Crude Oil Prices: प्री-वॉर लेवल पर गिरा कच्चा तेल, पर पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीदों पर फिरा पानी; जानें वजह

Crude Oil Prices: प्री-वॉर लेवल पर गिरा कच्चा तेल, पर पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीदों पर फिरा पानी; जानें वजह

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई भारी गिरावट से आम जनता को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी थी, लेकिन भू-राजनीतिक हालातों ने इस पर पानी फेर दिया है। वैश्विक स्तर पर कच्चा तेल गिरकर प्री-वॉर लेवल (युद्ध से पहले के स्तर) यानी 70 से 72 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil) 2.31 डॉलर की बड़ी गिरावट के साथ 72.95 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है, वहीं डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड भी 70.24 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है। तेल की कीमतों में आई इस मंदी के बाद भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम घटने की जो अटकलें लगाई जा रही थीं, वे अब संकट में पड़ती नजर आ रही हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच भीषण जंग: 24 घंटे में दूसरी बार बड़ा हमला

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का फायदा उपभोक्ताओं को मिलने ही वाला था कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव ने सब कुछ बदल दिया। दोनों देशों के बीच 17 जून को हुआ अंतरिम युद्धविराम समझौता पूरी तरह से टूटता नजर आ रहा है। युद्धविराम के दावों के बावजूद पिछले 24 घंटे में अमेरिका ने दूसरी बार ईरान के ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। दोनों ओर से एक-दूसरे पर लगातार मिसाइलें दागी जा रही हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने ईरान समर्थित ठिकानों पर कई सटीक मिसाइल हमले किए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए साफ कहा है कि यदि ईरान ने युद्धविराम का उल्लंघन बंद नहीं किया, तो अमेरिका की ओर से ये सैन्य हमले आगे भी जारी रहेंगे।

ईरान ने 'एवर लवली' तेल टैंकर को बनाया निशाना, 20 लाख बैरल क्रूड दांव पर

इस ताजा विवाद की शुरुआत तब हुई जब ईरान ने शनिवार को एकतरफा कार्रवाई करते हुए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण जलडमरू मध्य 'स्ट्रैट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) के पास ड्रोन से कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाना शुरू किया। ईरान ने 'एवी एवर लवली' (AV Ever Lovely) नाम के एक विशालकाय तेल टैंकर पर ड्रोन हमला किया, जिस पर 20 लाख बैरल से भी अधिक कच्चा तेल लदा हुआ था। इस दुस्साहस के बाद ही अमेरिकी सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान पर ताबड़तोड़ हमले किए, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में युद्ध की स्थिति दोबारा गंभीर हो गई है।

क्या फिर भड़केंगी तेल की कीमतें? होर्मुज की नाकेबंदी का खतरा बढ़ा

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े इस ताजा सैन्य टकराव का सीधा असर आने वाले दिनों में कच्चे तेल की सप्लाई चेन पर पड़ना तय माना जा रहा है। अमेरिकी जवाबी हमलों से बौखलाया ईरान एक बार फिर दुनिया के सबसे व्यस्त तेल मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' की पूर्ण नाकेबंदी कर सकता है। समुद्र में तेल टैंकरों पर लगातार हो रहे हमलों के डर से बड़ी ग्लोबल शिपिंग कंपनियों ने इस रूट से अपने जहाजों को हटाना शुरू कर दिया है। अगर होर्मुज रूट लंबे समय तक बाधित रहता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई रुक जाएगी, जिससे तेल के दाम एक बार फिर आसमान छू सकते हैं।

भारतीय उपभोक्ताओं पर क्या असर होगा? थम सकती है राहत की उम्मीद

भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में होने वाली किसी भी हलचल का सीधा असर यहां की घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। क्रूड ऑयल के 70 डॉलर के स्तर पर आने से भारतीय तेल कंपनियों के पास पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 2 से 3 रुपये प्रति लीटर तक की कटौती करने का अच्छा मौका था। हालांकि, खाड़ी देशों में नए सिरे से शुरू हुए इस तनाव और सप्लाई बंद होने के डर से कच्चे तेल के दाम दोबारा बढ़ सकते हैं। ऐसे में भारतीय बाजार में तेल के दाम घटने की उम्मीदें लगभग खत्म होती दिख रही हैं और आने वाले दिनों में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।

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