अमेरिका में भारतीय छात्रों और कामगारों की बढ़ी मुश्किलें: वर्क परमिट (EAD) के लिए इंतजार का समय बढ़ा, USCIS में लाखों लंबित आवेदनों से नौकरी पर गहराया संकट
संयुक्त राज्य अमेरिका में अपनी पढ़ाई पूरी कर करियर की शुरुआत करने की योजना बना रहे हजारों भारतीय छात्रों और वहां कार्यरत कुशल विदेशी कामगारों के सामने एक गंभीर प्रशासनिक संकट खड़ा हो गया है। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) के पास वर्क परमिट से संबंधित लंबित आवेदनों (Backlog) की संख्या में अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस भारी बैकलॉग के चलते एम्प्लॉयमेंट ऑथराइजेशन डॉक्यूमेंट यानी ईएडी (EAD Card) और ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) के आवेदनों को प्रोसेस करने में लगने वाला समय कई हफ्तों से बढ़कर कई महीनों तक पहुंच गया है। वर्क परमिट मिलने में हो रही इस अप्रत्याशित देरी के कारण कई भारतीय स्नातकों के जॉब ऑफर्स रद्द होने की नौबत आ गई है, वहीं मौजूदा कर्मचारियों के सामने लीगल वर्क स्टेटस खत्म होने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
USCIS में क्यों बढ़ा आवेदनों का बैकलॉग और प्रोसेसिंग समय?
इमिग्रेशन विशेषज्ञों और आधिकारिक डेटा के अनुसार, वर्क परमिट के लिए भरे जाने वाले फॉर्म I-765 के बैकलॉग में वृद्धि के पीछे कई प्रमुख संरचनात्मक और प्रक्रियात्मक कारण हैं। पिछले कुछ समय में अमेरिका में विभिन्न गैर-आप्रवासी श्रेणियों (जैसे F-1 छात्र, H-4 आश्रित, असाइलम और एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस) के तहत वर्क परमिट आवेदनों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। साथ ही, आव्रजन नियमों में हो रहे लगातार बदलावों और डेटा वेरिफिकेशन के कड़े मानकों के कारण प्रत्येक आवेदन की जांच में अधिक समय लग रहा है। कई सर्विस सेंटर्स पर तकनीकी और प्रशासनिक स्टाफ की कमी के चलते फाइलों का ढेर लग गया है, जिससे जहां पहले सामान्य ऑनलाइन आवेदन 2 से 3 महीनों में स्वीकृत हो जाते थे, वहीं अब उनमें 5 से 8 महीने या उससे भी अधिक का समय लग रहा है।
भारतीय छात्रों पर सबसे गंभीर असर: जॉब ऑफर्स और 90 दिनों की बेरोजगारी घड़ी
इस देरी की सबसे बड़ी मार अमेरिका में उच्च शिक्षा पूरी करने वाले भारतीय छात्रों पर पड़ रही है। एफ-1 वीजा नियमों के तहत छात्र अपनी डिग्री पूरी करने के बाद 12 महीने के पोस्ट-कंपलीशन ओपीटी (OPT) या 24 महीने के स्टेम ओपीटी एक्सटेंशन (STEM OPT) के जरिए अमेरिका में नौकरी करने के पात्र होते हैं। अमेरिकी आव्रजन कानून के तहत कोई भी छात्र तब तक कानूनी रूप से काम शुरू नहीं कर सकता जब तक कि उसके हाथ में फिजिकल ईएडी कार्ड न आ जाए।
देरी के कारण छात्रों को निम्नलिखित गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है:
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नौकरी के अवसरों का निरस्त होना: अमेरिकी कंपनियां जॉइनिंग डेट में लंबे समय तक इंतजार करने के बजाय कई बार भारतीय छात्रों के नौकरी के ऑफर वापस ले रही हैं।
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90-डे अनएम्प्लॉयमेंट क्लॉक का दबाव: नियम के अनुसार, ओपीटी शुरू होने की तारीख के बाद यदि कोई छात्र 90 दिनों तक बेरोजगार रहता है, तो उसका एफ-1 स्टेटस स्वतः समाप्त हो जाता है। ईएडी कार्ड में देरी होने से छात्रों के पास नौकरी ढूंढने और जॉइन करने के लिए बहुत कम समय बचता है।
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वित्तीय दबाव और एजुकेशन लोन: लाखों रुपये का एजुकेशन लोन लेकर पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए नौकरी शुरू न हो पाने से मासिक किस्त (EMI) चुकाना और अमेरिका में रहने का खर्च उठाना भारी मानसिक तनाव का कारण बन रहा है।
H-4 EAD और अन्य कामगारों के लिए भी बढ़ी अनिश्चितता
वर्क परमिट की देरी केवल छात्रों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि एच-1बी (H-1B) वीजा धारकों के जीवनसाथी (H-4 EAD) और ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया (Adjustment of Status - Form I-485) में लगे प्रोफेशनल्स के लिए भी यह बड़ी बाधा बन गई है। कई कंपनियों में कार्यरत भारतीय पेशेवर अपने ईएडी कार्ड के समय पर रिन्यू न होने के कारण नौकरी से अस्थायी छुट्टी (Leave Without Pay) पर जाने या रोजगार गंवाने के लिए मजबूर हो रहे हैं। यद्यपि यूएससीआईएस ने कुछ श्रेणियों के लिए स्वचालित एक्सटेंशन के प्रावधान किए हैं, फिर भी औपचारिक कार्ड जारी न होने से तकनीकी अड़चनें बनी हुई हैं।
विलंब से बचने के लिए छात्रों और कामगारों के लिए जरूरी कानूनी विकल्प
इमिग्रेशन वकीलों और यूनिवर्सिटीज के इंटरनेशनल स्टूडेंट ऑफिस (DSO) ने प्रभावित आवेदकों को कई रणनीतिक कदम उठाने की सलाह दी है:
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समय से पहले ऑनलाइन आवेदन (File 90 Days Early): छात्र अपने कोर्स के समाप्त होने की तारीख से 90 दिन पहले ही फॉर्म I-765 दाखिल कर सकते हैं। पेपर फाइलिंग के बजाय 'myUSCIS' पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना हमेशा तेज और अधिक सुरक्षित माना जाता है।
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दस्तावेजों में त्रुटिहीनता: फॉर्म में पासपोर्ट साइज फोटो, सेविस आईडी (SEVIS ID) और आई-20 (I-20) से जुड़ी किसी भी प्रकार की गलती से बचें, क्योंकि रिक्वेस्ट फॉर एविडेंस (RFE) जारी होने पर मामला 2 से 3 महीने और अटक सकता है।
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प्रीमियम प्रोसेसिंग (Premium Processing): कुछ श्रेणियों और एफ-1 ओपीटी आवेदकों के लिए यूएससीआईएस ने निर्धारित अतिरिक्त शुल्क के साथ प्रीमियम प्रोसेसिंग की सुविधा दी है, जिसके तहत 30 दिनों के भीतर आवेदन पर निर्णय लिया जाता है। यदि जॉब जॉइनिंग बेहद नजदीक है, तो यह सबसे व्यावहारिक विकल्प साबित हो सकता है।
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एक्सपीडाइट रिक्वेस्ट (Expedite Request): गंभीर वित्तीय नुकसान (Severe Financial Loss) या मानवीय आपातकाल की स्थिति में आवेदक यूएससीआईएस से अपने केस को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने के लिए त्वरित समीक्षा का अनुरोध कर सकते हैं।
इमिग्रेशन सुधारों और ऑटोमेशन की मांग तेज
अमेरिकी टेक उद्योग और विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों ने बाइडेन-हैरिस प्रशासन और यूएससीआईएस पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है कि वे वर्क परमिट और ग्रीन कार्ड प्रक्रियाओं को डिजिटल ऑटोमेशन और अतिरिक्त फंड आवंटन के जरिए त्वरित बनाएं। भारत से आने वाले अत्यधिक कुशल इंजीनियर, डेटा साइंटिस्ट और शोधकर्ता अमेरिकी अर्थव्यवस्था और नवाचार तंत्र की रीढ़ माने जाते हैं। ऐसे में यदि वर्क परमिट की इस प्रशासनिक देरी को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह न केवल भारतीय प्रतिभाओं के भविष्य को प्रभावित करेगा बल्कि अमेरिकी कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर भी प्रतिकूल असर डालेगा।