SC की जांच के आदेश पर Indiabulls ने जारी किया Clarification, कहा- सभी 197 लोन पूरी तरह से चुकाए जा चुके हैं, कोई बकाया नहीं
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा विभिन्न केंद्रीय जांच एजेंसियों और नियामक संस्थाओं को इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड से जुड़े मामलों की जांच के निर्देश दिए जाने के बाद कंपनी की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण (Clarification) सामने आया है। कंपनी (जो अब सम्मान कैपिटल - Sammaan Capital के नाम से जानी जाती है) ने शेयर बाजारों और नियामकों को सूचित करते हुए स्पष्ट किया है कि जनहित याचिका (PIL) में उठाए गए सभी 197 लोन पूरी तरह से चुकाए जा चुके हैं और कंपनी पर किसी भी प्रकार का अनसुलझा या गैर-निष्पादित ऋण बकाया नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और इंडियाबुल्स का आधिकारिक पक्ष
शीर्ष अदालत ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), प्रवर्तन निदेशालय (ED), भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), आयकर विभाग (IT) और सेबी (SEBI) जैसी एजेंसियों को मामले की जांच करने का निर्देश दिया था। इसके जवाब में कंपनी ने नियामकीय फाइलिंग में कहा कि यह याचिका लगभग 7 साल पुरानी (वर्ष 2019) है, जिसे दुर्भावनापूर्ण तरीके से और कंपनी की छवि को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से दायर किया गया था। कंपनी ने दोहराया कि वह सभी जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है और उसके बहीखाते पूरी तरह पारदर्शी हैं।
सभी 197 लोन पूरी तरह से चुकता: कंपनी का बड़ा बयान
इंडियाबुल्स ने स्पष्ट रूप से रेखांकित किया कि याचिका में जिन 197 लोन खातों का उल्लेख किया गया है, वे सभी सामान्य व्यावसायिक गतिविधियों के तहत स्वीकृत किए गए थे। इनमें से प्रत्येक लोन का मूलधन और ब्याज सहित पूरा भुगतान संबंधित उधारकर्ताओं द्वारा बहुत पहले ही कर दिया गया है। कंपनी की बैलेंस शीट में इनमें से कोई भी खाता एनपीए (NPA) या संदिग्ध स्थिति में नहीं है। कंपनी के अनुसार, इससे पहले भी कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) और गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) द्वारा विस्तृत समीक्षा की जा चुकी है, जिसमें किसी भी प्रकार के वित्तीय गबन या हेराफेरी का कोई प्रमाण नहीं मिला था।
Sammaan Capital के रूप में नया स्वरूप और कॉरपोरेट गवर्नेंस
इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस ने अपने कॉरपोरेट ढांचे में बड़े बदलाव किए हैं और अब यह पूरी तरह से एक बोर्ड-ड्रिवन और पेशेवर रूप से प्रबंधित संस्था 'सम्मान कैपिटल' के रूप में कार्यरत है। कंपनी के प्रमोटर ग्रुप का नियंत्रण समाप्त हो चुका है और वैश्विक संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ने के साथ ही कॉरपोरेट गवर्नेंस के कड़े मानक लागू किए गए हैं। कंपनी के पास मजबूत लिक्विडिटी बफर मौजूद है और वह रिटेल मॉर्गेज लोन सेगमेंट में सक्रियता से काम कर रही है।
शेयर बाजार और निवेशकों के लिए जरूरी बातें
अदालती आदेश की खबर आने के बाद शेयर बाजार में कंपनी के शेयरों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। हालांकि, कंपनी द्वारा जारी किए गए तत्काल और बिंदुवार स्पष्टीकरण से निवेशकों को स्थिति की वस्तुस्थिति समझने में मदद मिली है। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि चूंकि पुराने कर्जों की पूर्ण अदायगी हो चुकी है, इसलिए कंपनी की मौजूदा वित्तीय स्थिति और परिचालन स्थिरता पर इसका कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।