अमेरिका में 15 सितंबर से बदलेंगे इमिग्रेशन और वर्क वीजा नियम: F-1 छात्रों और भारतीय प्रोफेशनल्स पर बड़ा असर, खत्म होगी पुरानी व्यवस्था
संयुक्त राज्य अमेरिका में उच्च शिक्षा हासिल कर रहे और रोजगार के अवसरों की तलाश में जुटे लाखों भारतीय छात्रों तथा पेशेवर कामगारों के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव लागू होने जा रहा है। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) तथा डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने 15 सितंबर 2026 से विदेशी छात्रों, एक्सचेंज विजिटर्स और गैर-आप्रवासी कामगारों (Non-immigrant Workers) के देश में ठहरने और कार्य अनुमति से जुड़े नियमों में व्यापक संशोधन की घोषणा की है। इस नए आदेश के तहत दशकों पुरानी 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' (Duration of Status - D/S) व्यवस्था को समाप्त कर निश्चित समय-सीमा (Fixed Period of Admission) प्रणाली लागू की जा रही है। इसके साथ ही रोजगार प्राधिकरण (EAD) और स्टेटस एक्सटेंशन के लिए उपयोग होने वाले प्रमुख आव्रजन फॉर्मों के नए संस्करण अनिवार्य कर दिए गए हैं, जिसमें पुराने फॉर्म जमा करने पर कोई छूट या ग्रेस पीरियड नहीं दिया जाएगा।
'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' (D/S) का खात्मा और 4 साल की अधिकतम सीमा
अब तक लागू व्यवस्था के तहत F-1 (छात्र) और J-1 (एक्सचेंज विजिटर) वीजा पर अमेरिका जाने वाले छात्रों के I-94 फॉर्म पर 'D/S' दर्ज होता था। इसका अर्थ यह होता था कि जब तक छात्र अपने शैक्षणिक संस्थान में पढ़ाई कर रहा है या ऑप्टिकल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) पर है, वह बिना किसी सरकारी एक्सटेंशन के वैध रूप से अमेरिका में रह सकता था।
15 सितंबर 2026 से यह व्यवस्था पूरी तरह समाप्त हो रही है:
-
फिक्स्ड एडमिट-अंटिल डेट (Fixed AUD): अब अमेरिका में प्रवेश करते समय छात्र के I-94 रिकॉर्ड पर एक निश्चित समाप्ति तिथि (AUD) दर्ज की जाएगी।
-
अधिकतम 4 साल की वैधता: छात्र को उसके आई-20 (Form I-20) पर दर्ज कोर्स की अवधि या अधिकतम 4 वर्ष (जो भी कम हो) के लिए ही शुरुआती प्रवेश मिलेगा।
-
लंबी अवधि के कोर्सेज पर सरकारी मंजूरी जरूरी: पीएचडी (Ph.D.), इंटीग्रेटेड मास्टर्स या मेडिकल रेजिडेंसी जैसे कोर्सेज जो 4 साल से अधिक चलते हैं, उनके लिए छात्रों को अब सिर्फ यूनिवर्सिटी स्तर पर नहीं बल्कि सीधे USCIS में आवेदन करके 'एक्सटेंशन ऑफ स्टे' (EOS) की औपचारिक सरकारी मंजूरी लेनी होगी।
-
ग्रेस पीरियड घटाकर 30 दिन किया गया: अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद देश छोड़ने या नए स्टेटस में बदलने के लिए F-1 छात्रों को पहले मिलने वाले 60 दिनों के ग्रेस पीरियड को घटाकर अब 30 दिन कर दिया गया है।
फॉर्म I-539 और फॉर्म I-765 के नए संस्करण अनिवार्य (Zero Grace Period)
अमेरिका में अपने वीजा स्टेटस को बदलने/बढ़ाने और वर्क परमिट (EAD) हासिल करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले दो सबसे महत्वपूर्ण फॉर्मों के नए वर्जन (एडिशन डेट: 09/15/26) प्रभावी हो रहे हैं:
-
Form I-539: गैर-आप्रवासी स्टेटस बढ़ाने या बदलने (जैसे F-1, H-4, L-2 आदि) के लिए।
-
Form I-765: रोजगार प्राधिकरण (OPT, STEM OPT और अन्य वर्क परमिट) के लिए आवेदन।
यूएससीआईएस ने स्पष्ट चेतावनी जारी की है कि इन दोनों फॉर्मों के पुराने संस्करणों (I-539 का 08/28/24 और I-765 का 08/21/25 एडिशन) को 15 सितंबर 2026 या उसके बाद सबमिट करने पर सीधे खारिज (Reject) कर दिया जाएगा। किसी भी आवेदक को पुराना फॉर्म स्वीकार कराने के लिए कोई रियायत या ट्रांजिशन विंडो नहीं मिलेगी। इसलिए 15 सितंबर या उसके बाद आवेदन करने वाले सभी भारतीय आवेदकों को केवल नया 09/15/26 संस्करण ही भरना होगा।
भारतीय छात्रों और वर्क वीजा प्रोफेशनल्स पर क्या पड़ेगा असर?
अमेरिका में पढ़ने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक है, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ (STEM) कोर्सेज तथा आगे चलकर OPT और H-1B वर्क वीजा की राह चुनता है।
-
प्रशासनिक सतर्कता जरूरी: स्टेटस खत्म होने से पहले ही एक्सटेंशन का आवेदन समय रहते दाखिल करना होगा। यदि I-94 पर दर्ज निश्चित तारीख से पहले आवेदन नहीं किया गया, तो छात्र को अनधिकृत उपस्थिति (Unlawful Presence) की श्रेणी में माना जा सकता है।
-
विश्वविद्यालय या मेजर बदलने पर सख्त नियम: नए नियमों के तहत अंडरग्रेजुएट छात्रों के लिए शुरुआती शैक्षणिक वर्ष में यूनिवर्सिटी ट्रांसफर करने या मेजर बदलने पर अतिरिक्त प्रक्रियात्मक शर्तें लागू की गई हैं।
-
ओपीटी और ईएडी आवेदकों के लिए समयबद्धता: जो छात्र अपनी डिग्री पूरी करने के बाद 12 महीने के जनरल OPT या 24 महीने के STEM OPT के लिए आवेदन कर रहे हैं, उन्हें फॉर्म I-765 दाखिल करते समय नए नियमों और सटीक दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा ताकि तकनीकी कारणों से उनका वर्क परमिट अटक न जाए।
भारतीय छात्रों, आईटी प्रोफेशनल्स और अमेरिका में कार्यरत कर्मचारियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी वर्तमान वीजा स्थिति, I-94 एक्सपायरी डेट और आगामी आवेदनों के फॉर्म वर्जन की समीक्षा अपने डेजिग्नेटेड स्कूल ऑफिशियल (DSO) या इमिग्रेशन विशेषज्ञों के परामर्श से समय रहते पूरी कर लें।