बड़े बैंकों की बेस्ट FD स्कीम्स: जानें किस बैंक में मिल रहा है सबसे ज्यादा ब्याज, देखें पूरी लिस्ट व रिटर्न का हिसाब
फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) भारतीय निवेशकों के लिए आज भी पूंजी सुरक्षा और गारंटीड रिटर्न का सबसे भरोसेमंद जरिया है। मौजूदा समय में बैंकों के बीच स्पेशल टेन्योर वाली एफडी योजनाओं पर आकर्षक ब्याज देने की होड़ चल रही है। जहां बड़े सरकारी और निजी बैंक 400 से 555 दिनों की स्पेशल एफडी पर 6.50% से लेकर 7.25% तक का ब्याज दे रहे हैं, वहीं स्मॉल फाइनेंस बैंक 8.25% से 8.50% तक का उच्चतम रिटर्न ऑफर कर रहे हैं।
वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens) को सभी बैंकों में सामान्य ग्राहकों के मुकाबले 0.50% से 0.75% तक अतिरिक्त ब्याज का लाभ मिलता है।
प्रमुख बैंकों की एफडी ब्याज दरों की तुलना (अक्टूबर 2026)
| बैंक का नाम | बेस्ट टेन्योर / स्पेशल स्कीम | सामान्य नागरिक (अधिकतम दर) | सीनियर सिटीजन (अधिकतम दर) |
| भारतीय स्टेट बैंक (SBI) | 444 दिन (अमृत वृष्टि) / 2-3 वर्ष | 6.60% | 7.10% |
| HDFC बैंक | 35 से 55 महीने | 6.60% | 7.10% |
| ICICI बैंक | 15 से 18 महीने | 6.60% | 7.10% |
| बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB) | 444 दिन (बॉब स्क्वायर) / 555 दिन | 6.65% – 7.15% | 7.15% – 7.65% |
| पंजाब नेशनल बैंक (PNB) | 444 दिन स्पेशल | 6.50% – 6.85% | 7.00% – 7.35% |
| यस बैंक / इंडसइंड बैंक | 18 महीने से 2 वर्ष | 7.00% – 7.25% | 7.50% – 7.75% |
| स्मॉल फाइनेंस बैंक (यूनिटी, सूर्योदय, उत्कर्ष) | 1 वर्ष से 3 वर्ष | 7.75% – 8.25% | 8.25% – 8.50% |
(नोट: ब्याज दरें ₹3 करोड़ से कम के खुदरा जमा पर लागू हैं और बैंकों के विवेक के अनुसार समय-समय पर संशोधित होती रहती हैं)।
₹5 लाख की एफडी पर 3 साल में रिटर्न का सटीक कैलकुलेशन
यदि आप ₹5,00,000 की राशि 3 वर्ष के लिए अलग-अलग ब्याज दरों पर फिक्स करते हैं (तिमाही कंपाउंडिंग के साथ):
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6.60% वार्षिक दर पर (बड़े सरकारी/निजी बैंक):
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कुल अर्जित ब्याज: लगभग ₹1,08,350
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मैच्योरिटी पर कुल रकम: लगभग ₹6,08,350
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7.10% वार्षिक दर पर (सीनियर सिटीजन - बड़े बैंक):
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कुल अर्जित ब्याज: लगभग ₹1,17,800
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मैच्योरिटी पर कुल रकम: लगभग ₹6,17,800
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8.25% वार्षिक दर पर (स्मॉल फाइनेंस बैंक):
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कुल अर्जित ब्याज: लगभग ₹1,39,600
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मैच्योरिटी पर कुल रकम: लगभग ₹6,39,600
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ज्यादा रिटर्न पाने के लिए अपनाएं 'एफडी लैडरिंग' तकनीक
एकमुश्त सारा पैसा किसी एक ही एफडी में 5 साल के लिए लॉक करने के बजाय रकम को अलग-अलग मैच्योरिटी अवधि में विभाजित करें।
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मान लीजिए आपके पास ₹6 लाख हैं, तो ₹2-2 लाख की तीन एफडी (1 वर्ष, 2 वर्ष और 3 वर्ष) के लिए बनाएं।
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जैसे ही पहले साल वाली एफडी मैच्योर हो, उसे दोबारा अगले 3 साल के लिए री-इन्वेस्ट कर दें।
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इससे आपके पास हर साल नकदी (लिक्विडिटी) उपलब्ध रहेगी और बढ़ती ब्याज दरों का पूरा फायदा उठाया जा सकेगा।
सुरक्षा और टैक्स नियम: ₹5 लाख तक की गारंटी
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DICGC इंश्योरेंस: आरबीआई के नियमों के तहत प्रत्येक बैंक (पब्लिक, प्राइवेट और स्मॉल फाइनेंस बैंक) में प्रति खाताधारक ₹5 लाख तक की मूल राशि और ब्याज दोनों पर डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) की 100% सुरक्षा गारंटी होती है। जोखिम को कम रखने के लिए बड़ी पूंजी को 2 से 3 अलग-अलग बैंकों में बांटकर जमा करना समझदारी है।
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टीडीएस (TDS) नियम: सामान्य नागरिकों के लिए एक वित्तीय वर्ष में एफडी ब्याज ₹40,000 से अधिक होने पर और वरिष्ठ नागरिकों के लिए ₹50,000 (सेक्शन 80TTB) से अधिक होने पर बैंक टीडीएस काटते हैं। यदि कुल सालाना आय टैक्स छूट सीमा के अंदर है, तो टीडीएस से बचने के लिए फॉर्म 15G (सामान्य नागरिक) या फॉर्म 15H (सीनियर सिटीजन) बैंक में जमा करें।