Belated ITR Filing Rules: 31 अगस्त की डेडलाइन चूक गए तो न हों परेशान! ₹1000 से ₹5000 के जुर्माने के साथ 31 दिसंबर तक भरें रिटर्न, समझें रिफंड और ब्याज़ का पूरा गणित
आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की नियत तिथि (ड्यू डेट) निकल जाने के बाद अक्सर करदाताओं में भारी असमंजस और डर का माहौल बन जाता है। यदि किसी कारणवश आप तय समयसीमा तक अपना रिटर्न दाखिल नहीं कर पाए हैं, तो आपको परेशान होने की कतई आवश्यकता नहीं है। आयकर कानून के तहत करदाताओं को वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले अपना रिटर्न दाखिल करने का एक और वैधानिक अवसर मिलता है, जिसे बिलेटेड रिटर्न (Belated Return) कहा जाता है।
आयकर अधिनियम की धारा 139(4) के तहत आप विलंबित रिटर्न दाखिल करके अपना रिफंड क्लेम कर सकते हैं और कानूनी नोटिस या भारी पेनाल्टी से बच सकते हैं। हालांकि, देरी से रिटर्न भरने पर कुछ वित्तीय जुर्माने और शर्तों का सामना करना पड़ता है।
31 दिसंबर 2026: बिलेटेड रिटर्न फाइल करने की अंतिम समय-सीमा
यदि आपने नियमित डेडलाइन मिस कर दी है, तो आयकर अधिनियम की धारा 139(4) के तहत आप 31 दिसंबर 2026 तक अपना बिलेटेड रिटर्न ऑनलाइन दाखिल कर सकते हैं।
31 दिसंबर के बाद सामान्य बिलेटेड रिटर्न भरने का विकल्प पूरी तरह समाप्त हो जाता है। इसके बाद करदाता के पास केवल अपडेटेड रिटर्न (ITR-U) दाखिल करने का रास्ता बचता है, जिसमें 25% से 50% तक अतिरिक्त टैक्स पेनल्टी चुकानी होती है और उसमें कोई नया रिफंड या घाटा (Loss) क्लेम नहीं किया जा सकता। इसलिए 31 दिसंबर से पहले फॉर्म सबमिट करना बेहद आवश्यक है।
धारा 234F के तहत लेट फीस: किसको लगेगा कितना जुर्माना?
नियत तिथि बीत जाने के बाद रिटर्न दाखिल करने पर आयकर विभाग द्वारा धारा 234F के तहत लेट फाइलिंग फीस (Late Fee) अनिवार्य रूप से लगाई जाती है:
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₹5 लाख से अधिक की कर-योग्य आय पर: यदि आपकी कुल कर-योग्य वार्षिक आय (Total Taxable Income) ₹5 लाख से अधिक है, तो आपको ₹5,000 की लेट फीस भरनी होगी।
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₹5 लाख तक की आय वाले करदाताओं के लिए: यदि आपकी शुद्ध कर-योग्य आय ₹5 लाख या उससे कम है, तो राहत देते हुए लेट फीस को मात्र ₹1,000 तक सीमित रखा गया है।
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बेसिक छूट सीमा से कम आय (शून्य पेनल्टी): यदि आपकी कुल सकल आय बुनियादी कर छूट सीमा (Basic Exemption Limit—पुरानी कर व्यवस्था में ₹2.5 लाख और नई कर व्यवस्था में ₹3 लाख) से कम है और आप केवल टीडीएस रिफंड या पासपोर्ट/वीजा रिकॉर्ड के लिए निल (Nil) रिटर्न भर रहे हैं, तो आपके ऊपर शून्य (₹0) लेट फीस लागू होगी।
धारा 234A: बकाया टैक्स पर 1% प्रतिमाह का ब्याज
यदि आपकी ओर कोई शुद्ध टैक्स देनदारी (Net Tax Payable) शेष रह गई है, तो ड्यू डेट के ठीक अगले दिन से वास्तविक रिटर्न दाखिल करने की तारीख तक हर महीने 1% साधारण ब्याज (Simple Interest) की दर से पेनल्टी जुड़ेगी।
महीने के किसी भी आंशिक हिस्से (चाहे 2 दिन की ही देरी क्यों न हो) को पूरे महीने के रूप में गिना जाएगा। हालांकि, यदि आपका सारा टैक्स एडवांस टैक्स, सेल्फ-असेसमेंट टैक्स या टीडीएस/टीसीएस के जरिए पहले ही 100% कट चुका है और विभाग की कोई बकाया देनदारी नहीं है, तो धारा 234A के तहत कोई अतिरिक्त ब्याज नहीं लगेगा।
क्या लेट रिटर्न भरने पर टीडीएस (TDS) रिफंड अटक जाएगा?
करदाताओं के बीच यह सबसे बड़ा भ्रम रहता है कि देरी से रिटर्न भरने पर कटा हुआ रिफंड रुक जाता है। स्थिति इसके बिल्कुल उलट है:
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रिफंड क्लेम का पूरा अधिकार: बिलेटेड रिटर्न में भी आप अपने बैंक एफडी, वेतन या प्रोफेशन से कटे अतिरिक्त टीडीएस का पूरा रिफंड क्लेम कर सकते हैं। विभाग जांच के बाद पूरा पैसा आपके खाते में भेजेगा।
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धारा 244A के ब्याज का नुकसान: समय पर रिटर्न दाखिल करने पर 1 अप्रैल से रिफंड जारी होने तक 0.5% मासिक ब्याज मिलता है। लेकिन बिलेटेड रिटर्न में ब्याज की गणना 1 अप्रैल के बजाय आपके रिटर्न दाखिल करने की वास्तविक तारीख से की जाती है, जिससे कुछ महीनों के ब्याज का नुकसान उठाना पड़ता है।
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ई-सत्यापन (e-Verification) की अनिवार्यता: फॉर्म सबमिट करने के बाद 30 दिनों के भीतर आधार ओटीपी या नेट बैंकिंग से ई-वेरिफाई अवश्य करें; बिना सत्यापन के रिफंड प्रक्रिया शुरू नहीं होती।
घाटे को कैरी फॉरवर्ड (Carry Forward of Losses) करने का नुकसान
बिलेटेड रिटर्न दाखिल करने का सबसे बड़ा वित्तीय नुकसान निवेशकों और कारोबारियों को होता है। आयकर अधिनियम की धारा 80 के अनुसार, यदि आप समय पर रिटर्न नहीं भरते हैं, तो आप चालू वर्ष में हुए शेयर बाजार के नुकसान (Short-term / Long-term Capital Loss), वायदा-कारोबार (F&O Loss), या गैर-सट्टेबाजी व्यावसायिक घाटे को आगामी 8 वर्षों के मुनाफे से एडजस्ट (Set-off) करने के लिए आगे नहीं ले जा सकते।
अपवाद: केवल मकान संपत्ति से नुकसान (Loss from House Property) को ही बिलेटेड रिटर्न में भी अगले वर्षों के लिए कैरी फॉरवर्ड करने की कानूनी छूट प्राप्त है।
घर बैठे ऐसे दाखिल करें बिलेटेड ITR
विलंबित रिटर्न फाइल करने के लिए आपको किसी दफ्तर के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है:
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आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल (eportal.incometax.gov.in) पर पैन और पासवर्ड से लॉगिन करें।
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e-File > Income Tax Returns > File Income Tax Return विकल्प पर क्लिक करें।
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संबंधित असेसमेंट ईयर (AY 2026-27) और ऑनलाइन मोड का चयन करें।
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'Filing Type' के अंतर्गत ड्रॉपडाउन मेन्यू में "Section 139(4) - Belated Return" को चुनें।
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अपनी आय और कटौतियों (Deductions) का विवरण भरें। यदि कोई लेट फीस या बकाया टैक्स बनता है, तो ई-पे टैक्स (e-Pay Tax) चालान के जरिए भुगतान करें और अंत में रिटर्न को ई-वेरिफाई कर रसीद डाउनलोड करें।