उल्टी गिनती शुरू: 2 दिन बाद खत्म हो रही है आईटीआर दाखिल करने की मियाद

उल्टी गिनती शुरू: 2 दिन बाद खत्म हो रही है आईटीआर दाखिल करने की मियाद

देश के करोड़ों करदाताओं के लिए यह समय बेहद सतर्क रहने और अपनी वित्तीय जिम्मेदारियों को प्राथमिकता पर पूरा करने का है। सामान्य व्यक्तिगत करदाताओं, वेतनभोगी कर्मचारियों और गैर-ऑडिट वाले छोटे व्यापारियों के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम समय सीमा समाप्त होने में अब सिर्फ 72 घंटे यानी 3 दिन का समय शेष बचा है। आयकर विभाग ने स्पष्ट किया है कि अंतिम तिथि के विस्तार को लेकर कोई नई घोषणा नहीं की जाएगी, इसलिए करदाताओं को किसी भी अंतिम समय की तकनीकी खराबी या सर्वर डाउन होने की समस्या से बचने के लिए तुरंत अपनी रिटर्न प्रक्रिया पूरी कर लेनी चाहिए।

हर साल की तरह अंतिम दिनों में आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल पर लाखों यूजर्स के एक साथ लॉग-इन करने से ट्रैफिक का भारी दबाव बन जाता है। इस वजह से ओटीपी आने में देरी, पेमेंट गेटवे फेल होने या फॉर्म सबमिट न होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। यदि आप निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपना टैक्स रिटर्न दाखिल नहीं करते हैं, तो आपको न केवल अपनी जेब से हजारों रुपये का जुर्माना भरना पड़ेगा, बल्कि कई महत्वपूर्ण वित्तीय अधिकारों और कटौतियों से भी हाथ धोना पड़ सकता है।

धारा 234F के तहत लेट फीस का गणित: किसे ₹1,000 और किसे ₹5,000 का जुर्माना?

यदि कोई करदाता निर्धारित अंतिम तिथि तक अपना आयकर रिटर्न दाखिल करने में विफल रहता है, तो आयकर अधिनियम की धारा 234F (Section 234F) के तहत स्वतः ही लेट फाइलिंग फीस (Late Fee) लागू हो जाती है। यह जुर्माना करदाता की वार्षिक कुल कर योग्य आय के आधार पर दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है:

  • ₹5 लाख से अधिक आय पर ₹5,000 का जुर्माना: यदि किसी करदाता की कुल शुद्ध कर योग्य आय (Total Taxable Income) ₹5,00,000 से अधिक है, तो उसे डेडलाइन के बाद बिलेटेड रिटर्न भरते समय अनिवार्य रूप से ₹5,000 की लेट फीस का चालान भरना होगा।

  • ₹5 लाख तक की आय पर ₹1,000 की राहत: छोटे और मध्यम करदाताओं को राहत देते हुए कानून में यह प्रावधान है कि यदि कुल आय ₹5,00,000 या उससे कम है, तो उनसे अधिकतम केवल ₹1,000 की लेट फीस वसूली जाएगी।

  • बेसिक छूट सीमा से कम आय वालों के लिए नियम: यदि किसी व्यक्ति की सकल कुल आय (Gross Total Income) मूल आयकर छूट सीमा (पुराने टैक्स रिजीम में ₹2.5 लाख और नए टैक्स रिजीम में ₹3 लाख) से कम है, तो उन पर धारा 234F के तहत कोई लेट फीस लागू नहीं होती, भले ही वे अपना रिटर्न डेडलाइन के बाद दाखिल करें। हालांकि, यदि वे विदेशी यात्रा पर ₹2 लाख से अधिक खर्च, ₹1 लाख से अधिक बिजली बिल भुगतान या किसी टीडीएस रिफंड का दावा करने के लिए रिटर्न भर रहे हैं, तो समय पर फाइल करना अनिवार्य माना जाता है।

सिर्फ लेट फीस ही नहीं, देरी करने पर होंगे ये 4 बड़े गंभीर वित्तीय नुकसान

अधिकांश लोग सोचते हैं कि समय पर रिटर्न न भरने का एकमात्र नुकसान केवल ₹5,000 का जुर्माना है, जबकि हकीकत यह है कि देरी करने से आपको कई स्तरों पर बड़ा वित्तीय नुकसान झेलना पड़ता है:

  • धारा 234A के तहत 1% मासिक ब्याज: यदि आपके ऊपर कोई बकाया टैक्स (Self-Assessment Tax) निकलता है और आपने निर्धारित समय तक रिटर्न नहीं भरा, तो अंतिम तिथि के अगले दिन से लेकर वास्तविक भुगतान की तारीख तक बकाया टैक्स राशि पर 1% प्रति माह (या महीने के किसी भी हिस्से के लिए पूरा 1%) की दर से साधारण ब्याज वसूला जाएगा।

  • हानि को आगे ले जाने (Carry Forward of Losses) का अधिकार समाप्त: शेयर बाजार में ट्रेडिंग (Intraday, F&O, Short-Term Capital Loss), म्यूचुअल फंड्स या गैर-सट्टेबाजी व्यावसायिक नुकसान को भविष्य के 8 वर्षों तक मुनाफे के खिलाफ सेट-ऑफ (Set-Off) करने का कानूनी अधिकार केवल तभी मिलता है जब रिटर्न तय तारीख से पहले दाखिल हो। डेडलाइन चूकने के बाद केवल 'हाउस प्रॉपर्टी लॉस' को ही कैरी-फॉरवर्ड करने की छूट मिलती है, बाकी सभी लॉसेस हमेशा के लिए लैप्स हो जाते हैं।

  • टैक्स रिफंड में देरी और ब्याज का नुकसान: यदि आपका टीडीएस ज्यादा कट गया है और आप टैक्स रिफंड के हकदार हैं, तो लेट फाइलिंग के कारण आपका रिफंड महीनों तक अटक जाएगा। साथ ही, धारा 244A के तहत मिलने वाले रिफंड पर ब्याज की गणना में भी करदाता को वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता है।

  • लोन और वीजा आवेदनों में बाधा: होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन या किसी विदेशी वीजा (विशेष रूप से यूएस, यूके, कनाडा, यूरोप) के लिए आवेदन करते समय बैंक और दूतावास पिछले 2 से 3 वर्षों की समय पर दाखिल की गई आईटीआर रसीद (ITR-V) मांगते हैं। बिलेटेड या लेट फाइल की गई आईटीआर को वित्तीय संस्थानों द्वारा संदेह की दृष्टि से देखा जाता है।

समय सीमा चूकने के बाद क्या है विकल्प? समझिए बिलेटेड और रिवाइज्ड आईटीआर के नियम

यदि किसी अपरिहार्य कारणवश आप आने वाले 3 दिनों में अपना रिटर्न दाखिल नहीं कर पाते हैं, तो आयकर कानून आपको एक दूसरा मौका जरूर देता है, जिसे 'बिलेटेड रिटर्न' कहा जाता है:

  • बिलेटेड रिटर्न (Belated Return - Section 139(4)): आप संबंधित असेसमेंट ईयर के 31 दिसंबर तक लेट फीस और ब्याज का भुगतान करके अपना बिलेटेड रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। 31 दिसंबर की तारीख बीत जाने के बाद सामान्य पोर्टल से उस वर्ष का नियमित रिटर्न भरने का रास्ता पूरी तरह बंद हो जाता है।

  • रिवाइज्ड रिटर्न (Revised Return - Section 139(5)): यदि आपने समय पर रिटर्न भरा है और बाद में कोई गलती या छूट गई आय ध्यान में आती है, तो आप 31 दिसंबर तक बिना किसी अतिरिक्त जुर्माने के उसे जितनी बार चाहें संशोधित (Revise) कर सकते हैं। लेकिन यदि आपने पहली बार ही बिलेटेड रिटर्न भरा है, तो उसमें गलतियां सुधारने के विकल्प काफी सीमित हो जाते हैं।

  • अपडेटेड रिटर्न (Updated Return - ITR-U): 31 दिसंबर के बाद केवल धारा 139(8A) के तहत ITR-U भरने का रास्ता बचता है, जिसमें करदाता को बकाया टैक्स के साथ 25% से 50% तक का भारी अतिरिक्त टैक्स पेनल्टी के रूप में चुकाना पड़ता है और इसमें कोई नया रिफंड या घाटा क्लेम नहीं किया जा सकता।

AIS, TIS और 26AS का मिलान: इन 3 जरूरी दस्तावेजों के बिना न भरें रिटर्न

अंतिम दिनों की हड़बड़ाहट में बहुत से लोग सीधे फॉर्म भरकर सबमिट कर देते हैं, जिससे बाद में आयकर विभाग की ओर से धारा 143(1) या 139(9) के तहत डिफेक्टिव रिटर्न और मिसमैच के नोटिस आ जाते हैं। रिटर्न भरने से पहले इन तीन प्राथमिक दस्तावेजों को ई-फाइलिंग पोर्टल से डाउनलोड करके जांच लें:

  • फॉर्म 26AS (Tax Credit Statement): इसमें आपके पैन (PAN) पर नियोक्ताओं, बैंकों, खरीदारों द्वारा काटे गए टीडीएस (TDS) और टीसीएस (TCS) का पूरा ब्यौरा होता है। सुनिश्चित करें कि जितना टीडीएस आप रिटर्न में क्लेम कर रहे हैं, वह 26AS में पूरी तरह क्रेडिट दिख रहा हो।

  • एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS): एआईएस में आपके पैन से जुड़े सभी उच्च-मूल्य वाले लेन-देन जैसे बैंक खातों से मिला ब्याज, शेयर और म्यूचुअल फंड की खरीद-बिक्री, क्रेडिट कार्ड के भारी बिल भुगतान, विदेशी मुद्रा खरीद और लाभांश (Dividend) आय का विस्तृत रिकॉर्ड होता है।

  • टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS): यह एआईएस का ही एक सरलीकृत और समरी रूप है, जिसमें विभिन्न श्रेणियों के तहत आपकी कुल आय का संक्षिप्त योग दिया होता है। इसे देखकर ही अपने सही आईटीआर फॉर्म का चयन करें।

घर बैठे 10 मिनट में ऐसे फाइल करें अपना इनकम टैक्स रिटर्न: स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

यदि आपकी आय का स्रोत सरल है, तो आप बिना किसी सीए या एजेंट के भी आयकर विभाग के आधिकारिक पोर्टल से कुछ ही आसान चरणों में अपना रिटर्न भर सकते हैं:

  • स्टेप 1 (लॉग-इन): सबसे पहले आयकर विभाग के आधिकारिक पोर्टल (eportal.incometax.gov.in) पर जाएं। अपना पैन कार्ड नंबर (यूजर आईडी) और पासवर्ड डालकर लॉग-इन करें।

  • स्टेप 2 (फाइलिंग विकल्प): डैशबोर्ड पर मुख्य मेन्यू में 'e-File' पर क्लिक करें, फिर 'Income Tax Returns' और उसके बाद 'File Income Tax Return' विकल्प को चुनें।

  • स्टेप 3 (असेसमेंट ईयर और मोड): संबंधित असेसमेंट ईयर (Assessment Year) का चयन करें। फाइलिंग मोड में 'Online (Recommended)' चुनें और 'Individual' विकल्प पर टिक करें।

  • स्टेप 4 (सही ITR फॉर्म का चुनाव): यदि आप वेतनभोगी हैं, एक घर की संपत्ति से आय है और कुल कमाई ₹50 लाख तक है, तो ITR-1 (सहज) चुनें। यदि शेयर ट्रेडिंग या कैपिटल गेन है, तो ITR-2 और यदि बिजनेस/प्रोफेशन है तो ITR-3 या ITR-4 (सुगम) का चयन करें।

  • स्टेप 5 (डेटा सत्यापन और टैक्स भुगतान): पोर्टल पर अधिकांश डेटा (सैलरी, ब्याज, टीडीएस) पहले से भरा हुआ (Pre-filled) आएगा। अपने दस्तावेजों से इसका मिलान करें। यदि कोई टैक्स देनदारी बनती है, तो ई-पे टैक्स (e-Pay Tax) के माध्यम से ऑनलाइन पेमेंट करें और रिटर्न को सबमिट (Submit) कर दें।

रिटर्न दाखिल करने के बाद ई-वेरीफिकेशन (e-Verification) करना न भूलें

अक्सर करदाता फॉर्म सबमिट करने के बाद यह मान लेते हैं कि उनका काम पूरा हो गया, जबकि आयकर नियमों के अनुसार बिना सत्यापन के भरा गया रिटर्न पूरी तरह अमान्य (Invalid/Null & Void) माना जाता है। फॉर्म सबमिट करने के बाद 30 दिनों के भीतर ई-वेरीफाई करना कानूनी रूप से अनिवार्य है।

ई-वेरीफिकेशन के सबसे आसान तरीके:

  • आधार ओटीपी (Aadhaar OTP): आधार से जुड़े रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आने वाले 6 अंकों के ओटीपी के जरिए 10 सेकंड में तुरंत वेरिफिकेशन पूरा करें।

  • नेट बैंकिंग / बैंक खाता EVC: अपने नेट बैंकिंग खाते में लॉग-इन करके सीधे ई-फाइलिंग पोर्टल को प्रमाणित करें या प्री-वैलिडेटेड बैंक खाते से इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन कोड (EVC) जनरेट करें।

  • फिजिकल साइन करके भेजना: यदि डिजिटल माध्यम काम न करे, तो आईटीआर-वी (ITR-V) एक्नॉलेजमेंट रसीद का प्रिंट निकालकर उस पर नीली स्याही से हस्ताक्षर करें और साधारण डाक या स्पीड पोस्ट के माध्यम से 'केंद्रीकृत प्रसंस्करण केंद्र (CPC), आयकर विभाग, बेंगलुरु - 560500' को भेजें।

सिर्फ 3 दिन का समय शेष है। किसी भी अप्रत्याशित वित्तीय जुर्माने, कानूनी उलझन और मानसिक तनाव से बचने के लिए आज ही अपना आयकर रिटर्न दाखिल करें और अपने देश के एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपनी आर्थिक साख को मजबूत बनाए रखें।

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