गैस सिलेंडर में कितनी गैस बची है? इस गीले कपड़े वाले ‘देसी जुगाड़’ से 1 मिनट में करें सटीक चेक
रसोई में खाना बनाते समय अगर अचानक एलपीजी गैस सिलेंडर खत्म हो जाए, तो गृहिणियों और पूरे परिवार के लिए भारी परेशानी खड़ी हो जाती है। अक्सर लोग सिलेंडर को उठाकर या हिलाकर यह अंदाजा लगाने की कोशिश करते हैं कि उसमें कितनी गैस बची है, लेकिन सिलेंडर का खुद का लोहा इतना भारी होता है कि इस तरीके से कभी भी सही मात्रा का पता नहीं चल पाता। इसके अलावा भारी-भरकम सिलेंडर को बार-बार हिलाने या घसीटने से उसके रेगुलेटर नोजल या पाइप के ढीले होने का खतरा भी बना रहता है। कई बार असमंजस की वजह से लोग समय से पहले ही नया सिलेंडर बुक नहीं कर पाते और ऐन मौके पर चूल्हा बंद पड़ जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिना किसी डिजिटल मीटर या वजन तौलने वाली मशीन के, सिर्फ एक साधारण भीगे कपड़े के इस्तेमाल से आप अपनी आंखों के सामने देख सकते हैं कि सिलेंडर में गैस का स्तर कहां तक पहुंचा है? यह कोई जादू नहीं बल्कि विशुद्ध रूप से भौतिक विज्ञान (Physics) के एक सामान्य नियम पर आधारित बेहद कारगर देसी जुगाड़ है।
गीले कपड़े से गैस जांचने का 1 मिनट का आसान फॉर्मूला
इस आसान और सुरक्षित तरीके को आजमाने के लिए आपको किसी महंगे उपकरण की बिल्कुल जरूरत नहीं है, बस घर में मौजूद एक सूती कपड़ा और थोड़ा सा सामान्य पानी चाहिए। सबसे पहले एक साफ सूती तौलिए या कपड़े को पानी में अच्छी तरह भिगो लें और उसे हल्का सा निचोड़ लें ताकि पानी टपकना बंद हो जाए लेकिन कपड़ा पूरी तरह नम बना रहे। इसके बाद सिलेंडर के चारों तरफ या ऊपर से नीचे तक एक सीधी पट्टी के रूप में उस भीगे कपड़े को अच्छी तरह लपेट दें, जिससे सिलेंडर की लोहे की बाहरी सतह पूरी तरह गीली हो जाए। कपड़ा हटाने के बाद आपको केवल दो से तीन मिनट तक सिलेंडर की सतह को ध्यान से देखना है। आप पाएंगे कि सिलेंडर का कुछ हिस्सा हवा के संपर्क में आते ही बहुत तेजी से सूख जाता है, जबकि एक निश्चित हिस्से से नीचे की सतह काफी देर तक नम और गीली ही बनी रहती है। जहां से गीलापन बरकरार है, समझ लीजिए कि सिलेंडर के अंदर लिक्विड गैस का स्तर ठीक वहीं तक मौजूद है।
इसके पीछे का वैज्ञानिक सिद्धांत: क्यों सूखता है खाली हिस्सा?
इस आसान देसी तरीके के पीछे थर्माडायनामिक्स और वाष्पीकरण (Evaporation) का गहरा वैज्ञानिक तर्क छिपा होता है। हम सभी जानते हैं कि घरेलू सिलेंडर में भरी जाने वाली एलपीजी यानी लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) भारी दबाव के तहत तरल अवस्था (Liquid State) में भरी जाती है। यह गैस अंदर से बेहद ठंडी होती है, जिसके चलते जिस हिस्से में तरल गैस मौजूद होती है, वहां सिलेंडर की लोहे की दीवार का तापमान बाहर के वातावरण से काफी कम यानी ठंडा रहता है। वहीं दूसरी तरफ, सिलेंडर का जो ऊपरी हिस्सा खाली हो चुका होता है, वहां केवल हल्की वाष्प होती है और उस हिस्से का लोहा कमरे के सामान्य तापमान के बराबर गर्म रहता है। जब आप पूरे सिलेंडर पर पानी का लेप लगाते हैं, तो खाली और गर्म हिस्से का पानी हवा के संपर्क में आते ही तेजी से भाप बनकर उड़ जाता है और वह हिस्सा तुरंत सूख जाता है। इसके विपरीत, जिस हिस्से में अंदर ठंडी गैस भरी होती है, वहां लोहा ठंडा होने के कारण पानी जल्दी नहीं सूखता और नमी काफी देर तक साफ लकीर के रूप में दिखाई देती है। यह विभाजन रेखा (Line of Demarcation) आपको सटीक बता देती है कि सिलेंडर आधा भरा है, एक-चौथाई बचा है या खत्म होने की कगार पर है।
हिलाने या झुकाकर गैस इस्तेमाल करने की गलती कभी न करें
अक्सर देखा जाता है कि जब गैस का प्रेशर कम होने लगता है, तो लोग सिलेंडर को टेढ़ा कर देते हैं या जमीन पर जोर-जोर से हिलाने लगते हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों और गैस कंपनियों के अनुसार ऐसा करना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। सिलेंडर को ज्यादा झुकाने या उल्टा करने से अंदर जमी हुई भारी गाद और अशुद्धियां वाल्व और गैस पाइप के जरिए सीधे बर्नर में पहुंच सकती हैं, जिससे गैस का फ्लो जाम हो सकता है या अचानक बड़ा लीकेज होकर आग लगने का खतरा पैदा हो सकता है। इसके अलावा पुराने और घिसे हुए रेगुलेटर पर सिलेंडर हिलाने से अचानक अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे रबर की वॉशर कटने की आशंका रहती है। इसलिए सुरक्षित तरीका यही है कि सिलेंडर को हमेशा समतल जमीन पर सीधा खड़ा रखें और जब भी शक हो, इस गीले कपड़े वाले तरीके से गैस का लेवल मापकर समय रहते नई रिफिल की बुकिंग कर लें।
सही समय पर रिफिल बुकिंग से दूर होगी इमरजेंसी की टेंशन
आज के समय में इंडेन (Indane), भारत गैस (Bharat Gas) और एचपी गैस (HP Gas) जैसी सभी सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने गैस बुकिंग की प्रक्रिया को बेहद सरल और डिजिटल बना दिया है। यदि आप महीने में एक या दो बार इस गीले कपड़े की ट्रिक से गैस का लेवल चेक करते रहेंगे, तो जैसे ही आपको दिखे कि सिलेंडर में केवल 15 से 20 फीसदी गैस बची है, आप तुरंत अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से एक वॉट्सऐप मैसेज या मिस्ड कॉल देकर नया सिलेंडर शेड्यूल कर सकते हैं। समय रहते बुकिंग कराने से न तो त्योहारों और छुट्टियों के दिनों में गैस खत्म होने का डर रहेगा और न ही आपको किसी पड़ोसी से सिलेंडर मांगने या रेस्टोरेंट से महंगा खाना मंगवाने की नौबत आएगी। यह आसान सी घरेलू तकनीक सुरक्षा के लिहाज से सौ फीसदी प्रमाणित है और आपकी रसोई के बजट व समय दोनों का सही प्रबंधन करने में बेहद मददगार साबित होती है।