कैब और ऑटो यात्रियों को बड़ी राहत! बुकिंग से पहले टिप मांगने पर सरकार की सख्त रोक, जारी हुए नए निर्देश
देश भर में ऑनलाइन कैब और ऑटो सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। अक्सर देखा जाता था कि जब भी यात्री राइड बुक करने के लिए ऐप खोलते थे, तो यात्रा शुरू होने से पहले ही ड्राइवरों द्वारा टिप (बख्शीश) की मांग या एडवांस टिप का विकल्प सामने आ जाता था, जिससे कई यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ता था। इस मनमानी और अतिरिक्त आर्थिक दबाव पर लगाम कसने के लिए अब सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। केंद्र सरकार और संबंधित परिवहन विभागों ने एग्रीगेटर कंपनियों और ड्राइवरों के लिए सख्त निर्देश जारी करते हुए बुकिंग से पहले किसी भी प्रकार की टिप मांगने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।
क्या थी यात्रियों की मुख्य समस्या और क्यों उठी यह मांग
पिछले कुछ समय से लगातार यह शिकायतें मिल रही थीं कि ओला, उबर, रैपिड और अन्य कैब-ऑटो एग्रीगेटर ऐप्स पर राइड बुक करते समय राइडर से अनिवार्य रूप से या राइड कंफर्म होने से पहले ही टिप देने का दबाव बनाया जा रहा था। कई बार तो टिप न देने पर ड्राइवरों द्वारा राइड कैंसिल कर दी जाती थी या ग्राहकों के साथ दुर्व्यवहार किया जाता था। यात्रियों का कहना था कि टिप हमेशा सेवा से खुश होकर स्वेच्छा से दी जाने वाली राशि होनी चाहिए, न कि बुकिंग का कोई अनिवार्य हिस्सा या छिपा हुआ शुल्क। इन लगातार बढ़ती शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय और परिवहन प्राधिकरण ने इस मामले पर संज्ञान लिया और कंपनियों को अपने यूजर इंटरफेस में बदलाव करने के निर्देश दिए।
सरकार के नए निर्देश और एग्रीगेटर कंपनियों के लिए कड़े नियम
सरकार द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब कोई भी कैब या ऑटो बुकिंग ऐप राइड कंफर्म होने से पहले यात्रियों से टिप का विकल्प या राशि नहीं मांग सकेगा। टिप का यह विकल्प केवल यात्रा पूरी होने और भुगतान के समय ही स्क्रीन पर दिखाई देना चाहिए, वह भी पूरी तरह से स्वैच्छिक (Optional) रूप में। यदि कोई ड्राइवर सवारी स्वीकार करने से पहले या बीच सफर में अतिरिक्त टिप की मांग करता है, तो यात्री इसकी सीधी शिकायत कंपनी के पोर्टल पर दर्ज करा सकते हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों और ड्राइवरों के खिलाफ भारी जुर्माने और लाइसेंस रद्द करने जैसी सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
यात्रियों को मिलेंगे पारदर्शी और निष्पक्ष किराए के विकल्प
इस नए फैसले से न केवल यात्रियों को मानसिक और आर्थिक राहत मिलेगी, बल्कि राइड बुकिंग की प्रक्रिया भी पूरी तरह पारदर्शी बनेगी। अब यात्रियों को वही किराया देना होगा जो ऐप पर राइड बुक करते समय तय हुआ था, और किसी भी प्रकार के अतिरिक्त दबाव से उन्हें मुक्ति मिल जाएगी। सरकार के इस कदम का देश भर के दैनिक यात्रियों और ऑफिस जाने वाले लोगों ने दिल से स्वागत किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सख्त नियमों से राइड-शेयरिंग प्लेटफॉर्म्स पर ग्राहकों का भरोसा और अधिक मजबूत होगा तथा सेवा की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिलेगा।