ITR Filing Alert: विदेश में अकाउंट रखने वालों के लिए नया सिस्टम, AIS में दिखेगी विदेशी संपत्तियों की जानकारी
इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने वाले करदाताओं के लिए एक बेहद जरूरी अपडेट सामने आया है। यदि आपने विदेश में कोई बैंक खाता खोला है, निवेश किया है या कोई अन्य संपत्ति रखी है, तो अब आपको अपनी जानकारी छुपाने की गलती भारी पड़ सकती है। आयकर विभाग ने विदेशी संपत्तियों और खातों के विवरण को सीधे 'एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट' (AIS) में दिखने वाला नया सिस्टम लागू कर दिया है। यह कदम कर चोरी पर लगाम लगाने और टैक्स पारदर्शिता को और अधिक पुख्ता बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
क्या है नया AIS सिस्टम और कैसे करेगा काम?
अब तक कई करदाता विदेशी खातों से जुड़ी जानकारी ITR फॉर्म में भरने से चूक जाते थे, जिससे बाद में उन्हें नोटिस का सामना करना पड़ता था। अब आयकर विभाग ने 'ऑटोमेटेड डेटा शेयरिंग' एग्रीमेंट्स के तहत दुनिया भर के विभिन्न देशों के टैक्स अधिकारियों से डेटा प्राप्त करना शुरू कर दिया है। यह सारा डेटा अब आपके AIS में रिफ्लेक्ट होगा। जब आप अपना ITR फाइल करने बैठेंगे, तो आपको पहले ही पता चल जाएगा कि विभाग के पास आपके विदेशी वित्तीय लेनदेन का क्या डेटा उपलब्ध है। इससे गलत जानकारी देने की गुंजाइश लगभग खत्म हो गई है।
इन लोगों को रहना होगा सबसे ज्यादा सतर्क
जिन लोगों ने विदेश में अपना बैंक अकाउंट खोला है, किसी विदेशी कंपनी में शेयर खरीदे हैं, या फिर विदेशों में कोई अचल संपत्ति (Immovable Property) रखी है, उन्हें अब अपने ITR में 'फॉरेन एसेट' (FA) शेड्यूल को बहुत सावधानी से भरना होगा। अगर आपके AIS में विदेशी संपत्ति की जानकारी दिख रही है और आप उसे ITR में डिस्क्लोज नहीं करते हैं, तो यह सीधे तौर पर टैक्स चोरी के दायरे में आ सकता है। ब्लैक मनी एक्ट के तहत इस तरह की चूक पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है, इसलिए अपनी विदेशी आय और संपत्ति का ब्यौरा पूरी ईमानदारी से देना ही एकमात्र विकल्प है।
रिटर्न भरने से पहले रखें इन बातों का ध्यान
एक्सपर्ट्स की सलाह है कि ITR सबमिट करने से पहले अपने AIS और TIS (टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी) को अच्छी तरह से चेक कर लें। यदि आपके AIS में कोई ऐसी विदेशी संपत्ति दिख रही है जो आपकी नहीं है या उसमें कोई विसंगति है, तो समय रहते आयकर विभाग के पोर्टल पर अपनी प्रतिक्रिया (Feedback) जरूर दर्ज करें। यह पारदर्शिता आपके लिए भविष्य में आने वाली किसी भी कानूनी परेशानी को रोक सकती है। याद रखें, डिजिटल युग में विभाग की नजर हर ग्लोबल लेनदेन पर है, इसलिए समय रहते सही जानकारी के साथ रिटर्न फाइल करना ही समझदारी है।