बाजार खुलते ही धड़ाम हुए सोना-चांदी, 4400 रुपये से ज्यादा गिरी कीमत
भारतीय सर्राफा बाजार में आज कारोबार की शुरुआत होते ही बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। ग्लोबल मार्केट के कमजोर संकेतों और घरेलू स्तर पर निवेशकों की मुनाफावसूली के चलते सोना और चांदी के दाम धड़ाम हो गए हैं। खास तौर पर, एक ही झटके में सोने की कीमत में 4400 रुपये से ज्यादा की भारी गिरावट देखने को मिली है, जिससे आम खरीददारों और निवेशकों के बीच हलचल तेज हो गई है। बाजार में आई इस अचानक सुस्ती के बाद अब हर किसी के जेहन में यही सवाल है कि क्या मौजूदा स्तर पर सोना-चांदी खरीदना फायदेमंद सौदा साबित होगा या कीमतों में और गिरावट का इंतजार करना चाहिए?
घरेलू और वैश्विक बाजार में क्यों आई सुस्ती?
अंतरराष्ट्रीय बुलियन मार्केट में आई मंदी का सीधा असर भारतीय वायदा और हाजिर बाजारों पर साफ दिखाई दे रहा है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों, डॉलर इंडेक्स में मजबूती और भू-राजनीतिक तनावों के बीच निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के विकल्पों की बजाय लिक्विडिटी पर जोर देना शुरू कर दिया है। जानकारों के मुताबिक, जब भी वैश्विक स्तर पर महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ऊपर आते हैं या केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाते हैं, तो सोने-चांदी जैसी जिंसों (Commodities) पर दबाव बढ़ जाता है। यही वजह है कि घरेलू बाजार में खुलने के साथ ही बिकवाली हावी हो गई और कीमतों में जोरदार करेक्शन दर्ज किया गया।
चांदी की कीमतों में सबसे बड़ा करेक्शन
सोने के मुकाबले सफेद धातु यानी चांदी में गिरावट का रुख और भी ज्यादा आक्रामक रहा है। औद्योगिक मांग में सुस्ती और वैश्विक तकनीकी शेयरों में बिकवाली के कारण चांदी के दाम अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से काफी नीचे फिसल चुके हैं। जानकारों का मानना है कि चांदी का इंडस्ट्रियल यूज बहुत ज्यादा होने की वजह से ग्लोबल इकोनॉमी के उतार-चढ़ाव का इस पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है। पिछले कुछ सत्रों के दौरान मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी के futures अनुबंधों में भारी बिकवाली देखी गई है, जिससे निवेशकों को तगड़ा झटका लगा है।
क्या सोना-चांदी खरीदने का यह सही समय है?
बाजार विशेषज्ञों और वित्तीय सलाहकारों का मानना है कि इस तरह की भारी गिरावट लॉन्ग-टरम निवेशकों (Long-term Investors) के लिए एक बेहतरीन मौका लेकर आती है। हालांकि, शॉर्ट-टरम में बाजार की वोलेटिलिटी (अस्थिरता) को नकारा नहीं जा सकता है। यदि आप शादियों के सीजन या निवेश के उद्देश्य से खरीदारी करने की सोच रहे हैं, तो एकमुश्त पैसा लगाने के बजाय 'सिस्टमैटिक बाइंग' यानी टुकड़ों में खरीदारी करना सबसे समझदारी भरा कदम होगा। बाजार जानकारों की सलाह है कि सपोर्ट लेवल पर नजर रखते हुए खरीदारी करें और किसी भी जल्दबाजी से बचें ताकि बाजार के उतार-चढ़ाव के जोखिम को कम किया जा सके।