रसोई गैस सुरक्षा के लिए सरकार का अभूतपूर्व कदम, 21 रिफाइनरियों के लिए तय हुआ उत्पादन ढांचा
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को लेकर बने जोखिमों के बीच भारत सरकार ने देश के करोड़ों परिवारों की रसोई को किसी भी संभावित ईंधन संकट से बचाने के लिए एक स्थायी और ऐतिहासिक सुरक्षा चक्र तैयार किया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने देश में पहली बार सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की सभी 21 प्रमुख रिफाइनरियों तथा अपस्ट्रीम उत्पादक कंपनियों के लिए अधिकतम एलपीजी उत्पादन लक्ष्य (Maximum LPG Production Targets) निर्धारित करने का आधिकारिक आदेश जारी किया है।
मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, देश की कुल संयुक्त एलपीजी उत्पादन क्षमता को 63,810 टन प्रतिदिन तय किया गया है। यह क्षमता 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्त वर्ष के घरेलू दैनिक उत्पादन (लगभग 35,900 टन प्रतिदिन) से दोगुने से भी अधिक है और भारत की कुल दैनिक खपत (लगभग 91,000 टन प्रतिदिन) के 70 प्रतिशत हिस्से को केवल घरेलू रिफाइनरियों के दम पर पूरा करने में सक्षम है। सरकार का यह नया ढांचा एक स्थायी स्टैंडिंग मैकेनिज्म के रूप में काम करेगा, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति बाधित होने या जहाजों के मार्ग में रुकावट आने पर तत्काल प्रभाव से एक्टिवेट हो जाएगा।
रिलायंस को मिला सबसे बड़ा जिम्मा: जानिए किस कंपनी को कितना मिला दैनिक कोटा
सरकार द्वारा निर्धारित 63,810 टन प्रतिदिन के कुल लक्ष्य में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की सभी प्रमुख ऊर्जा कंपनियों को उनकी शोधन क्षमता के अनुसार विशिष्ट उत्पादन कोटा सौंपा गया है:
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रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL): गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस की 33 मिलियन टन सालाना क्षमता वाली डोमेस्टिक टैरिफ एरिया (DTA) रिफाइनरी को संकट के समय प्रतिदिन 18,000 टन एलपीजी का उत्पादन करने का निर्देश दिया गया है, जो कुल लक्ष्य का सबसे बड़ा व्यक्तिगत हिस्सा है। रिलायंस की केवल निर्यात के लिए समर्पित 35.2 मिलियन टन वाली सेज रिफाइनरी को इस अनिवार्य लक्ष्य से अलग रखा गया है।
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18 सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियां (PSU Refineries): इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) द्वारा संचालित 18 सरकारी रिफाइनरियों को संयुक्त रूप से 31,470 टन प्रतिदिन उत्पादन का लक्ष्य सौंपा गया है।
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नायरा एनर्जी (Nayara Energy): रूस की रोसनेफ्ट समर्थित नायरा एनर्जी की वाडिनार (गुजरात) स्थित 20 मिलियन टन क्षमता वाली रिफाइनरी के लिए 4,480 टन प्रतिदिन का उत्पादन स्तर तय किया गया है।
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अपस्ट्रीम गैस उत्पादक (ONGC और GAIL): प्राकृतिक गैस से एलपीजी का निष्कर्षण करने वाली कंपनियों जैसे ओएनजीसी और गेल को प्रतिदिन 6,460 टन एलपीजी उत्पादन का कोटा दिया गया है।
क्यों पड़ी स्टैंडिंग फ्रेमवर्क की जरूरत? 64% आयात निर्भरता और पश्चिम एशिया संकट का सबक
भारत में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कुल 33.2 मिलियन टन (लगभग 3.32 करोड़ टन) एलपीजी की खपत हुई थी। इसमें से केवल 13.1 मिलियन टन का उत्पादन घरेलू स्तर पर हुआ, जबकि शेष 21.3 मिलियन टन एलपीजी का विदेशों से आयात करना पड़ा। इसका सीधा अर्थ यह है कि भारत अपनी कुल रसोई गैस आवश्यकता का 64 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात पर निर्भर रखता है।
इस आयात का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा खाड़ी देशों (सऊदी अरब, कतर, यूएई और कुवैत) से आता है, जिसके जहाज फारस की खाड़ी के संकरे होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचते हैं। हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में भड़के सैन्य संघर्ष और जहाजों पर हुए हमलों के कारण इस समुद्री मार्ग में भारी व्यवधान पैदा हुआ था। उस समय सरकार को आपातकालीन आदेश जारी कर रिफाइनरियों से उत्पादन बढ़ाने और कमर्शियल सिलेंडरों की बिक्री सीमित करने जैसे तदर्थ (Ad-hoc) कदम उठाने पड़े थे। उन परिस्थितियों से सबक लेते हुए अब सरकार ने एक ऐसा कानूनी और संस्थागत ढांचा बना दिया है, जिससे भविष्य में किसी भी विदेशी रुकावट के समय घरेलू उपभोक्ताओं को राशनिंग, गैस की किल्लत या रिफिल में देरी जैसी समस्याओं का सामना न करना पड़े।
पेट्रोकेमिकल स्ट्रीम्स का डायवर्जन और नैफ्था-टू-एलपीजी: कैसे बढ़ाया जाएगा उत्पादन?
रिफाइनरियों को अपनी एलपीजी उत्पादन क्षमता को मौजूदा न्यूनतम स्तर से ऊपर ले जाने के लिए कई उन्नत तकनीकी और परिचालन बदलाव लागू करने के निर्देश दिए गए हैं:
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प्रोपेन और ब्यूटेन का डायवर्जन: रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल परिसरों को निर्देश दिया गया है कि वे प्लास्टिक और पॉलीमर निर्माण में इस्तेमाल होने वाले प्रोपेन, ब्यूटेन, प्रोपिलीन और ब्यूटिलीन के प्रवाह को पेट्रोकेमिकल उत्पादन से हटाकर सीधे एलपीजी पूल में डाइवर्ट करें।
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नैफ्था-टू-एलपीजी कन्वर्जन: कंपनियों को अपनी इकाइयों में नैफ्था से एलपीजी बनाने वाली प्रक्रियाओं (Naphtha-to-LPG Conversion) को सक्रिय करने को कहा गया है।
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कैटेलिटिक क्रैकिंग यूनिट्स (FCCU) का अपग्रेडेशन: गैसोलीन-बेस्ड फ्लूइड कैटेलिटिक क्रैकिंग यूनिट्स को पेट्रो-फ्लूइड कैटेलिटिक क्रैकिंग यूनिट्स में अपग्रेड करने का आदेश दिया गया है ताकि क्रूड ऑयल के शोधन के दौरान निकलने वाली भारी गैसों से अधिकतम रसोई गैस बनाई जा सके।
मंत्रालय के आदेश के अनुसार, इस उत्पादन शेड्यूल की हर छह महीने में (प्रत्येक वर्ष 1 जनवरी और 1 जुलाई को) व्यापक समीक्षा की जाएगी। इसके तहत नई रिफाइनरियों के चालू होने, नए गैस क्षेत्रों के जुड़ने या मौजूदा इकाइयों में क्षमता विस्तार के आधार पर कोटे को अपडेट किया जाएगा।
आपूर्ति का भौगोलिक विविधीकरण: गैर-खाड़ी देशों से बढ़े एलपीजी और क्रूड के सौदे
घरेलू उत्पादन को दोगुना करने के साथ-साथ भारत ने अपनी अंतरराष्ट्रीय खरीद रणनीति में भी बड़ा बदलाव किया है:
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होर्मुज मार्ग पर निर्भरता में कमी: पेट्रोलियम मंत्रालय के हालिया आधिकारिक ब्रीफिंग के अनुसार, भारत का 70 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात अब होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर के सुरक्षित समुद्री मार्गों से आ रहा है।
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अमेरिका, लैटिन अमेरिका और अफ्रीका से नए अनुबंध: भारत ने संयुक्त राज्य अमेरिका, अर्जेंटीना, अल्जीरिया और ब्राजील जैसे देशों से एलपीजी और एलएनजी के दीर्घकालिक कार्गो सुरक्षित किए हैं, जिससे आपूर्ति का जोखिम कई भौगोलिक क्षेत्रों में बंट गया है।
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भारतीय नौसेना का एस्कॉर्ट: संवेदनशील जलक्षेत्रों से गुजरने वाले भारतीय ध्वजवाहक एलपीजी कैरियर्स और क्रूड टैंकरों को भारतीय नौसेना के 'ऑपरेशन संकल्प' के तहत चौबीसों घंटे सुरक्षा निगरानी प्रदान की जा रही है।
पीएनजी विस्तार और सब्सिडी प्रबंधन: टिकाऊ ऊर्जा भविष्य की तैयारी
आयातित एलपीजी पर दबाव को दीर्घकालिक रूप से कम करने के लिए सरकार सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) नेटवर्क के तहत पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के घरेलू कनेक्शनों का तेजी से विस्तार कर रही है। जिन शहरी और उपनगरीय इलाकों में पाइपलाइन पहुंच रही है, वहां के उपभोक्ताओं को पीएनजी पर शिफ्ट किया जा रहा है, जिससे बचे हुए एलपीजी सिलेंडरों का सुरक्षित बफर ग्रामीण और दूरदराज के उन क्षेत्रों के लिए आरक्षित किया जा सके जहां पाइपलाइन नेटवर्क संभव नहीं है।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के 10 करोड़ से अधिक लाभार्थी परिवारों के लिए निरंतर आपूर्ति और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के जरिए मिलने वाली राहत को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा गया है।
140 करोड़ नागरिकों के लिए अचूक ऊर्जा सुरक्षा कवच
केंद्र सरकार द्वारा 21 रिफाइनरियों के लिए लागू किया गया यह नया एलपीजी उत्पादन ढांचा भारत की ऊर्जा कूटनीति और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक युगांतरकारी कदम है। वैश्विक स्तर पर चाहे युद्ध के बादल मंडराएं, समुद्री मार्ग अवरुद्ध हों या अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव आए—घरेलू स्तर पर 63,810 टन प्रतिदिन के उत्पादन का यह मजबूत ढांचा यह सुनिश्चित करेगा कि देश के किसी भी कोने में आम नागरिक के घर का चूल्हा न बुझे। समय रहते उठाया गया यह नीतिगत कदम भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में बाहरी दबावों से मुक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत ढाल साबित हो रहा है।