अब खुद के पैसे भी मर्जी से नहीं निकाल सकते! 3 को-ऑपरेटिव बैंकों पर RBI का बड़ा एक्शन, 3 महीने तक बढ़ी पाबंदी

अब खुद के पैसे भी मर्जी से नहीं निकाल सकते! 3 को-ऑपरेटिव बैंकों पर RBI का बड़ा एक्शन, 3 महीने तक बढ़ी पाबंदी

देश में सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा और बैंकों की चरमराती वित्तीय सेहत पर अंकुश लगाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बार फिर कड़ा रुख अख्तियार किया है। केंद्रीय बैंक ने वित्तीय संकट से जूझ रहे देश के 3 प्रमुख को-ऑपरेटिव बैंकों पर पूर्व में लगाए गए कड़े नियामकीय प्रतिबंधों (Regulatory Directions) की अवधि को आगामी तीन महीनों के लिए और आगे बढ़ा दिया है। आरबीआई द्वारा जारी ताजा अधिसूचना के मुताबिक, ये पाबंदियां अब जनवरी 2027 के पहले हफ्ते तक प्रभावी रहेंगी। इसका सीधा और कड़वा असर इन बैंकों के लाखों सामान्य खाताधारकों, पेंशनर्स और छोटे कारोबारियों पर पड़ेगा, जो अपने ही बचत, चालू या सावधि जमा (FD) खातों से अपनी मर्जी के मुताबिक गाढ़ी कमाई का पैसा नहीं निकाल पाएंगे। बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 की धारा 35A के तहत की गई इस कार्रवाई से एक बार फिर को-ऑपरेटिव बैंकों में आम जनता की जमा पूंजी की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

किन 3 को-ऑपरेटिव बैंकों पर चला RBI का हंटर? जानिए पूरी सूची और मियाद

रिजर्व बैंक की इस ताजा कार्रवाई के दायरे में महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश और राजधानी दिल्ली के तीन अलग-अलग अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक शामिल हैं:

  1. समर्थ सहकारी बैंक लिमिटेड, सोलापुर (महाराष्ट्र): इस बैंक की बिगड़ती वित्तीय स्थिति और एनपीए (NPA) संकट को देखते हुए आरबीआई ने सबसे पहले अक्टूबर 2025 में 6 महीने के लिए पाबंदियां लगाई थीं। इसके बाद समय-समय पर इसकी समीक्षा की गई और अब नई अधिसूचना के तहत समर्थ सहकारी बैंक पर लगी सभी पाबंदियों को 3 महीने के लिए और बढ़ाते हुए 7 जनवरी 2027 के कारोबारी घंटों की समाप्ति तक लागू रखने का आदेश दिया गया है।

  2. द बघाट अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, सोलन (हिमाचल प्रदेश): हिमाचल के सोलन स्थित इस बैंक पर भी अक्टूबर 2025 में नियामकीय दिशा-निर्देश थोपे गए थे। केंद्रीय बैंक ने इन प्रतिबंधों की मियाद को तीन माह और बढ़ाकर 8 जनवरी 2027 तक जारी रखने का फैसला सुनाया है।

  3. रामगढ़िया को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, नई दिल्ली: देश की राजधानी स्थित रामगढ़िया को-ऑपरेटिव बैंक इन तीनों में सबसे लंबे समय से प्रतिबंधों की मार झेल रहा है। इस पर पहली बार जुलाई 2022 में अंकुश लगाए गए थे, जिसके बाद से लगातार इसकी अवधि बढ़ाई जाती रही है। आरबीआई ने अब इसे भी 3 महीने का अतिरिक्त विस्तार देते हुए 8 जनवरी 2027 तक पाबंदियों के दायरे में रखने की पुष्टि की है।

बैंक प्रबंधन पर लगी हैं ये कड़ी शर्तें: नया लोन देने और निवेश पर पूर्ण रोक

आरबीआई के निर्देशों के मुताबिक, इन तीनों बैंकों के दैनिक कामकाज और प्रबंधन पर कड़े प्रतिबंध बदस्तूर जारी रहेंगे। केंद्रीय बैंक की पूर्व लिखित मंजूरी के बिना ये बैंक:

  • किसी भी नए या पुराने ग्राहक को कोई नया कर्ज (Loan) या अग्रिम राशि मंजूर या वितरित नहीं कर सकते।

  • अपने मौजूदा लोन पोर्टफोलियो का नवीनीकरण (Renewal) नहीं कर सकते।

  • किसी भी प्रकार का नया निवेश (Investment) करने या शेयर-बांड्स में पूंजी लगाने पर पूर्ण रोक रहेगी।

  • बैंक अपनी किसी भी प्रकार की देनदारी (Liability) का भुगतान करने या नए वित्तीय दायित्व लेने के लिए स्वतंत्र नहीं होंगे।

  • बैंक अपनी संपत्ति, भवन या किसी भी परिसंपत्ति (Assets) को न तो बेच सकते हैं और न ही किसी अन्य रूप में ट्रांसफर कर सकते हैं।

    रिजर्व बैंक ने अपने बयान में स्पष्ट रूप से स्पष्ट किया है कि पाबंदियों की अवधि बढ़ाने को किसी भी तरह से यह न समझा जाए कि बैंकों की वित्तीय स्थिति में कोई बड़ा सुधार हो गया है, बल्कि यह कदम पूरी तरह जमाकर्ताओं की पूंजी को बैंक प्रबंधन द्वारा खुर्द-बुर्द होने से बचाने के लिए उठाया गया है।

खाताधारकों के पैसे का क्या होगा? निकासी सीमा और रोजमर्रा की दिक्कतें

इन तीनों बैंकों के लाखों खाताधारक पिछले कई महीनों से अपनी ही जमा पूंजी निकालने के लिए तरस रहे हैं। आरबीआई द्वारा तय किए गए मूल आदेशों के अनुसार, खाताधारकों के लिए प्रति खाता निकासी की एक सख्त अधिकतम सीमा (Capped Withdrawal Limit) तय की गई है। इसका मतलब यह है कि किसी ग्राहक के खाते में भले ही ₹5 लाख, ₹10 लाख या ₹20 लाख की रकम जमा हो, वह केवल आपातकालीन चिकित्सा, शिक्षा या निर्धारित मानवीय आधार पर ही सीमित सीमा तक ही रकम निकाल सकता है, बशर्ते बैंक के पास कैश लिक्विडिटी उपलब्ध हो। जिन लोगों ने इन बैंकों में अपनी जीवन भर की गाढ़ी कमाई, पीएफ का पैसा या बेटियों की शादी के लिए एफडी (Fixed Deposit) करा रखी थी, वे अब मैच्योरिटी के बावजूद पूरा पैसा निकालने में असमर्थ हैं। त्योहारी सीजन के ऐन पहले पाबंदियों के 3 महीने और बढ़ जाने से इन परिवारों के सामने घर-गृहस्थी चलाने और आपात खर्चों का भारी संकट खड़ा हो गया है।

DICGC इंश्योरेंस कवर: ₹5 लाख तक की रकम कैसे है पूरी तरह सुरक्षित?

सहकारी बैंकों पर संकट के इस दौर में खाताधारकों के लिए एकमात्र कानूनी और वित्तीय सहारा 'डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन' (DICGC) का बीमा कवच है। भारतीय रिजर्व बैंक की पूर्ण स्वामित्व वाली इस सहायक संस्था के नियमों के तहत, देश के प्रत्येक बैंक जमाकर्ता की मूलधन और ब्याज मिलाकर कुल ₹5,00,000 (पांच लाख रुपये) तक की जमा राशि शत-प्रतिशत बीमित और सुरक्षित होती है।

  • यदि किसी बैंक पर आरबीआई द्वारा निकासी पर रोक लगाई जाती है, तो जमाकर्ता डीआईसीजीसी अधिनियम की धारा 18A के तहत अधिकतम ₹5 लाख तक की अपनी जमा राशि का दावा कर सकते हैं।

  • हालांकि, जिन खाताधारकों के खातों में ₹5 लाख से अधिक की पूंजी जमा है, उनका ₹5 लाख से ऊपर का अतिरिक्त पैसा बैंक के पुनरुद्धार (Revival), किसी अन्य बड़े सक्षम बैंक में विलय (Merger), या बैंक के परिसमापन (Liquidation) की कानूनी प्रक्रिया के पूरा होने तक फंसा रहेगा।

को-ऑपरेटिव बैंकों में खाता रखने वाले आम नागरिक क्या सावधानी बरतें?

देश भर में पिछले कुछ वर्षों में पीएमसी बैंक, यस बैंक (अस्थायी संकट) और दर्जनों छोटे शहरी सहकारी बैंकों पर आए संकट ने यह साबित कर दिया है कि केवल ऊंचे ब्याज दर के लालच में आकर सहकारी बैंकों में अपनी पूरी जमा पूंजी रखना कितना जोखिम भरा हो सकता है। वित्तीय विशेषज्ञों की स्पष्ट सलाह है कि:

  1. एक ही बैंक में न रखें सारा पैसा: अपनी गाढ़ी कमाई को किसी एक ही सहकारी या छोटे बैंक में केंद्रित करने के बजाय बड़े शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों (जैसे SBI, PNB, BoB, HDFC, ICICI) में अलग-अलग बांटकर रखें।

  2. ₹5 लाख की बीमा सीमा का ध्यान रखें: किसी भी एक बैंक में प्रति व्यक्ति (चाहे बचत खाता हो या एफडी) कुल जमा राशि को ₹5 लाख के भीतर ही सीमित रखें ताकि बैंक पर कोई भी संकट आने की स्थिति में आपका पूरा पैसा डीआईसीजीसी बीमा के तहत सुरक्षित रहे।

  3. आरबीआई की वेबसाइट और बैंक नोटिस पर रखें नजर: प्रभावित तीनों बैंकों के ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे सोशल मीडिया की अफवाहों से बचें और अपनी संबंधित बैंक शाखा द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं तथा 7 और 8 जनवरी 2027 को होने वाली आरबीआई की अगली समीक्षा बैठक के फैसलों पर पैनी नजर रखें।