IRCTC पर AI का अनोखा कमाल: ट्रेन सर्च से लेकर फॉर्म भरने तक चुटकियों में निपटाया काम; टेक क्रिएटर का वीडियो हुआ वायरल

IRCTC पर AI का अनोखा कमाल: ट्रेन सर्च से लेकर फॉर्म भरने तक चुटकियों में निपटाया काम; टेक क्रिएटर का वीडियो हुआ वायरल

भारतीय रेलवे के आईआरसीटीसी (IRCTC) पोर्टल पर तत्काल या कन्फर्म टिकट बुक करना किसी जंग जीतने से कम नहीं माना जाता। अक्सर सुबह 10 या 11 बजे तत्काल विंडो खुलते ही साइट का धीमा होना, कैप्चा कोड में उलझना और पैसेंजर डिटेल्स भरते-भरते सीटें 'वेटिंग' में चले जाना करोड़ों यात्रियों की आम परेशानी है। लेकिन अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने इस पूरी पेचीदा प्रक्रिया को पूरी तरह ऑटोमेट करके सबको हैरान कर दिया है।

सोशल मीडिया पर एक टेक क्रिएटर का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने दिखाया कि कैसे एक कस्टमाइज्ड ऑटोनॉमस एआई एजेंट (Autonomous AI Agent) ने बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के टिकट बुकिंग के सारे थकाऊ काम खुद-ब-खुद पूरे कर दिए। क्रिएटर ने सिर्फ एक साधारण वॉयस/टेक्स्ट कमांड दिया और बाकी सब कुछ स्क्रीन पर पलक झपकते ही होता चला गया।

क्रिएटर के वीडियो में क्या दिखा? सिर्फ एक प्रॉम्प्ट और टिकट प्रोसेस तैयार

वायरल वीडियो में टेक क्रिएटर ने एक ऑटोनॉमस ब्राउजर एजेंट को केवल इतना प्रॉम्प्ट दिया: "मुझे कल शाम दिल्ली से लखनऊ जाने वाली किसी सुपरफास्ट ट्रेन में थर्ड एसी (3A) की टिकट बुक करनी है।" इसके बाद जो कुछ हुआ, उसने इंटरनेट यूजर्स को दंग कर दिया:

  • स्मार्ट ट्रेन सर्चिंग: एआई एजेंट ने तुरंत आईआरसीटीसी की आधिकारिक वेबसाइट खोली, दिल्ली-लखनऊ रूट की सभी उपलब्ध ट्रेनों को स्कैन किया और सबसे कम समय लेने वाली सुपरफास्ट ट्रेन को सिलेक्ट कर लिया।

  • सीट उपलब्धता और क्लास चयन: सिस्टम ने थर्ड एसी कोच में खाली सीटों की रियल-टाइम जांच की और सबसे बेहतरीन विकल्प को बुक करने के लिए आगे बढ़ा।

  • ऑटोमैटिक फॉर्म फिलिंग: एआई ने यूजर के पहले से सेव किए गए डेटाबेस से नाम, उम्र, जेंडर और बर्थ प्रेफरेंस (जैसे लोअर या साइड-लोअर) को बिना किसी टाइपिंग एरर के सेकंडों में फॉर्म में भर दिया।

  • कैप्चा बाईपास और पेमेंट स्क्रीन: एआई ने विजुअल रिकॉग्निशन तकनीक की मदद से कैप्चा को समझा और सीधे यूपीआई/क्यूआर पेमेंट स्क्रीन तक पहुंचकर यूजर को केवल पिन दर्ज करने के लिए संकेत दिया।

यूजर सेफ्टी और रेलवे के नियम: क्या यह लीगल है?

वीडियो के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर जहां तकनीक के इस जादुई इस्तेमाल की जमकर तारीफ हो रही है, वहीं साइबर सुरक्षा और रेलवे के नियमों को लेकर भी गंभीर बहस छिड़ गई है:

  • ऑटोनॉमस ब्राउजिंग टूल्स की ताकत: क्रिएटर ने बताया कि यह कोई अवैध हैकिंग स्क्रिप्ट नहीं, बल्कि आधुनिक लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs) और ब्राउजर ऑटोमेशन टूल्स (जैसे कंप्यूटर-यूजिंग एआई मॉडल्स) का उपयोग है, जो स्क्रीन को इंसान की तरह देखकर क्लिक और टाइप करते हैं।

  • आईआरसीटीसी के कड़े सुरक्षा मानक: आईआरसीटीसी अवैध ऑटोमेशन सॉफ्टवेयर और अनाधिकृत बॉट्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई करता है। हालांकि, व्यक्तिगत स्तर पर इस्तेमाल होने वाले ऐसे पर्सनल एआई असिस्टेंट्स आने वाले समय में टिकटिंग प्लेटफॉर्म्स के आधिकारिक इन-बिल्ट एआई चैटबॉट्स का रूप ले सकते हैं।

  • सुरक्षित पेमेंट लेयर: वीडियो में यह भी स्पष्ट किया गया कि एआई कभी भी आपका यूपीआई पिन या बैंक ओटीपी खुद नहीं डालता। सुरक्षा के लिहाज से अंतिम प्रमाणीकरण (Final OTP/PIN Authentication) हमेशा यूजर के अपने हाथ में ही रहता है।

भविष्य की झलक: क्या आने वाले समय में ऐसे ही बुक होंगे टिकट?

टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह वीडियो इस बात की साफ झलक है कि आने वाले 1-2 सालों में हमारे डिजिटल काम कैसे बदलने वाले हैं। ई-कॉमर्स शॉपिंग, फ्लाइट वेब-चेकइन, यूटिलिटी बिल पेमेंट और ट्रेन टिकट बुकिंग जैसे रोजमर्रा के काम अब यूजर को मैन्युअली नहीं करने पड़ेंगे। पर्सनल एआई एजेंट्स सिर्फ एक वॉयस कमांड पर यह सब कुछ बैकग्राउंड में खुद ही निपटा दिया करेंगे।

फिलहाल, इस टेक क्रिएटर के वायरल वीडियो ने आम यात्रियों को यह उम्मीद जरूर दे दी है कि आने वाले समय में आईआरसीटीसी की धीमी गति और टिकट बुकिंग के तनाव से उन्हें हमेशा के लिए मुक्ति मिल सकती है।