पति-पत्नी मिलकर चलाएं 2 PPF खाते: 20 साल में तैयार होगा ₹1.33 करोड़ का टैक्स-फ्री फंड, जानें सटीक गणित

पति-पत्नी मिलकर चलाएं 2 PPF खाते: 20 साल में तैयार होगा ₹1.33 करोड़ का टैक्स-फ्री फंड, जानें सटीक गणित

पब्लिक प्रॉविडेंट फंड यानी पीपीएफ (PPF) आज भी देश के मध्यमवर्गीय परिवारों और नौकरीपेशा लोगों के लिए 100% सरकारी गारंटी और सुरक्षित वेल्थ क्रिएशन का सबसे भरोसेमंद माध्यम है। आमतौर पर लोग यह सोचते हैं कि पीपीएफ में एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम ₹1.5 लाख ही जमा किए जा सकते हैं, जिससे लंबी अवधि में फंड की सीमा सीमित रह जाती है। लेकिन यदि पति और पत्नी मिलकर एक स्मार्ट वित्तीय रणनीति बनाएं और दो अलग-अलग पीपीएफ खातों के जरिए निवेश करें, तो 20 वर्षों की अवधि में बिना किसी शेयर बाजार के जोखिम के 1.33 करोड़ रुपये से अधिक का विशाल और पूरी तरह टैक्स-फ्री फंड तैयार किया जा सकता है।

दो अलग-अलग खातों का नियम: पति और पत्नी के लिए क्या व्यवस्था है?

पब्लिक प्रॉविडेंट फंड योजना (PPF Scheme, 2019) के नियमों के तहत संयुक्त (Joint) पीपीएफ खाता खोलने की अनुमति नहीं होती है। हालांकि, देश का प्रत्येक वयस्क नागरिक अपने व्यक्तिगत पैन (PAN) पर एक स्वतंत्र पीपीएफ खाता संचालित कर सकता है।

इस नियम के अनुसार:

  • पति का स्वतंत्र खाता: वित्तीय वर्ष में अधिकतम निवेश ₹1,50,000।

  • पत्नी का स्वतंत्र खाता: वित्तीय वर्ष में अधिकतम निवेश ₹1,50,000।

  • परिवार का कुल वार्षिक निवेश: दोनों खातों को मिलाकर कुल ₹3,00,000 प्रति वर्ष (यानी ₹25,000 प्रति माह संयुक्त बचत)।

यदि पत्नी गृहिणी (Homemaker) हैं और उनकी कोई स्वतंत्र आय नहीं है, तो भी पति अपनी आय से पत्नी के खाते में यह राशि उपहार (Gift) के रूप में ट्रांसफर कर सकते हैं। आयकर अधिनियम की धारा 64 के तहत क्लबिंग ऑफ इनकम के प्रावधानों के बावजूद, चूंकि पीपीएफ का पूरा ब्याज और मैच्योरिटी राशि धारा 10(11) के तहत पूरी तरह कर-मुक्त (Tax-Free) है, इसलिए क्लबिंग होने पर भी कोई अतिरिक्त टैक्स देनदारी नहीं बनती।

20 साल में ₹1.33 करोड़ का फंड: पूरा और सटीक कैलकुलेशन

वर्तमान में सरकार द्वारा पीपीएफ पर 7.1% वार्षिक ब्याज दर तय की गई है, जो वार्षिक रूप से चक्रवृद्धिकारी (Compounded Annually) होती है। पीपीएफ की मूल लॉक-इन अवधि 15 साल की होती है, लेकिन 15 साल पूरे होने पर इसे 5-5 साल के ब्लॉक में आगे बढ़ाने (Extension with Contribution) की वैधानिक सुविधा मिलती है।

20 वर्ष की अवधि (15 साल मूल + 5 साल का पहला एक्सटेंशन) में दोनों खातों का विस्तृत गणित इस प्रकार है:

विवरण (20 वर्ष की अवधि) पति का PPF खाता पत्नी का PPF खाता कुल संयुक्त परिवार फंड (Both Accounts)
सालाना निवेश (Annual Deposit) ₹1,50,000 ₹1,50,000 ₹3,00,000 / वर्ष
20 वर्षों में कुल जमा पूंजी (Principal) ₹30,00,000 ₹30,00,000 ₹60,00,000
7.1% पर कुल अर्जित ब्याज (Wealth Gain) ₹36,58,288 ₹36,58,288 ₹73,16,576
20 साल बाद कुल मैच्योरिटी राशि (Corpus) ₹66,58,288 ₹66,58,288 ₹1,33,16,576 (~₹1.33 करोड़)

इस प्रकार, परिवार द्वारा कुल जमा की गई पूंजी ₹60 लाख होगी, जबकि कंपाउंडिंग के दम पर मिलने वाला कुल ब्याज ही ₹73.16 लाख से अधिक का हो जाएगा।

15 साल बनाम 20 साल: 5 साल का एक्सटेंशन क्यों है जादुई?

पीपीएफ में असली संपत्ति निर्माण 15वें साल के बाद शुरू होता है। जब आपका खाता 15 साल पूरा करता है, तो ₹1.5 लाख सालाना जमा पर एक खाते में लगभग ₹40.68 लाख (दोनों खातों में ₹81.36 लाख) का फंड बनता है।

इसके बाद जब आप 15वें वर्ष में फॉर्म एच (Form H) भरकर खाते को 5 साल के लिए एक्सटेंड करते हैं, तो अगले 5 वर्षों में दोनों खातों का फंड ₹81.36 लाख से सीधे उछलकर ₹1.33 करोड़ के पार पहुंच जाता है। इसका मुख्य कारण यह है कि 15वें साल के बाद मिलने वाला ब्याज आपके पिछले ₹81 लाख के विशाल बेस पर चक्रवृद्धिकारी रूप से जुड़ता है।

EEE टैक्स छूट का ट्रिपल फायदा: 1 रुपये का भी टैक्स नहीं

पीपीएफ को भारतीय कर व्यवस्था में 'EEE' (Exempt-Exempt-Exempt) का दर्जा हासिल है:

  1. निवेश पर छूट: पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत धारा 80C में सालाना ₹1.5 लाख तक की टैक्स कटौती मिलती है। यदि दोनों टैक्सपेयर हैं, तो दोनों ₹1.5 लाख की अलग-अलग टैक्स छूट ले सकते हैं।

  2. ब्याज पर शून्य टैक्स: हर साल खाते में जुड़ने वाला ब्याज पूरी तरह कर-मुक्त होता है।

  3. निकासी पर शून्य टैक्स: 20 साल बाद जब आप ₹1.33 करोड़ की पूरी राशि निकालेंगे, तो उस पर पूंजीगत लाभ कर (Capital Gains Tax) या कोई अन्य इनकम टैक्स शून्य रहेगा।

अधिकतम ब्याज पाने के 2 गोल्डन रूल्स

  • हर महीने की 5 तारीख से पहले जमा करें: पीपीएफ नियमों के अनुसार, ब्याज की गणना महीने की 5वीं तारीख और अंतिम तारीख के बीच उपलब्ध न्यूनतम बैलेंस पर की जाती है। इसलिए मासिक किस्त हमेशा 1 से 5 तारीख के बीच ही खाते में ट्रांसफर करें।

  • एकमुश्त जमा करने पर 5 अप्रैल का नियम: यदि आप पूरे साल की राशि ₹1.5 लाख एक साथ जमा करते हैं, तो उसे हर साल 5 अप्रैल से पहले जमा कर दें। ऐसा करने से आपको पूरे 12 महीनों का ब्याज मिलता है, जिससे 20 साल के अंत में मैच्योरिटी कॉर्पस में लाखों रुपयों का अतिरिक्त लाभ जुड़ जाता है।