ITR Refund में आ गए ज्यादा पैसे? ज्यादा खुश न हों, तुरंत लौटा दें वापस; देरी की तो ब्याज और पेनाल्टी के साथ आ सकता है Income Tax Notice!
इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने के बाद जब बैंक खाते में रिफंड का मैसेज आता है, तो हर करदाता के चेहरे पर खुशी खिल जाती है। हालांकि, कई बार ऐसा देखा गया है कि तकनीकी गड़बड़ी, टीडीएस (TDS) की गलत मैचिंग, गलत डिडक्शन क्लेम या केंद्रीय प्रसंस्करण केंद्र (CPC) की दोबारा गणना के कारण करदाता के बैंक खाते में वास्तविक पात्रता से अधिक रिफंड ट्रांसफर हो जाता है। यदि आपके साथ भी ऐसा हुआ है और खाते में उम्मीद या क्लेम से ज्यादा पैसे आ गए हैं, तो इसे बोनस समझकर खर्च करने की गलती बिल्कुल न करें।
आयकर नियमों के अनुसार, अतिरिक्त मिला रिफंड विभाग की 'अमानत' होता है। इसे समय रहते वापस न करने पर आपको न केवल आयकर विभाग का कानूनी नोटिस (Demand Notice) झेलना पड़ सकता है, बल्कि भारी ब्याज और पेनाल्टी भी चुकानी पड़ सकती है।
अतिरिक्त रिफंड खाते में क्यों आ जाता है?
करदाताओं के खाते में अतिरिक्त रिफंड जमा होने के मुख्य रूप से 3 बड़े कारण होते हैं:
-
1. धारा 244A का ब्याज: यदि विभाग ने रिफंड जारी करने में देरी की है, तो वह 0.5% प्रति माह की दर से ब्याज जोड़कर भेजता है। कई बार करदाता इस ब्याज को अतिरिक्त रिफंड समझ लेते हैं।
-
2. डिडक्शन और टीडीएस डेटा का मिसमैच: यदि रिटर्न में दर्शाए गए टीडीएस और फॉर्म 26AS/AIS के डेटा में अंतर के बाद सिस्टम ने गलती से अधिक राशि स्वीकृत कर दी हो।
-
3. प्रोसेसिंग और सिस्टम एरर: सीपीसी (CPC) द्वारा प्रारंभिक सारांश मूल्यांकन (Summary Assessment under Section 143(1)) के दौरान तकनीकी खामी से दोहरा भुगतान हो जाना।
ज्यादा मिले पैसे न लौटाने पर क्या होगा? धारा 234D का सख्त नियम
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 234D (Section 234D) में अतिरिक्त रिफंड की वसूली को लेकर कड़े प्रावधान किए गए हैं:
-
0.5% मासिक ब्याज की देनदारी: यदि नियमित मूल्यांकन (Regular Assessment या Scrutiny) में पाया जाता है कि करदाता को वास्तविक पात्रता से अधिक रिफंड दे दिया गया है, तो अतिरिक्त राशि पर रिफंड जारी होने की तारीख से लेकर असेसमेंट पूरा होने की तारीख तक 0.5% प्रति माह (या महीने के किसी हिस्से के लिए) साधारण ब्याज वसूला जाएगा।
-
धारा 156 के तहत डिमांड नोटिस: आयकर विभाग धारा 143(1) या धारा 143(3) के तहत आदेश जारी कर धारा 156 के अंतर्गत टैक्स डिमांड नोटिस जारी करेगा।
-
धारा 220(2) का अतिरिक्त ब्याज: यदि डिमांड नोटिस मिलने के 30 दिनों के भीतर अतिरिक्त रिफंड की भरपाई नहीं की जाती है, तो बकाया राशि पर 1% प्रति माह की दर से अतिरिक्त दंडात्मक ब्याज जुड़ना शुरू हो जाएगा।
-
पेनाल्टी का खतरा: यदि विभाग को लगता है कि करदाता ने जानबूझकर गलत जानकारी देकर अतिरिक्त रिफंड हासिल किया है, तो धारा 270A के तहत अंडर-रिपोर्टिंग पर 50% से 200% तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
अतिरिक्त रिफंड आने पर क्या करें? 3 आसान स्टेप्स में लौटाएं पैसे
यदि आपको पता चलता है कि आपको जरूरत से ज्यादा रिफंड मिल चुका है, तो विभाग का नोटिस आने का इंतजार किए बिना स्वतः इन कदमों का पालन करें:
-
स्टेप 1 - इंटिमेशन ऑर्डर (143(1)) चेक करें: अपनी रजिस्टर्ड ईमेल आईडी पर विभाग द्वारा भेजे गए धारा 143(1) इंटिमेशन नोटिस को खोलें। उसमें दिए गए 'कंप्यूटेशन टेबल' में देखें कि विभाग ने किस गणना के आधार पर रिफंड भेजा है।
-
स्टेप 2 - रिवाइज्ड रिटर्न या रेक्टिफिकेशन फाइल करें:
-
यदि रिटर्न फाइलिंग के समय आपसे कोई चूक हो गई थी, तो धारा 139(5) के तहत रिवाइज्ड आईटीआर (Revised ITR) दाखिल करें।
-
यदि रिटर्न सही था लेकिन सीपीसी ने सिस्टम एरर से ज्यादा पैसे भेज दिए, तो पोर्टल पर 'Services' टैब में जाकर धारा 154 के तहत रेक्टिफिकेशन रिक्वेस्ट (Rectification Request) दर्ज करें।
-
-
स्टेप 3 - ऑनलाइन चालान (e-Pay Tax) से अतिरिक्त रकम जमा करें:
-
इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल (incometax.gov.in) पर लॉगिन करें और 'e-Pay Tax' विकल्प चुनें।
-
यदि विभाग ने डिमांड नोटिस भेजा है, तो 'Tax on Regular Assessment (Minor Head 400)' चुनें।
-
यदि आप स्वतः गलती सुधारकर अतिरिक्त पैसा लौटा रहे हैं, तो संबंधित असेसमेंट ईयर के लिए 'Self-Assessment Tax (Minor Head 300)' या निर्दिष्ट टैक्स हेड का चयन कर नेट बैंकिंग/यूपीआई से अतिरिक्त राशि का भुगतान कर दें।
-
भुगतान के बाद चालान रसीद (Challan CIN/BSR Code) को भविष्य के संदर्भ के लिए सुरक्षित रख लें।
-
अतिरिक्त रिफंड कभी भी करदाता की अपनी कमाई नहीं होती। इसलिए जैसे ही खाते में अधिक राशि दिखे, अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) या टैक्स सलाहकार से संपर्क कर उसकी जांच करवाएं और अतिरिक्त फंड को तुरंत सरकारी खजाने में लौटाकर भारी ब्याज व कानूनी झंझटों से खुद को सुरक्षित रखें।