ईंधन की तपिश: पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 10 रुपये तक की भारी बढ़ोतरी की आशंका
महंगाई की मार झेल रही आम जनता की जेब पर आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों का बोझ और ज्यादा बढ़ने वाला है। बीते शुक्रवार को ही ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3-3 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया था। लेकिन कूटनीतिक और वित्तीय रिपोर्ट्स की मानें तो यह बढ़ोतरी यहीं रुकने वाली नहीं है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी के कारण आने वाले दो से तीन हफ्तों के भीतर पेट्रोल और डीजल के रेट में 10-10 रुपये प्रति लीटर की एक और बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने, घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतों में उछाल और हाल ही में दूध के दामों में हुई बढ़ोतरी का चौतरफा असर अब देश की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि इन कूटनीतिक कारणों की वजह से आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation) में 0.42 प्रतिशत तक का इजाफा हो सकता है।
10-10 रुपये क्यों बढ़ेंगे पेट्रोल और डीजल के दाम? (Petrol Diesel Next Price Hike)
दिग्गज ब्रोकरेज फर्म एम्के ग्लोबल (Emkay Global) ने अपनी होलिया रिपोर्ट में अंदेशा जताया है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियां अपने मौजूदा कूटनीतिक और वित्तीय घाटे को व्यवस्थित (Under Control) करने के लिए ईंधन की कीमतों में 10-10 रुपये की बढ़ोतरी करने पर विचार कर रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, तेल कंपनियां इस बोझ को कम करने के लिए दो कूटनीतिक रास्ते अपना सकती हैं:
या तो कीमतों में यह 10 रुपये की भारी बढ़ोतरी एक ही बार में कर दी जाए।
या फिर आम जनता को बड़े झटके से बचाने के लिए अगले दो से तीन हफ्तों के दौरान किश्तों में दाम बढ़ाए जाएं।
तेल कंपनियों को हर 1 लीटर पर हो रहा है ₹17-18 का भारी नुकसान
रिपोर्ट में इस बात का भी कूटनीतिक विश्लेषण किया गया है कि आखिर तेल कंपनियां कीमतें बढ़ाने पर क्यों मजबूर हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद घरेलू स्तर पर दाम न बढ़ने से कंपनियों को अंडर-रिकवरी का सामना करना पड़ रहा है:
प्रति लीटर नुकसान: मौजूदा समय में तेल कंपनियों को प्रति लीटर पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर 17 रुपये से 18 रुपये तक का शुद्ध नुकसान झेलना पड़ रहा है।
एक्साइज ड्यूटी का असर: यह भारी नुकसान तब हो रहा है, जब सरकार ने मार्च के महीने में एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) में 10-10 रुपये की कटौती की थी।
त्रैमासिक घाटा: यदि कीमतों में जल्द ही कूटनीतिक सुधार या इजाफा नहीं किया गया, तो तेल कंपनियों को चालू तिमाही में 57,000 करोड़ रुपये से 58,000 करोड़ रुपये तक का भारी-भरकम कॉर्पोरेट नुकसान उठाना पड़ सकता है।
$100 के पार पहुंचा क्रूड ऑयल (Crude Oil Rate Updates)
ईंधन की कीमतों में लगी इस आग के पीछे वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध जैसी कूटनीतिक परिस्थितियां हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों का गणित पूरी तरह बदल चुका है:
युद्ध से पहले क्रूड ऑयल का रेट: ~$70 प्रति बैरल मौजूदा समय में क्रूड ऑयल का रेट: $100 प्रति बैरल के पार
लंबे समय से कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं, जिसने भारतीय रिफाइनिंग और तेल वितरण कंपनियों पर कूटनीतिक दबाव को चरम पर पहुंचा दिया है।
दूध के दाम पहले ही बढ़ चुके हैं (Amul & Mother Dairy Price Hike)
ईंधन की इस कूटनीतिक मार से पहले ही आम आदमी के रसोई का बजट बिगड़ चुका है। देश की दो सबसे बड़ी डेयरी कंपनियों, अमूल (Amul) और मदर डेयरी (Mother Dairy) ने हाल ही में दूध की कीमतों में 2-2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी थी। मुख्य कंपनियों द्वारा दाम बढ़ाए जाने के बाद अब यह आशंका भी जताई जा रही है कि स्थानीय और क्षेत्रीय डेयरी कंपनियां भी आने वाले दिनों में दूध के रेट बढ़ा सकती हैं।
'डोमिनो इफेक्ट': आम आदमी की थाली पर सीधा असर
पेट्रोल और डीजल केवल वाहनों में डलवाने का ईंधन नहीं हैं, बल्कि यह देश की कूटनीतिक लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन (माल ढुलाई) की रीढ़ हैं। जब भी डीजल की कीमतों में इजाफा होता है, तो माल ढुलाई का किराया बढ़ जाता है। इसका सीधा 'डोमिनो इफेक्ट' सब्जियों, फलों, अनाज और रोजमर्रा के एफएमसीजी (FMCG) प्रॉडक्ट्स पर पड़ता है। साफ है कि आने वाले दिनों में आम आदमी के ऊपर चौतरफा कूटनीतिक आर्थिक बोझ बढ़ने वाला है