FD से ज्यादा मुनाफा और 100% सरकारी गारंटी! जानिए RBI की इस खास स्कीम के फायदे, जिसमें जीरो है रिस्क

FD से ज्यादा मुनाफा और 100% सरकारी गारंटी! जानिए RBI की इस खास स्कीम के फायदे, जिसमें जीरो है रिस्क

फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर निर्भर रहने वाले पारंपरिक निवेशकों के लिए बैंक दरों में होने वाला उतार-चढ़ाव अक्सर चिंता का विषय बन जाता है। बैंक एफडी पर जहां डीआईसीजीसी (DICGC) के तहत सिर्फ ₹5 लाख तक की पूंजी ही बीमित होती है, वहीं भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की एक ऐसी सरकारी योजना मौजूद है जो 100% सॉवरेन गारंटी (Sovereign Guarantee) के साथ सामान्य एफडी से कहीं अधिक ब्याज दर की पेशकश करती है। इस योजना का नाम है RBI फ्लोटिंग रेट सेविंग्स बॉन्ड्स (FRSB)

क्या है RBI फ्लोटिंग रेट सेविंग्स बॉन्ड्स (FRSB)?

आरबीआई फ्लोटिंग रेट सेविंग्स बॉन्ड भारत सरकार की ओर से केंद्रीय बैंक द्वारा जारी किए जाने वाले डेट सिक्योरिटीज हैं। चूंकि यह केंद्र सरकार द्वारा पूरी तरह समर्थित है, इसलिए इसमें आपके मूलधन (Principal) और ब्याज (Interest) दोनों पर जीरो डिफॉल्ट रिस्क होता है।

इस बॉन्ड की परिपक्वता अवधि (Maturity Period) 7 वर्ष होती है। इसे 'फ्लोटिंग रेट' इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसकी ब्याज दर पूरी अवधि के लिए स्थिर नहीं रहती, बल्कि हर छह महीने (1 जनवरी और 1 जुलाई) पर सरकारी नियमों के आधार पर रीसेट की जाती है।

ब्याज दर का फॉर्मूला: बैंक एफडी से क्यों मिलता है ज्यादा रिटर्न?

आरबीआई फ्लोटिंग रेट बॉन्ड्स की ब्याज दर डाकघर की नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) योजना से सीधे जुड़ी होती है।

  • ब्याज का फॉर्मूला: NSC की मौजूदा ब्याज दर + 0.35% का फिक्स्ड स्प्रेड।

  • वर्तमान में एनएससी पर 7.7% की दर लागू है, जिसके चलते आरबीआई बॉन्ड्स पर निवेशकों को 8.05% सालाना ब्याज मिल रहा है।

  • यह रिटर्न वर्तमान में प्रमुख सरकारी और निजी बैंकों की 5 से 7 साल की सामान्य एफडी दरों (जो 6.5% से 7.25% के दायरे में हैं) से काफी अधिक है।

निवेश की सीमा और ब्याज भुगतान का तरीका

इस योजना की सबसे बड़ी ताकत यह है कि इसमें कोई भी भारतीय नागरिक या एचयूएफ (HUF) न्यूनतम ₹1,000 से निवेश शुरू कर सकता है। वहीं अधिकतम निवेश की कोई ऊपरी सीमा (No Maximum Limit) तय नहीं की गई है, यानी आप ₹10 लाख, ₹50 लाख या इससे अधिक की राशि भी पूरी सुरक्षा के साथ लगा सकते हैं।

ब्याज का भुगतान हर 6 महीने में यानी 1 जनवरी और 1 जुलाई को सीधे निवेशक के रजिस्टर्ड बैंक खाते में जमा किया जाता है। इसमें संचयी (Cumulative) ब्याज का विकल्प उपलब्ध नहीं है, जिससे यह नियमित आय चाहने वाले पेंशनर्स और रिटायर्ड व्यक्तियों के लिए एक आदर्श विकल्प बन जाता है।

प्री-मैच्योर विड्रॉल और टैक्स से जुड़े नियम

सामान्य निवेशकों के लिए यह बॉन्ड 7 साल के लिए लॉक रहता है और इसे सेकेंडरी मार्केट में ट्रेड नहीं किया जा सकता। हालांकि, वरिष्ठ नागरिकों को उम्र के आधार पर समय से पहले निकासी की विशेष छूट दी गई है:

  • 60 से 70 वर्ष के वरिष्ठ नागरिक 6 साल बाद निकासी कर सकते हैं।

  • 70 से 80 वर्ष के नागरिक 5 साल बाद निकासी कर सकते हैं।

  • 80 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिक 4 साल बाद पैसा निकाल सकते हैं।

टैक्स नियम: इन बॉन्ड्स पर अर्जित होने वाला ब्याज पूरी तरह कर-योग्य (Taxable) होता है और निवेशक के मौजूदा इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार इस पर टैक्स लागू होता है।

कैसे और कहां करें निवेश?

निवेशक आरबीआई के आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल 'RBI Retail Direct' के जरिए बिना किसी ब्रोकरेज या मध्यस्थ शुल्क के सीधे घर बैठे यह बॉन्ड खरीद सकते हैं। इसके अलावा एसबीआई, पीएनबी, बैंक ऑफ बड़ौदा, एचडीएफसी और आईसीआईसीआई बैंक जैसे सभी प्रमुख सार्वजनिक व निजी बैंकों की शाखाओं या नेट बैंकिंग से भी इसमें आसानी से आवेदन किया जा सकता है। सुरक्षित और निश्चित आय की चाहत रखने वालों के लिए यह बैंक एफडी का एक मजबूत और गारंटीड विकल्प है।

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