EPFO New Scheme 2026: नौकरीपेशा लोगों को ईपीएफओ का बड़ा तोहफा! टेक-होम सैलरी, पीएफ निकासी और क्लेम सेटलमेंट को लेकर लागू हुए नए नियम
देश के संगठित क्षेत्र के करोड़ों नौकरीपेशा कर्मचारियों और वेतनभोगियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने बड़ा तोहफा देते हुए भविष्य निधि के नियमों में ऐतिहासिक और युगांतरकारी बदलाव लागू कर दिए हैं। केंद्र सरकार ने सात दशकों से चले आ रहे 1952 के पुराने ईपीएफ ढांचे को समाप्त कर नई 'कर्मचारी भविष्य निधि योजना 2026' (EPF Scheme, 2026) को आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया है। सामाजिक सुरक्षा संहिता (Code on Social Security) के अंतर्गत लाए गए इन नए नियमों का सीधा और सकारात्मक प्रभाव देश के 6.5 करोड़ से अधिक पीएफ अंशधारकों की मासिक टेक-होम सैलरी, आपातकालीन पीएफ निकासी (Withdrawal) और क्लेम सेटलमेंट की गति पर पड़ने वाला है।
15,000 की सीलिंग पर स्पष्टता: टेक-होम सैलरी बढ़ाने का मिला बड़ा विकल्प
नई ईपीएफ योजना 2026 के तहत अनिवार्य योगदान की गणना को लेकर सबसे बड़ा और स्पष्ट फैसला किया गया है।
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अब अनिवार्य 12 प्रतिशत पीएफ कटौती केवल 15,000 रुपये की वैधानिक वेतन सीमा (Statutory Wage Ceiling) तक ही अनिवार्य रखी गई है। इसका सीधा अर्थ है कि किसी कर्मचारी का अनिवार्य पीएफ अंशदान अधिकतम 1,800 रुपये प्रति माह और इतना ही नियोक्ता का अंशदान होगा।
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इससे पहले कई कंपनियां पूरी बेसिक सैलरी पर 12% पीएफ काटती थीं, जिससे कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी काफी घट जाती थी।
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नए नियमों के तहत 15,000 रुपये से अधिक वेतन वाले कर्मचारियों के लिए अधिक पीएफ कटवाना पूरी तरह स्वैच्छिक (Voluntary) बना दिया गया है। यदि कर्मचारी और कंपनी सहमत हों, तो वे अनिवार्य ₹1,800 तक ही कटौती सीमित रख सकते हैं, जिससे कर्मचारियों को हर महीने मिलने वाली इन-हैंड सैलरी में सीधा और बड़ा इजाफा देखने को मिलेगा।
आंशिक निकासी (Partial Withdrawal) के नियम हुए बेहद आसान: 13 जटिल श्रेणियां खत्म
ईपीएफओ के सदस्यों के लिए सबसे बड़ी राहत आंशिक निकासी के नियमों में मिली है। पहले पीएफ से पैसा निकालने के लिए 13 अलग-अलग जटिल श्रेणियां और शर्तें थीं, जिसके कारण जरा सी चूक होने पर लाखों क्लेम रिजेक्ट हो जाते थे।
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नई योजना में इन सभी को समाप्त कर केवल 3 स्पष्ट और व्यापक श्रेणियों में बदल दिया गया है:
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अत्यावश्यक जरूरतें (Essential Needs): बीमारी (बिना किसी सीमा के), बच्चों की उच्च शिक्षा (10 बार तक) और विवाह (5 बार तक)।
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आवास से जुड़ी जरूरतें (Housing Needs): मकान खरीदने, घर निर्माण, होम लोन चुकाने या रिनोवेशन के लिए (जीवन में 5 बार तक)।
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विशेष परिस्थितियां (Special Circumstances): प्राकृतिक आपदा या अचानक आई वित्तीय तंगी के लिए (साल में 2 बार तक बिना किसी दस्तावेज के)।
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इन श्रेणियों के तहत सदस्य अपने पात्र बैलेंस का 100 प्रतिशत तक आंशिक रूप से निकाल सकते हैं।
20 दिनों के भीतर अनिवार्य क्लेम सेटलमेंट और डिजिटल ट्रांसपेरेंसी
ईपीएफओ ने अपने क्लेम सेटलमेंट सिस्टम को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बना दिया है। नए नियमों के तहत ईपीएफओ को अब हर हाल में 20 दिनों के भीतर सदस्य के क्लेम का निपटारा करना अनिवार्य होगा। यदि तय समय सीमा के भीतर क्लेम बिना ठोस कारण के अटकाया जाता है, तो संबंधित फील्ड अधिकारियों और कमिश्नर पर जवाबदेही तय की जाएगी। इसके अलावा, ऑटो-मोड सेटलमेंट और आधार-लिंक्ड यूपीआई/बैंक ट्रांसफर के जरिए अधिकांश सामान्य क्लेम अब 3 से 4 कार्यदिवसों में ही सीधे बैंक खाते में क्रेडिट किए जा रहे हैं।
वेतन सीमा को 25,000 रुपये करने पर भी चल रहा विचार
इसके साथ ही, संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा का दायरा और अधिक बढ़ाने के उद्देश्य से श्रम मंत्रालय अनिवार्य वेतन सीमा (Wage Ceiling) को मौजूदा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने के प्रस्ताव पर भी सक्रियता से काम कर रहा है। यदि यह संशोधन लागू होता है, तो लाखों नए कर्मचारियों को ईपीएफ पेंशन (EPS-95) और ईडीएलआई (EDLI) के तहत 7 लाख रुपये तक के मुफ्त लाइफ इंश्योरेंस कवर का सीधा फायदा मिल सकेगा।