ऑनलाइन शॉपिंग में फर्जी डिस्काउंट का खेल खत्म: केंद्र सरकार ने नोटिफाई किए नए कड़े नियम; 1 जनवरी 2027 से ई-कॉमर्स कंपनियों पर कसेगा शिकंजा
फेस्टिवल सेल और ऑनलाइन शॉपिंग के नाम पर पहले किसी सामान के दाम बढ़ाकर फिर उस पर 70% से 90% तक की भारी 'छूट' दिखाने वाले खेल पर केंद्र सरकार ने पूर्ण विराम लगाने की तैयारी कर ली है। केंद्रीय उपभोक्ता मामले विभाग (Department of Consumer Affairs) ने ई-कॉमर्स नियमों में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए कंज्यूमर प्रोटेक्शन (ई-कॉमर्स) (संशोधन) नियम, 2026 को अधिसूचित (Notify) कर दिया है।
ये नए और कड़े नियम 1 जनवरी 2027 से अमेजन, फ्लिपकार्ट, मिंत्रा, मीशो जैसी सभी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय ई-कॉमर्स कंपनियों पर लागू हो जाएंगे। सरकार का कहना है कि साल 2025 में नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (NCH) पर आई कुल 17.71 लाख शिकायतों में से करीब 29% (5.11 लाख से अधिक) शिकायतें अकेले ऑनलाइन शॉपिंग फर्जीवाड़े, रिफंड और भ्रामक कीमतों से जुड़ी थीं। इसी को देखते हुए 2020 के पुराने नियमों को अपडेट कर पारदर्शी और उपभोक्ता-हितैषी बनाया गया है।
1 जनवरी 2027 से लागू होने वाले 6 सबसे बड़े नियम: क्या-क्या बदलेगा?
नए संशोधनों के तहत ऑनलाइन खरीदारों के अधिकारों को मजबूत करने के लिए सख्त कानूनी प्रावधान किए गए हैं:
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1. फर्जी डिस्काउंट का अंत (30-डे प्रायर प्राइस नियम):
सेल के दौरान जब भी कोई ई-कॉमर्स कंपनी डिस्काउंटेड प्राइस दिखाएगी, तो उसे उत्पाद की नई रियायती कीमत के साथ-साथ 'प्रायर प्राइस' (Prior Price) भी प्रदर्शित करना होगा। प्रायर प्राइस का मतलब यह होगा कि छूट घोषित करने से ठीक पहले के पिछले 30 दिनों में वह सामान जिस सबसे कम कीमत (Lowest Price) पर बिका था, वही बेस प्राइस मानी जाएगी। इससे विक्रेता सेल से पहले आर्टिफिशियल रूप से दाम बढ़ाकर झूठी छूट नहीं दिखा सकेंगे।
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2. सर्च रिजल्ट्स और स्पॉन्सर्ड लिस्टिंग में पारदर्शिता:
कंपनियां सर्च रिजल्ट्स में हेरफेर करके ग्राहकों को गुमराह नहीं कर सकेंगी। अगर किसी सेलर ने पैसे देकर अपने प्रोडक्ट को सर्च में सबसे ऊपर रखवाया है, तो उस पर साफ और बड़े अक्षरों में 'Sponsored Listing' या 'Advertisement' लिखना अनिवार्य होगा, ताकि यूजर सामान्य और पेड रिजल्ट में फर्क समझ सके।
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3. हिडन चार्जेस और जबरन बंडल फीस पर रोक:
प्लेटफॉर्म्स कार्ट में चेकआउट के समय अचानक गैर-जरूरी या छुपी हुई फीस (जैसे अनचाही हैंडलिंग या पैकेजिंग फीस) नहीं जोड़ सकेंगे। केवल लॉयल्टी या मेंबरशिप प्रोग्राम को छोड़कर मुख्य सर्विस से इतर सेवाओं के लिए जबरन शुल्क वसूलने पर पाबंदी होगी।
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4. डार्क पैटर्न्स पर सेल्फ-ऑडिट और सर्टिफिकेट अनिवार्य:
उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाले इंटरफेस—जैसे 'सिर्फ 1 पीस बचा है', नकली टाइमर या जबरन इंश्योरेंस टिक करने जैसे 'डार्क पैटर्न्स' (Dark Patterns Guidelines 2023) को खत्म करना होगा। सभी कंपनियों को हर साल अनिवार्य सेल्फ-ऑडिट कराना होगा और अपनी ऐप/वेबसाइट पर कम्प्लायंस सर्टिफिकेट प्रदर्शित करना होगा।
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5. नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (NCH) से सीधा जुड़ाव:
प्रत्येक ई-कॉमर्स कंपनी को अनिवार्य रूप से नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन के कन्वर्जेंस प्रोसेस से जुड़ना होगा। इसके साथ ही, जब कोई ग्राहक कंपनी के पास शिकायत दर्ज करेगा, तो ग्रीवेंस ऑफिसर द्वारा दर्ज की गई शिकायत की आधिकारिक कॉपी ग्राहक को लिखित रूप में देना अनिवार्य होगा।
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6. प्रोडक्ट की पूरी जानकारी और डेटा प्राइवेसी:
सामान खरीदने से पहले ही स्क्रीन पर एक्सपायरी/बेस्ट बिफोर डेट, रिफंड-रिटर्न शर्तें, वारंटी, डिलीवरी टाइमलाइन और आयातित सामान के मामले में आयातक (Importer) व 'कंट्री ऑफ ओरिजिन' की जानकारी स्पष्ट देनी होगी। इसके अलावा ग्राहक की स्पष्ट सहमति (Express Consent) के बिना उसके निजी डेटा का व्यावसायिक इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
सरकार के इस कदम से ई-कॉमर्स कंपनियों की मनमानी पर लगाम लगेगी और ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले करोड़ों उपभोक्ताओं को पारदर्शी व सुरक्षित खरीदारी का माहौल मिलेगा।