ड्राइविंग लाइसेंस में पता और मोबाइल बदलना होगा बिल्कुल मुफ्त: टेस्ट से ऑनलाइन प्रक्रिया तक 9 बड़े बदलावों का ड्राफ्ट तैयार
देश भर के करोड़ों वाहन चालकों और नए लाइसेंस आवेदकों के लिए एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (RTO) के बार-बार चक्कर काटने, कतारों में घंटों खड़े रहने और छोटी-छोटी जानकारियों को बदलने के लिए जेब ढीली करने के दिन अब लदने वाले हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स (CMVR) में ऐतिहासिक संशोधन करने के लिए एक विस्तृत ड्राफ्ट नोटिफिकेशन तैयार किया है। इस नए प्रस्ताव का मुख्य फोकस ड्राइविंग लाइसेंस (DL) और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) से जुड़ी प्रक्रियाओं को पूरी तरह फेसलेस, पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल बनाना है। इस ड्राफ्ट में आम जनता की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए 9 बड़े और क्रांतिकारी बदलावों का खाका खींचा गया है, जो सीधे तौर पर आम आदमी के समय और पैसे दोनों की बचत करेंगे।
1. ड्राइविंग लाइसेंस में पता बदलना होगा पूरी तरह फ्री
वर्तमान व्यवस्था के तहत जब भी कोई व्यक्ति नौकरी, शादी या मकान बदलने के चलते अपने डीएल में नया पता (Address Change) दर्ज कराता है, तो उसे ₹200 से ₹500 तक का सरकारी शुल्क और हैंडलिंग चार्ज चुकाना पड़ता है। नए नियमों के ड्राफ्ट में इस फीस को पूरी तरह समाप्त कर शून्य (Zero Fee) करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसका मतलब है कि अब राज्य के भीतर या एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने पर चालक बिना किसी आर्थिक बोझ के पोर्टल पर जाकर अपना पता निःशुल्क अपडेट कर सकेंगे।
2. मोबाइल नंबर अपडेट के लिए भी नहीं लगेगा कोई शुल्क
ट्रैफिक ई-चालान, इमरजेंसी अलर्ट और आरटीओ के सभी डिजिटल नोटिफिकेशन्स सीधे रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आते हैं। कई बार पुराना नंबर बंद होने पर लोग फीस और झंझट के डर से इसे अपडेट नहीं कराते थे। नए नियमों में मोबाइल नंबर को ऑनलाइन अपडेट करने की पूरी प्रक्रिया को शत-प्रतिशत मुफ्त और ओटीपी (OTP) आधारित बना दिया गया है। इससे वाहन चालकों को चालान कटने या फिटनेस रिन्यूअल की जानकारी रियल-टाइम में मिलती रहेगी।
3. मान्यता प्राप्त प्राइवेट ट्रेनिंग सेंटर्स (ADTC) में ड्राइविंग टेस्ट
अब तक ड्राइविंग टेस्ट देने के लिए सरकारी आरटीओ के ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रैक पर ही जाना अनिवार्य होता था, जहां महीनों लंबी वेटिंग लिस्ट मिलती थी। नए नियमों के तहत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त एक्रेडिटेड ड्राइवर ट्रेनिंग सेंटर्स (ADTC) को ड्राइविंग टेस्ट लेने का अधिकार दिया जा रहा है। जो अभ्यर्थी इन सरकारी मान्यता प्राप्त सेंटर्स से ट्रेनिंग पूरी कर योग्यता प्रमाण पत्र (Certificate) हासिल करेंगे, उन्हें आरटीओ में दोबारा अलग से प्रैक्टिकल ड्राइविंग टेस्ट देने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
4. आधार वेरिफिकेशन से ऑनलाइन बदलेगी फोटो और सिग्नेचर
पुराने लाइसेंस में अक्सर 10-15 साल पुरानी धुंधली तस्वीर छपी रहती है, जिसे बदलवाने के लिए बायोमेट्रिक देने आरटीओ दफ्तर जाना पड़ता था। प्रस्तावित नियमों के तहत आधार ऑथेंटिकेशन और लाइव फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक के जरिए आवेदक घर बैठे अपने ड्राइविंग लाइसेंस पर नवीनतम फोटो और डिजिटल हस्ताक्षर ऑनलाइन अपडेट कर सकेंगे।
5. लर्नर लाइसेंस के लिए घर बैठे ऑनलाइन टेस्ट की सुविधा
नए लाइसेंस की शुरुआत लर्नर लाइसेंस (LL) से होती है। अब आवेदकों को कंप्यूटर टेस्ट देने के लिए आरटीओ जाने की अनिवार्यता खत्म की जा रही है। आवेदक अपने घर से ही लैपटॉप या स्मार्टफोन के फ्रंट कैमरे के जरिए फेस-ऑथेंटिकेशन देकर ऑनलाइन ट्रैफिक रूल्स का टेस्ट दे सकेंगे और पास होते ही तुरंत डिजिटल लर्नर लाइसेंस डाउनलोड कर सकेंगे।
6. डिजिलॉकर और एम-परिवहन में रियल-टाइम डिजिटल डिलीवरी
यदि आप अपने लाइसेंस में कोई भी संशोधन (जैसे पता, नाम में सुधार या ब्लड ग्रुप) कराते हैं, तो उसकी डिजिटल कॉपी उसी दिन डिजिलॉकर और एम-परिवहन (mParivahan) ऐप पर तुरंत अपडेट हो जाएगी। ट्रैफिक पुलिस की चेकिंग के दौरान यह डिजिटल दस्तावेज मूल लाइसेंस की तरह पूरी तरह कानूनी रूप से मान्य होगा। केवल उन लोगों को फिजिकल प्रिंटिंग का न्यूनतम शुल्क देना होगा जो घर पर प्लास्टिक स्मार्ट कार्ड मंगाना चाहते हैं।
7. पेंडिंग ई-चालान और 45 दिन का सख्त क्लोजर नियम
प्रस्तावित सुधारों में केवल सुविधाएं ही नहीं, बल्कि सड़क अनुशासन को लेकर भी सख्ती बढ़ाई गई है। अगर किसी वाहन या चालक के नाम पर 5 से ज्यादा ई-चालान पेंडिंग हैं या चालान कटने के 45 दिनों के भीतर उसका भुगतान नहीं किया गया है, तो वाहन पोर्टल पर उस लाइसेंस और आरसी की सेवाएं अस्थायी तौर पर ब्लॉक हो सकती हैं। यानी बिना लंबित चालान क्लियर किए पता बदलने या आरसी ट्रांसफर जैसी सेवाओं का लाभ नहीं मिल सकेगा।
8. मेडिकल सर्टिफिकेट (Form 1A) की प्रक्रिया हुई पूरी तरह डिजिटल
40 वर्ष से अधिक उम्र के चालकों या कमर्शियल लाइसेंस होल्डर्स के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट (Form 1A) अनिवार्य होता है। अब फर्जी डॉक्टरों के मुहर वाले कागजों पर रोक लगाने के लिए रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर सीधे सारथी पोर्टल पर डिजिटल हस्ताक्षर के साथ मेडिकल सर्टिफिकेट अपलोड करेंगे, जिससे कागजी दस्तावेजों को स्कैन करके लगाने की जरूरत खत्म हो जाएगी।
9. दलाल मुक्त और पारदर्शी फेसलेस आरटीओ सिस्टम
इन सभी 9 बदलावों का मुख्य उद्देश्य आरटीओ दफ्तरों से दलालों और एजेंटों के सिंडिकेट को पूरी तरह उखाड़ फेंकना है। 90 फीसदी से ज्यादा सेवाएं ऑनलाइन और फेसलेस हो जाने से न तो नागरिकों को किसी बिचौलिए को रिश्वत देनी पड़ेगी और न ही फाइलों के रुकने का डर रहेगा। मंत्रालय ने इस ड्राफ्ट नोटिफिकेशन पर सभी संबंधित पक्षों और आम जनता से सुझाव व आपत्तियां मांगी हैं, जिसके बाद इसे पूरे देश में एक साथ कानूनी रूप से लागू कर दिया जाएगा।