सपने का आशियाना मिलने की खुशी में न करें ये लापरवाही: नया फ्लैट टेकओवर (Handover) करते समय इन 7 बातों की जरूर करें जांच, वरना हो सकता है भारी आर्थिक नुकसान
वर्षों की मेहनत, जीवन भर की बचत और होम लोन की ईएमआई (EMI) चुकाने के बाद जब किसी व्यक्ति को अपने नए घर या फ्लैट की चाबी (Possession) मिलती है, तो वह पल बेहद भावुक और खुशी से भरा होता है। लेकिन अक्सर इस खुशी और जल्दबाजी के माहौल में खरीदार (Home Buyers) कुछ ऐसी बड़ी गलतियां कर बैठते हैं, जिनका भारी खामियाजा उन्हें बाद में मानसिक और आर्थिक नुकसान के रूप में भुगतना पड़ता है। बिल्डर या डेवलपर अक्सर पजेशन देते समय कई अधूरी सुविधाओं और कानूनी औपचारिकताओं को छिपाने की कोशिश करते हैं। यदि आप भी अपने नए फ्लैट का पजेशन लेने जा रहे हैं, तो चाबी हाथ में लेने और पजेशन लेटर पर साइन करने से पहले इन महत्वपूर्ण बातों और चेकलिस्ट का विशेष ध्यान रखें।
1. ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट (OC) और पजेशन लेटर की जांच
बिना 'ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट' (OC) और 'पजेशन लेटर' के फ्लैट का पजेशन लेना कानूनन और आर्थिक रूप से सबसे बड़ी गलती मानी जाती है।
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ओसी (Occupancy Certificate): यह स्थानीय नगर निगम या प्राधिकरण द्वारा जारी किया जाने वाला वह दस्तावेज है जो प्रमाणित करता है कि इमारत सुरक्षा मानकों, सीवरेज, बिजली, पानी और स्वीकृत नक्शे के अनुसार पूरी तरह से बनी है। बिना ओसी के किसी भी इमारत में रहना गैर-कानूनी माना जाता है और भविष्य में नगर निगम पानी या बिजली का कनेक्शन काट सकता है।
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सीसी (Completion Certificate): यह सुनिश्चित करें कि प्रोजेक्ट को कंप्लीशन सर्टिफिकेट मिल चुका है।
2. स्नेगिंग (Snagging) या फ्लैट का निरीक्षण करें
पजेशन लेटर पर साइन करने से पहले अपने फ्लैट का कोना-कोना ध्यान से जांचें। इसे रियल एस्टेट की भाषा में 'स्नेगिंग लिस्ट' तैयार करना कहते हैं।
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दीवारों और पेंट की फिनिशिंग: दीवारों में सीलन (Dampness), दरारें या खराब पेंट की जांच करें।
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प्लंबिंग और लीकेज: किचन और बाथरूम के सभी नल, शॉवर, फ्लैश और पाइपलाइन चलाकर देखें कि कहीं से पानी का रिसाव (Leakage) तो नहीं हो रहा या ड्रेनेज में पानी तो नहीं रुक रहा।
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इलेक्ट्रिकल पॉइन्ट्स: घर के सभी स्विच बोर्ड, प्लग पॉइन्ट्स, ट्यूबलाइट और फैन सॉकेट्स को ऑन करके चेक करें कि वायरिंग सही है या नहीं।
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दरवाजे और खिड़कियां: एल्युमिनियम या लकड़ी के दरवाजे व खिड़कियां ठीक से खुल और बंद हो रहे हैं या नहीं और उनके लॉक सही काम कर रहे हैं या नहीं।
3. कार पार्किंग और कॉमन एरिया की सुविधाएं
अक्सर बिल्डर पजेशन देते समय केवल फ्लैट के अंदर का काम दिखाते हैं और कॉमन सुविधाओं को अधूरा छोड़ देते हैं।
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अलॉटेड पार्किंग: अपने पार्किंग स्लॉट की फिजिकल लोकेशन जांच लें कि एग्रीमेंट के अनुसार आपको जो पार्किंग (कवर्ड या ओपन) मिली है, वह सही है या नहीं।
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लिफ्ट और पावर बैकअप: सोसायटी में लिफ्ट का ट्रायल रन हो चुका है या नहीं और लिफ्ट के लिए एआरडी (Automatic Rescue Device) की सुविधा काम कर रही है या नहीं। इसके साथ ही जेनरेटर (Power Backup) की जांच करें।
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क्लब हाउस और एमेनिटीज: जिम, स्विमिंग पूल, पार्क और सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति देख लें। यदि ये अधूरी हैं, तो पजेशन लेटर में इसका लिखित उल्लेख करवाएं।
4. मेंटेनेंस और अतिरिक्त चार्ज (Additional Fees) का हिसाब
बिल्डर द्वारा थमाए गए फाइनल बिल को आंख बंद करके स्वीकार न करें।
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मेंटेनेंस फीस: यह जांचें कि बिल्डर मेंटेनेंस फीस किस तारीख से वसूल रहा है। कायदे से मेंटेनेंस तभी से शुरू होना चाहिए जब आपको ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट के साथ ऑफर ऑफ पजेशन (Offer of Possession) दिया जाए।
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एडवांस मेंटेनेंस: अक्सर बिल्डर 1 से 2 साल का एडवांस मेंटेनेंस मांगते हैं, यह सुनिश्चित करें कि इसका अलग से आरडब्ल्यूए (RWA) या मेंटेनेंस अकाउंट बने।
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जीएसटी और स्टाम्प ड्यूटी: यह जांच लें कि बिल्डर ने जो टैक्स और एक्स्ट्रा चार्ज (जैसे मीटर कनेक्शन शुल्क, आईएफएमएस फंड) मांगे हैं, वे बिल्डर-बायर्स एग्रीमेंट (BBA) के अनुसार ही हों।
5. कारपेट एरिया (Carpet Area) का री-मेजरमेंट
फ्लैट टेकओवर करते समय सबसे बड़ी धोखाधड़ी कारपेट एरिया में देखने को मिलती है। रेरा (RERA) के नियमों के अनुसार बिल्डर को आपको वही कारपेट एरिया देना होता है जिसके लिए आपने भुगतान किया है। पजेशन से पहले किसी आर्किटेक्ट या खुद इंची टेप की मदद से कमरों का क्षेत्रफल नाप लें। यदि कारपेट एरिया स्वीकृत नक्शे से कम निकलता है, तो आप बिल्डर से पैसे वापस मांगने या मुआवजा पाने के हकदार हैं।
6. दस्तावेज (Paperwork) पर जल्दबाजी में साइन न करें
जब तक आप फ्लैट के निर्माण और सुविधाओं से 100% संतुष्ट न हों, तब तक 'No Dues Certificate' या 'Full and Final Possession Sheet' पर साइन न करें। यदि फ्लैट में कोई कमी है, तो उसे 'Punch List' या 'Snag List' पर लिखकर बिल्डर के प्रतिनिधि से साइन करवाएं और उन्हें ठीक करने के लिए समयसीमा (Timeline) तय करें।
7. रेरा (RERA) के तहत बिल्डर की वारंटी (5-Year Defect Liability)
रेरा कानून की धारा 14(3) के तहत पजेशन मिलने के 5 साल तक यदि इमारत या फ्लैट की बनावट में कोई बड़ी खराबी (Structural Defect) आती है या प्लंबिंग/वायरिंग में कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो बिल्डर को उसे बिना कोई अतिरिक्त पैसा लिए 30 दिनों के भीतर मुफ्त में ठीक करना होगा। अपने इस अधिकार को हमेशा याद रखें।