त्योहारी सीजन से पहले देश में आई आर्थिक बहार, 14.7% की जोरदार उछाल

त्योहारी सीजन से पहले देश में आई आर्थिक बहार, 14.7% की जोरदार उछाल

देश के करोड़ों लोगों के लिए त्योहारी सीजन की शुरुआत से ठीक पहले अर्थव्यवस्था को लेकर एक बेहद उत्साहजनक और राहत भरी खबर सामने आई है जिसे सुनकर हर कोई हैरान है कि कैसे त्योहारी रौनक ने देश के राजकोष को मालामाल कर दिया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किए गए ताजा आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार सितंबर महीने में सकल वस्तु एवं सेवा कर यानी ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन में सालाना आधार पर पूरे 14.7 फीसदी की शानदार और जबरदस्त तेजी दर्ज की गई है जिसके बाद यह आंकड़ा सीधे छलांग लगाते हुए लगभग 2.04 लाख करोड़ यानी 2,03,521 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर पर जा पहुंचा है। अर्थव्यवस्था के जानकारों और बाजार विश्लेषकों का मानना है कि त्योहारी सीजन की आहट और बाजारों में बढ़ी हुई उपभोक्ता मांग के चलते यह उछाल आया है जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि देश का व्यापार और औद्योगिक उत्पादन तेजी से नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

लगातार तीन महीने से दो लाख करोड़ के पार बना हुआ है टैक्स कलेक्शन

भारतीय अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर यह लगातार तीसरा ऐसा मौका है जब ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन ने दो लाख करोड़ रुपये के जादुई और महत्वपूर्ण आंकड़े को पार करने में कामयाबी हासिल की है जो देश की मजबूत होती वित्तीय स्थिति की एक मजबूत गवाही देता है। इस साल सितंबर के महीने में जो कुल टैक्स कलेक्शन हुआ है उसमें घरेलू मोर्चे पर हुई जबरदस्त आय के साथ-साथ विदेशों से होने वाले आयात पर लगने वाले जीएसटी में भी करीब 26 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है। देश के तमाम राज्यों और महानगरों से लेकर छोटे व्यापारिक केंद्रों तक में इन दिनों जिस तरह से त्योहारी खरीद-फरोख्त का माहौल बना हुआ है, उससे कर अधिकारियों और नीति निर्माताओं में भी काफी उत्साह देखा जा रहा है। सरकार के पास राजस्व के रूप में आ रहे इन पैसों का सीधा असर देश के बुनियादी ढांचे, विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं पर पड़ता है, जिससे आम जनता को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़े पैमाने पर लाभ मिलता है।

त्योहारी खरीदारी और आर्थिक गतिविधियों में तेजी से रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा राजस्व

त्योहारों का सीजन शुरू होते ही देश के बाजारों में खरीदारों की भीड़ उमड़ पड़ी है जिसका सीधा और सकारात्मक असर देश के टैक्स कलेक्शन पर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। ऑटोमोबाइल सेक्टर से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स, रियल एस्टेट, कपड़े और एफएमसीजी सेक्टर तक हर जगह उपभोक्ता की मांग में भारी तेजी दर्ज की गई है जिसकी वजह से जीएसटी संग्रह में यह रिकॉर्डतोड़ वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार द्वारा कारोबार को आसान बनाने और कर चोरी रोकने के लिए उठाए गए कड़े डिजिटल कदमों का भी अब धरातल पर बहुत ही बेहतरीन परिणाम देखने को मिल रहा है, जिससे पारदर्शी तरीके से सरकारी खजाना लगातार मजबूत हो रहा है। आर्थिक क्षेत्र के जानकारों का यह भी अनुमान है कि आने वाले त्योहारी महीनों यानी अक्टूबर और नवंबर में बाजारों की यह चमक और अधिक बढ़ सकती है, जिससे जीएसटी संग्रह के पिछले सारे रिकॉर्ड ध्वस्त होने की पूरी उम्मीद है और देश की जीडीपी को भी इससे एक बहुत बड़ा संबल प्राप्त होगा।