पल्स ऑक्सीमीटर कितने का आता है? ₹1,500 तक की कीमत में मिलते हैं ये मॉडल, जानें यह डिवाइस कैसे करता है काम

पल्स ऑक्सीमीटर कितने का आता है? ₹1,500 तक की कीमत में मिलते हैं ये मॉडल, जानें यह डिवाइस कैसे करता है काम

घरेलू स्वास्थ्य निगरानी में पल्स ऑक्सीमीटर एक बेहद जरूरी और जीवनरक्षक मेडिकल डिवाइस बनकर उभरा है। भारतीय बाजार में फिंगरटिप पल्स ऑक्सीमीटर की शुरुआती कीमत आमतौर पर ₹300 से शुरू होकर ₹2,500 तक जाती है, जबकि घर में नियमित इस्तेमाल के लिए ₹500 से लेकर ₹1,500 के बजट में बेहतरीन और सटीक रीडिंग देने वाले कई सर्टिफाइड मॉडल्स आसानी से मिल जाते हैं। किसी भी व्यक्ति के शरीर में ऑक्सीजन का स्तर (SpO2) 95% से 100% के बीच सामान्य माना जाता है और 94% से नीचे जाने पर डॉक्टरी सलाह की जरूरत होती है। राजधानी लखनऊ सहित देश भर के मेडिकल स्टोर्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर आज कई ब्रांडेड और गैर-ब्रांडेड मॉडल्स मौजूद हैं, जिन्हें बजट और फीचर्स के आधार पर आसानी से चुना जा सकता है।

₹1,500 के बजट में आने वाले प्रमुख मॉडल्स

यदि आप ₹1,500 के अंदर एक टिकाऊ और भरोसेमंद पल्स ऑक्सीमीटर खरीदना चाहते हैं, तो निम्नलिखित मॉडल्स प्रमुख विकल्पों में शामिल हैं:

1. Tata 1mg Fingertip Pulse Oximeter

यह पल्स ऑक्सीमीटर ऑनलाइन लिस्टिंग में करीब ₹1,345 का है. यह फिंगरटिप ऑक्सीमीटर, ऑक्सीजन लेवल और पल्स रेट की रीडिंग देता है.

2. Dr Morepen PO-14

यह पल्स ऑक्सीमीटर ऑनलाइन लिस्टिंग में करीब ₹1,153 का है. यह भी एक फिंगरटिप पल्स ऑक्सीमीटर है, जो SpO₂ और पल्स रेट की जानकारी देता है.

3. Dr. Gene FS10E AccuSure

यह ऑक्सीमीटर करीब ₹845 का है. अगर आप कम बजट में ऑक्सीमीटर देख रहे हैं, तो ये आपके लिए एक विकल्प हो सकता है. इस डिवाइस की मदद से भी ऑक्सीजन लेवल और पल्स रेट, दोनों को चेक किया जा सकता है.

4. Dr Trust USA Signature Series 201

यह डिवाइस करीब ₹1,399 का है. यह SpO₂ और पल्स रेट मापता है. इसमें पल्स वेव और बारग्राफ भी डिस्प्ले होता है.

पल्स ऑक्सीमीटर कैसे काम करता है? समझिए इसकी तकनीक

पल्स ऑक्सीमीटर एक गैर-आक्रामक (Non-invasive) मेडिकल उपकरण है, जिसका अर्थ है कि यह बिना सुई चुभाए या खून निकाले शरीर में ऑक्सीजन का स्तर मापता है। यह उपकरण पूरी तरह से 'फोटोइलेक्ट्रिक स्पेक्ट्रोफोटोमेट्री' (Light Absorption Technology) के सिद्धांत पर कार्य करता है। जब आप अपनी उंगली को ऑक्सीमीटर की क्लिप के अंदर डालते हैं, तो डिवाइस के ऊपरी हिस्से में मौजूद एलईडी से दो अलग-अलग वेवलेंथ की लाइट किरणें निकलती हैं—एक लाल रोशनी (Red Light - 660 nm) और दूसरी इन्फ्रारेड रोशनी (Infrared Light - 940 nm)। ये दोनों किरणें आपकी उंगली के ऊतकों और नसों में बह रहे खून से होकर गुजरती हैं और नीचे लगे फोटोडिटेक्टर सेंसर तक पहुंचती हैं।

मानव रक्त में मौजूद हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन ले जाने का काम करता है। जिस हीमोग्लोबिन में ऑक्सीजन जुड़ी होती है, उसे ऑक्सीजिनेटेड हीमोग्लोबिन कहते हैं, और जिसमें ऑक्सीजन नहीं होती, उसे डी-ऑक्सीजिनेटेड हीमोग्लोबिन कहा जाता है। इन दोनों की रोशनी सोखने की क्षमता अलग-अलग होती है—ऑक्सीजिनेटेड हीमोग्लोबिन इन्फ्रारेड लाइट को ज्यादा सोखता है और लाल लाइट को गुजरने देता है, जबकि बिना ऑक्सीजन वाला हीमोग्लोबिन लाल लाइट को अधिक सोखता है। ऑक्सीमीटर का माइक्रोप्रोसेसर यह गणना करता है कि कितनी मात्रा में दोनों प्रकार की लाइट अवशोषित हुई हैं और फिर एल्गोरिदम की मदद से कुछ ही सेकंड में स्क्रीन पर प्रतिशत के रूप में SpO2 (ब्लड ऑक्सीजन सैचुरेशन) दिखा देता है। इसके साथ ही, दिल की हर धड़कन के साथ रक्त वाहिकाओं में होने वाले स्पंदन को मापकर यह आपकी पल्स रेट (हार्ट बीट) भी प्रदर्शित करता है।

ऑक्सीमीटर का इस्तेमाल करते समय बरतें ये जरूरी सावधानियां

सटीक रीडिंग पाने के लिए कुछ सामान्य सावधानियों का पालन करना आवश्यक होता है। उंगली पर गहरा नेल पॉलिश, मेहंदी या आर्टिफिशियल नेल्स लगे होने पर लाइट बीम ब्लॉक हो सकती है, जिससे रीडिंग गलत या कम आ सकती है। इसके अलावा, हाथ बहुत ठंडे होने पर या शरीर में कंपकंपी होने पर ब्लड फ्लो धीमा हो जाता है, जिससे परफ्यूजन इंडेक्स गिर जाता है; इसलिए जांच से पहले हाथ को रगड़कर सामान्य तापमान पर लाएं और शांत बैठकर हाथ को सीने के स्तर पर स्थिर रखें। जांच करते समय डिवाइस को 5 से 10 सेकंड स्थिर रहने दें और जब तक स्क्रीन पर रीडिंग स्थिर न हो जाए, तब तक उंगली न हटाएं।