फर्जी SIM पर सरकार का बड़ा एक्शन: नया मोबाइल नंबर लेने से पहले अब होगा रियल-टाइम डिजिटल चेक

फर्जी SIM पर सरकार का बड़ा एक्शन: नया मोबाइल नंबर लेने से पहले अब होगा रियल-टाइम डिजिटल चेक

देश भर में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों, फाइनेंशियल फ्रॉड और फर्जी पहचान पत्रों के जरिए सिम कार्ड जारी करने के मामलों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार और दूरसंचार विभाग (DoT) ने बड़ा कदम उठाया है। अब नया मोबाइल कनेक्शन या सिम कार्ड जारी करने से पहले ग्राहक की पहचान का रियल-टाइम डिजिटल सत्यापन (Real-Time Digital Verification) अनिवार्य कर दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत कागजी खानापूर्ति और ढीली वेरिफिकेशन प्रक्रिया को पूरी तरह समाप्त करते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक बायोमेट्रिक टूल्स से लैस सिस्टम लागू किया गया है, ताकि कोई भी असामाजिक तत्व किसी दूसरे व्यक्ति के नाम या जाली दस्तावेजों पर सिम एक्टिवेट न करा सके।

अब कैसे होगा नया सिम लेते समय रियल-टाइम डिजिटल चेक?

नए नियमों के अनुसार, जब भी कोई ग्राहक टेलीकॉम ऑपरेटर (Jio, Airtel, Vi या BSNL) के स्टोर या अधिकृत पॉइंट ऑफ सेल (PoS) पर नया कनेक्शन लेने जाएगा, तो पूरी प्रक्रिया लाइव डिजिटल मोड में पूरी होगी:

  • लाइव फोटो और एआई फेशियल मैचिंग: स्टोर पर ग्राहक की लाइव फोटो ली जाएगी, जिसे आधार या आधिकारिक डिजिटल पहचान डेटाबेस में मौजूद फोटो के साथ एआई एल्गोरिदम के जरिए रियल-टाइम मैच किया जाएगा।

  • जियो-टैगिंग और टाइम-स्टैम्पिंग: जिस PoS या दुकान से सिम जारी की जा रही है, उसकी सटीक लोकेशन की जियो-टैगिंग और टाइम-स्टैम्पिंग अनिवार्य होगी, जिससे यह ट्रैक हो सके कि सिम किस स्थान से खरीदी गई।

  • डिजिटल केवाईसी (e-KYC) और ओटीपी सत्यापन: आधार आधारित ई-केवाईसी के साथ-साथ आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर आने वाले ओटीपी और बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन के बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

  • सिम एक्टिवेशन में कूलिंग-ऑफ पीरियड: डिजिटल चेक पास होने के बाद भी सिस्टम बैकएंड पर डेटा का क्रॉस-वेरिफिकेशन करेगा, जिसके बाद ही कॉलिंग और डेटा सेवाएं पूरी तरह एक्टिव होंगी।

PoS एजेंटों और सिम विक्रेताओं का अनिवार्य पुलिस वेरिफिकेशन

फर्जी सिम जारी करने के खेल में शामिल अनधिकृत डीलरों और सड़क किनारे बिना सत्यापन के सिम बेचने वाले एजेंटों पर सबसे कड़ी कार्रवाई की गई है। दूरसंचार विभाग ने सभी टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे अपने प्रत्येक पॉइंट ऑफ सेल (PoS) एजेंट का अनिवार्य कॉर्पोरेट और पुलिस वेरिफिकेशन पूरा करें। जो डीलर नियमों का उल्लंघन करते हुए बिना वैध दस्तावेजों के सिम जारी करते पाए जाएंगे, उन पर भारी जुर्माना लगाने के साथ-साथ उनकी आईडी स्थायी रूप से ब्लैकलिस्ट कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

संचार साथी पोर्टल और ASTR टूल से लाखों फर्जी सिम ब्लॉक

सरकार ने साइबर सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए पहले से ही 'संचार साथी' (Sanchar Saathi) पोर्टल और 'ASTR' (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड फेशियल रिकॉग्निशन पावर्ड सॉल्यूशन फॉर टेलीकॉम सिम सब्सक्राइबर वेरिफिकेशन) टूल तैनात कर रखा है। इस एआई टूल ने देश भर में एक ही व्यक्ति की तस्वीर पर अलग-अलग नामों से लिए गए लाखों संदिग्ध मोबाइल कनेक्शनों की पहचान कर उन्हें ब्लॉक किया है। नया रियल-टाइम चेक सिस्टम इसी तकनीक को पॉइंट-ऑफ-सेल स्तर पर सीधे जोड़ता है, जिससे फर्जी कनेक्शन सिस्टम में प्रवेश ही न कर सके।

महानगरों से लेकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में सख्ती

दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे महानगरों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, बिहार के पटना, राजस्थान के जयपुर और मध्य प्रदेश के इंदौर जैसे टियर-2 व टियर-3 शहरों में स्थानीय पुलिस और साइबर सेल के समन्वय से सघन चेकिंग अभियान चलाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर चलने वाले सिम डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को सख्त निगरानी के दायरे में लाया गया है, ताकि मेवात, जामताड़ा या अन्य क्षेत्रों से संचालित होने वाले साइबर ठगों के नेटवर्क को नए नंबर हासिल करने से रोका जा सके।

आम नागरिकों को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

  • अपने नाम पर कितने एक्टिव सिम कार्ड चल रहे हैं, इसकी जांच करने के लिए तुरंत सरकार के आधिकारिक संचार साथी पोर्टल (tafcop.sancharsaathi.gov.in) पर जाएं।

  • यदि आपकी आईडी पर कोई ऐसा नंबर दर्ज दिखता है जिसे आप इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, तो पोर्टल के जरिए उसे तुरंत ब्लॉक या रिपोर्ट करें।

  • नया सिम लेते समय हमेशा अधिकृत कंपनी स्टोर या प्रमाणित डीलर के पास ही जाएं और किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपने बायोमेट्रिक या आधार ओटीपी साझा न करें।

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