Credit Card Myths: क्रेडिट कार्ड से जुड़े ये 5 बड़े 'मिथ' खाली कर सकते हैं आपकी जेब, सच मानकर किया इस्तेमाल तो फायदे की जगह होगा भारी नुकसान

Credit Card Myths: क्रेडिट कार्ड से जुड़े ये 5 बड़े 'मिथ' खाली कर सकते हैं आपकी जेब, सच मानकर किया इस्तेमाल तो फायदे की जगह होगा भारी नुकसान

डिजिटल पेमेंट और कैशलेस इकोनॉमी के दौर में क्रेडिट कार्ड शहरी और अर्ध-शहरी जीवनशैली का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। सही तरीके से इस्तेमाल करने पर यह 45 से 50 दिनों का ब्याज-मुक्त लोन, रिवॉर्ड पॉइंट्स, कैशबैक और एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस जैसी शानदार सुविधाएं देता है। लेकिन इसके विपरीत, क्रेडिट कार्ड से जुड़ी अधूरी जानकारी और सोशल मीडिया पर फैले भ्रम (Myths) कई बार उपभोक्ताओं को गंभीर वित्तीय संकट में धकेल देते हैं। मेट्रो शहरों से लेकर टियर-2 और टियर-3 शहरों तक, लाखों नए कार्डधारक इन मिथकों को सच मानकर ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे उनकी मेहनत की कमाई भारी ब्याज, पेनल्टी और गिरते सिबिल स्कोर की भेंट चढ़ जाती है।

मिथ 1: सिर्फ 'मिनिमम ड्यू' भरने से नहीं लगता कोई अतिरिक्त चार्ज

यह क्रेडिट कार्ड की दुनिया का सबसे खतरनाक और आम भ्रम है। अधिकांश लोग मानते हैं कि अगर उन्होंने बिल में दिख रही 'मिनिमम अमाउंट ड्यू' (MAD) की रकम चुका दी, तो उन पर कोई ब्याज नहीं लगेगा।

  • सच्चाई: मिनिमम ड्यू भरने से आप सिर्फ लेट पेमेंट फीस (Late Payment Fee) से बचते हैं, लेकिन बाकी बची हुई राशि पर बैंक 36% से 42% सालाना (3% से 3.5% प्रति माह) की दर से भारी ब्याज वसूलते हैं। इतना ही नहीं, जब तक पुराना बकाया पूरा नहीं चुकता, तब तक आपके नए ट्रांजैक्शंस पर मिलने वाला इंटरेस्ट-फ्री पीरियड भी पूरी तरह खत्म हो जाता है।

मिथ 2: क्रेडिट लिमिट का पूरा इस्तेमाल करने से सिबिल स्कोर तेजी से बढ़ता है

कुछ यूजर्स यह सोचते हैं कि जितनी ज्यादा लिमिट वे खर्च करेंगे, बैंक उन्हें उतना ही भरोसेमंद ग्राहक मानकर क्रेडिट स्कोर बढ़ा देगा।

  • सच्चाई: क्रेडिट इंफॉर्मेशन ब्यूरो (CIBIL) के अनुसार, आपकी क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो (CUR) 30% के भीतर होनी चाहिए। यदि आपकी कार्ड लिमिट ₹1 लाख है और आप हर महीने ₹70,000 से ₹80,000 स्वाइप कर रहे हैं, तो क्रेडिट एजेंसियां आपको 'क्रेडिट-हंग्री' (कर्ज पर निर्भर) मानती हैं, जिससे आपका क्रेडिट स्कोर तेजी से नीचे गिर सकता है।

मिथ 3: एटीएम से क्रेडिट कार्ड कैश निकालने पर भी 45 दिन का फ्री टाइम मिलता है

इमरजेंसी में कई लोग क्रेडिट कार्ड को डेबिट कार्ड की तरह एटीएम में डालकर नकदी (Cash Advance) निकाल लेते हैं, यह सोचकर कि इसका बिल भी 45 दिन बाद ही भरना होगा।

  • सच्चाई: क्रेडिट कार्ड से कैश निकालते ही पहले दिन और पहले मिनट से ब्याज लगना शुरू हो जाता है। इसके अलावा बैंक ₹300 से लेकर ₹500 या निकाली गई रकम का 2.5% से 3% तक 'कैश एडवांस ट्रांजैक्शन फीस' तुरंत जोड़ देते हैं। एटीएम से क्रेडिट कार्ड कैश निकालना सबसे महंगा वित्तीय सौदा साबित होता है।

मिथ 4: पुराना या अनयूज्ड क्रेडिट कार्ड बंद करने से क्रेडिट स्कोर सुधरता है

कई लोग पर्स हल्का करने या झंझट से बचने के लिए पुराने, बिना इस्तेमाल वाले क्रेडिट कार्ड को तुरंत बंद (Cancel) करा देते हैं।

  • सच्चाई: पुराना क्रेडिट कार्ड बंद करने से आपकी 'क्रेडिट हिस्ट्री की उम्र' (Average Credit Age) कम हो जाती है और आपकी कुल उपलब्ध क्रेडिट लिमिट भी घट जाती है। लिमिट घटने से आपका ओवरऑल यूटिलाइजेशन प्रतिशत अपने आप बढ़ जाता है, जिसका नकारात्मक असर आपके सिबिल स्कोर पर पड़ता है। यदि कार्ड पर कोई भारी वार्षिक शुल्क नहीं है, तो उसे एक्टिव रखना ही बेहतर माना जाता है।

मिथ 5: क्रेडिट कार्ड नहीं रखने से वित्तीय प्रोफाइल हमेशा सुरक्षित रहती है

कुछ लोग कर्ज के डर से कभी क्रेडिट कार्ड नहीं बनवाते और मानते हैं कि बिना किसी क्रेडिट कार्ड के उनका वित्तीय रिकॉर्ड बिल्कुल साफ-सुथरा रहेगा।

  • सच्चाई: बिना किसी क्रेडिट कार्ड या लोन के आपका कोई क्रेडिट इतिहास (Credit History) नहीं बनता। जब आप भविष्य में होम लोन या कार लोन के लिए आवेदन करेंगे, तो बैंकों के पास आपकी रीपेमेंट क्षमता जांचने का कोई ट्रैक रिकॉर्ड नहीं होगा। बिना क्रेडिट हिस्ट्री के बड़े लोन अप्रूव कराना बेहद मुश्किल हो जाता है।

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