनी हिस्सेदारी को बढ़ाकर 9.99 प्रतिशत के तय दायरे तक ले जाना होगा। यदि किसी कारणवश एलआईसी इस तय सीमा के भीतर यह हिस्सेदारी हासिल नहीं कर पाती है, तो केंद्रीय बैंक द्वारा दी गई यह मंजूरी स्वतः ही रद्द मानी जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान एलआईसी को आरबीआई की तरफ से तय की गई तमाम अन्य शर्तों और दिशा-निर्देशों का पूरी तरह से पालन करना होगा।

4 सितंबर को मिला केंद्रीय बैंक का आधिकारिक पत्र, चुकता शेयर पूंजी और मतदान अधिकारों पर होगा असर

इस पूरे घटनाक्रम की टाइमलाइन पर नजर डालें तो आईसीआईसीआई बैंक की ओर से दी गई नियामकीय फाइलिंग में बताया गया है कि बैंक को आरबीआई के इस अनुमति पत्र की आधिकारिक कॉपी 4 सितंबर 2026 को रात 9 बजकर 9 मिनट पर प्राप्त हुई थी। आरबीआई का यह पत्र भी इसी तारीख यानी 4 सितंबर 2026 को ही जारी किया गया था और इसे सीधे तौर पर एलआईसी को संबोधित किया गया था। इस पत्र के माध्यम से केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट रूप से अनुमति दी है कि एलआईसी बैंक की कुल चुकता शेयर पूंजी (Paid-up Share Capital) या बैंक के कुल मतदान अधिकारों (Voting Rights) में अधिकतम 9.99 प्रतिशत तक की हिस्सेदारी का अधिग्रहण कर सकती है। इस निवेश से देश के सबसे बड़े संस्थागत निवेशकों में शुमार एलआईसी की वित्तीय स्थिति और बाजार में उसकी पकड़ और अधिक मजबूत होगी।

अन्य सभी कानूनी और नियामकीय प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य, नियमों के दायरे में होगा सौदा

केंद्रीय बैंक द्वारा दी गई यह छूट या अनुमति केवल हिस्सेदारी खरीदने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ कई तरह के विधिक अनुपालन भी जुड़े हुए हैं। आईसीआईसीआई बैंक द्वारा शेयर बाजारों को दी गई जानकारी के अनुसार, यह प्रस्तावित हिस्सेदारी खरीद अन्य सभी लागू होने वाले कानूनी और नियामकीय प्रावधानों के पूर्ण अधीन होगी। इसमें भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से बैंकिंग नियमों और विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम या अन्य संबंधित अधिनियमों के तहत तय की गई शर्तें भी शामिल हैं। एलआईसी को यह सुनिश्चित करना होगा कि वह शेयर बाजार के नियमों, सेबी (SEBI) के दिशा-निर्देशों और बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट के दायरे में रहते हुए ही इस पूरी निवेश प्रक्रिया को अंजाम दे, ताकि किसी भी प्रकार के नियामकीय संकट से बचा जा सके।

हाल ही में HDFC Bank के लिए भी मिल चुकी है ऐसी ही बड़ी मंजूरी, लगातार आक्रामक हो रही है LIC

गौर करने वाली बात यह है कि एलआईसी को यह अनुमति ऐसे समय में मिली है जब कुछ समय पहले ही उसे देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक यानी एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) में भी अपनी हिस्सेदारी को बढ़ाकर 9.99 प्रतिशत तक करने की हरी झंडी आरबीआई से मिल चुकी है। एचडीएफसी बैंक की ओर से अगस्त के महीने में साझा की गई नियामकीय फाइलिंग में यह बात सामने आई थी कि केंद्रीय बैंक ने एलआईसी के उस आवेदन को स्वीकार कर लिया था जिसमें उसने बैंक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की इच्छा जताई थी। वर्तमान आंकड़ों के मुताबिक, एचडीएफसी बैंक में एलआईसी के पास पहले से ही लगभग 4.11 प्रतिशत की हिस्सेदारी मौजूद है, और उस अनुमति के बाद एलआईसी को कुल सीमा 9.99 प्रतिशत तक ले जाने का अधिकार मिल गया था। अब आईसीआईसीआई बैंक में भी इसी प्रकार की मंजूरी मिलने से यह साफ हो गया है कि देश के शीर्ष बीमा दिग्गज का रुझान देश के प्रमुख निजी बैंकों में अपने निवेश को सुरक्षित और दीर्घकालिक रूप से बढ़ाने पर पूरी तरह केंद्रित है।

शेयर बाजार और निवेशकों के लिए क्या हैं इसके मायने, भविष्य की रणनीतियों पर टिकी निगाहें

एलआईसी और देश के दो सबसे बड़े निजी बैंकों (एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक) के बीच इस प्रकार के बड़े वित्तीय तालमेल का भारतीय पूंजी बाजार पर बहुत बड़ा और सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है। चूंकि एलआईसी देश की सबसे बड़ी संस्थागत निवेशक है, इसलिए उसकी ओर से निजी क्षेत्र के बैंकों में इस तरह का बड़ा निवेश इन बैंकों के प्रति बाजार के भरोसे को और अधिक मजबूत करता है। बाजार के विशेषज्ञ मान रहे हैं कि आने वाले दिनों में एलआईसी चरणबद्ध तरीके से ओपन मार्केट या अन्य माध्यमों से इन बैंकों में अपनी हिस्सेदारी को तय सीमा तक पहुंचा सकती है। निवेशकों के लिहाज से यह घटनाक्रम बैंकिंग सेक्टर में स्थिरता और दीर्घकालिक वृद्धि के मजबूत संकेत देता है, क्योंकि जब देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी किसी बैंक में बड़ा हिस्सा रखती है, तो इससे आम निवेशकों का भरोसा भी उस संस्थान पर और अधिक बढ़ जाता है।