EPF Withdrawal Rules 2026: जॉब छोड़ने के बाद पीएफ का पैसा निकाल रहे हैं? पहले टैक्स के ये नए नियम जरूर जान लें
नौकरी करने वाले ज्यादातर लोगों को लगता है कि अगर पीएफ (EPF) निकालते समय कोई टीडीएस (TDS) नहीं कटा, तो इसका मतलब है कि वह पैसा पूरी तरह टैक्स-फ्री है। लेकिन, टैक्स एक्सपर्ट्स बताते हैं कि यह हमारी सबसे बड़ी गलतफहमी है। टीडीएस न कटने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपको उस पर टैक्स नहीं देना होगा। टीडीएस सिर्फ टैक्स वसूलने का एक तरीका है, जबकि असली टैक्स देनदारी तब तय होती है, जब आप अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते हैं।
कब पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है आपका PF?
अगर आपने लगातार 5 साल तक नौकरी की है, तो ईपीएफ का पैसा निकालने पर कोई टैक्स नहीं लगता।
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लगातार 5 साल का मतलब: इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपको एक ही कंपनी में 5 साल पूरे करने हैं।
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जॉब बदलने पर ऐसे मिलेगा फायदा: अगर आप नौकरी बदलते हैं और पुरानी कंपनी का पीएफ का पैसा निकालने के बजाय उसे नई कंपनी के पीएफ अकाउंट में ट्रांसफर कर देते हैं, तो आपकी पुरानी नौकरी का समय भी नई नौकरी में जुड़ जाता है। इस तरह 5 साल पूरे होने पर आप टैक्स-फ्री विड्रॉल का फायदा ले सकते हैं।
PF निकालने पर टैक्स कब और कैसे लगता है?
अगर आपकी नौकरी को 5 साल पूरे नहीं हुए हैं, तो आम तौर पर पीएफ का पैसा टैक्सेबल होता है। इसे आसान भाषा में ऐसे समझें:
| नौकरी की अवधि | निकासी की रकम | टीडीएस (TDS) का नियम |
| 5 साल से ज्यादा | कोई भी रकम | कोई टीडीएस नहीं, पैसा पूरी तरह टैक्स-फ्री |
| 5 साल से कम | ₹50,000 से कम | टीडीएस नहीं कटेगा (लेकिन ITR में टैक्स देना पड़ सकता है) |
| 5 साल से कम | ₹50,000 से ज्यादा | पैन कार्ड देने पर 10% टीडीएस (पैन न होने पर ज्यादा कटेगा) |
5 साल से पहले भी इन हालात में नहीं लगता टैक्स
कानून में कुछ ऐसी स्थितियां भी हैं, जब 5 साल से पहले नौकरी छूटने पर भी पीएफ निकालने पर टैक्स नहीं देना पड़ता। ऐसा तब होता है जब नौकरी आपकी मर्जी से नहीं, बल्कि किसी मजबूरी में छूटी हो:
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खराब सेहत या गंभीर बीमारी की वजह से नौकरी छोड़नी पड़े।
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आपकी कंपनी या कारोबार ही हमेशा के लिए बंद हो जाए।
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कोई भी ऐसा कारण जिस पर आपका कंट्रोल न हो और आपकी नौकरी चली जाए।
पीएफ के अलग-अलग हिस्सों पर टैक्स का गणित
अगर आप 5 साल से पहले पीएफ निकालते हैं और वह टैक्सेबल है, तो उस पैसे के अलग-अलग हिस्सों पर अलग तरीके से टैक्स लगता है:
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कंपनी का योगदान और उस पर ब्याज: इसे आपकी 'सैलरी से हुई इनकम' (Income from Salary) माना जाता है।
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आपके योगदान पर मिला ब्याज: इसे 'अन्य स्रोतों से आय' (Income from Other Sources) में गिना जाता है।
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आपका अपना योगदान: अगर आपने पहले इस पर सेक्शन 80C के तहत टैक्स छूट ली थी, तो उस छूट को वापस लिया जा सकता है और टैक्स देना पड़ सकता है।
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₹2.5 लाख से ज्यादा का योगदान: अगर आपने एक साल में ₹2.5 लाख से ज्यादा पीएफ में जमा किया है, तो उस अतिरिक्त रकम पर मिलने वाला ब्याज भी टैक्स के दायरे में आता है।
ज्यादा टीडीएस कट जाए तो रिफंड कैसे लें?
कई बार ऐसा होता है कि पीएफ निकालते वक्त टीडीएस कट जाता है, लेकिन साल के अंत में आपकी कुल इनकम पर टैक्स कम बनता है। ऐसे में आप इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरकर अपना पैसा वापस पा सकते हैं। इसके लिए बस अपना फॉर्म 26AS और एआईएस (AIS) चेक करें और ITR में रिफंड क्लेम कर लें।
EPF स्कीम 2026: फॉर्म 15G/15H की जगह अब नया फॉर्म 121
ईपीएफ के नए नियमों के तहत अब पैसा निकालना और क्लेम सेटल करना काफी आसान हो गया है। अगर आपकी नौकरी को 5 साल नहीं हुए हैं और आप ₹50,000 से ज्यादा निकाल रहे हैं, तो बिना टीडीएस काटे पैसा निकालने के लिए पुराने फॉर्म 15G या 15H की जगह अब फॉर्म 121 भरना होगा। प्रक्रिया भले ही आसान हो गई हो, लेकिन पैसा टैक्स-फ्री होगा या नहीं, इसकी सबसे बड़ी शर्त अभी भी '5 साल की लगातार नौकरी' ही है।