Budget 2026 : म्यूचुअल फंड डिविडेंड पर टैक्स का नया नियम अब पूरा पैसा होगा टैक्स के दायरे में, खत्म हुई बड़ी राहत

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News India Live, Digital Desk : बजट 2026 में म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार के निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण टैक्स बदलाव किया गया है। अब म्यूचुअल फंड से होने वाली डिविडेंड इनकम (Dividend Income) पर टैक्स की गणना के नियमों को और सख्त कर दिया गया है।

 बजट 2026 के प्रस्तावों के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 से म्यूचुअल फंड इकाइयों या शेयरों से मिलने वाली लाभांश (Dividend) आय पर अब कोई भी ब्याज कटौती (Interest Deduction) नहीं मिलेगी।

1. क्या था पुराना नियम? (Old Rule)

अब तक के नियम के अनुसार, यदि किसी निवेशक ने म्यूचुअल फंड या शेयर खरीदने के लिए कर्ज (Loan) लिया था, तो उस कर्ज पर चुकाए गए ब्याज को वह अपनी डिविडेंड इनकम में से घटा सकता था।

सीमा: यह कटौती कुल डिविडेंड आय के अधिकतम 20% तक सीमित थी।

उदाहरण: यदि आपको ₹1,00,000 डिविडेंड मिला और आपने ₹30,000 ब्याज चुकाया, तो आप ₹20,000 (20%) घटाकर केवल ₹80,000 पर टैक्स देते थे।

2. अब क्या बदला? (The Change)

नए बजट में धारा 93(2) (संभावित नए आयकर अधिनियम 2025 के तहत) में संशोधन का प्रस्ताव है:

शून्य कटौती: अब डिविडेंड आय अर्जित करने के लिए लिए गए लोन पर चुकाए गए ब्याज की कोई कटौती नहीं मिलेगी।

पूरी आय पर टैक्स: अब आपको प्राप्त होने वाली पूरी डिविडेंड राशि (Gross Dividend) को आपकी 'अन्य स्रोतों से आय' (Income from Other Sources) में जोड़ा जाएगा और आपके टैक्स स्लैब के अनुसार उस पर टैक्स लगेगा।

3. किन निवेशकों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?

HNI और कॉर्पोरेट ट्रेजरी: वे बड़े निवेशक जो बाजार में निवेश करने के लिए भारी मात्रा में पैसा उधार (Leverage) लेते हैं, उनके लिए निवेश की लागत काफी बढ़ जाएगी।

मार्जिन ट्रेडिंग करने वाले: जो निवेशक ब्रोकर से मार्जिन लेकर डिविडेंड देने वाले शेयर खरीदते हैं, उन्हें अब ब्याज का कोई टैक्स बेनिफिट नहीं मिलेगा।

आम निवेशक: जो अपनी बचत से निवेश करते हैं और लोन नहीं लेते, उन पर इस बदलाव का कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा।

4. बजट 2026 के अन्य महत्वपूर्ण टैक्स बदलाव

बायबैक (Buyback): अब कंपनियों द्वारा शेयरों के बायबैक से होने वाली आय को 'डिविडेंड' के बजाय कैपिटल गेन्स (Capital Gains) के रूप में टैक्स किया जाएगा।

STT में बढ़ोतरी: फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) पर प्रतिभूति लेनदेन कर (STT) की दरों में वृद्धि की गई है, जिससे शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग महंगी हो गई है।

SGB टैक्स: सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) पर टैक्स छूट अब केवल उन्हीं को मिलेगी जिन्होंने इसे सीधे RBI से खरीदा है; सेकेंडरी मार्केट से खरीदने वालों को अब टैक्स देना होगा।