दिल्ली में सांसों पर इमरजेंसी AQI 999 के पार, अब AAP ने BJP से दागे ये 3 सीधे सवाल
News India Live, Digital Desk: देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर 'गैस चैंबर' में तब्दील हो चुकी है. दिवाली के बाद शहर की हवा इतनी ज़हरीली हो गई है कि कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 999 के भी पार चला गया, जो किसी भी मशीन की अधिकतम रीडिंग होती है. यानी असल प्रदूषण इससे भी कहीं ज़्यादा है. दिल्ली के लोग आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ से जूझ रहे हैं. लेकिन इस जानलेवा धुंध के बीच, अब दिल्ली की सियासत में एक नया भूचाल आ गया है. आम आदमी पार्टी (AAP) ने अब सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर पलटवार करते हुए तीन बड़े सवाल दागे हैं.
'डेटा छिपाने' के आरोपों पर AAP का पलटवार
दरअसल, बीजेपी लगातार यह आरोप लगा रही थी कि केजरीवाल सरकार जान-बूझकर प्रदूषण का सही डेटा छिपा रही है. बीजेपी का कहना था कि दिल्ली में लगे कई AQI मॉनिटर अचानक से काम करना बंद कर गए हैं या ऑफ़लाइन हो गए हैं, ताकि प्रदूषण का ভয়ानक स्तर जनता के सामने न आ सके.
बीजेपी के इन आरोपों के जवाब में अब आम आदमी पार्टी ने मोर्चा खोल दिया है. AAP का कहना है कि दिल्ली में प्रदूषण की असली वजह पड़ोसी राज्यों में जल रही पराली है और बीजेपी अपनी नाकामी का ठीकरा दिल्ली सरकार पर फोड़ रही है.
AAP ने BJP से पूछे ये 3 सवाल:
आम आदमी पार्टी ने बीजेपी शासित राज्यों और केंद्र सरकार को घेरते हुए तीन सीधे और तीखे सवाल पूछे हैं:
- हरियाणा और यूपी में पराली क्यों नहीं बुझ रही? AAP ने पूछा है कि जब दिल्ली सरकार प्रदूषण को रोकने के लिए ऑड-ईवन जैसे कदम उठाने को तैयार है, तो हरियाणा और उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकारें अपने यहां किसानों को पराली जलाने से रोकने में क्यों नाकाम हो रही हैं? AAP का आरोप है कि इन राज्यों से आने वाला धुआं ही दिल्ली का दम घोंट रहा है.
- केंद्र सरकार ने 2 साल में क्या किया? AAP का दूसरा सवाल सीधा केंद्र सरकार से है. पार्टी ने पूछा है कि पिछले दो सालों में केंद्र ने पराली की समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए क्या ठोस कदम उठाए हैं? किसानों को पराली न जलाने के बदले में क्या विकल्प दिए गए हैं?
- सिर्फ दिल्ली पर ही सवाल क्यों? पार्टी का तीसरा सवाल यह है कि जब पूरा उत्तर भारत प्रदूषण की चपेट में है, और गाजियाबाद, नोएडा, फरीदाबाद जैसे शहरों का हाल भी दिल्ली जैसा ही बुरा है, तो बीजेपी सिर्फ दिल्ली सरकार को ही क्यों कोस रही है? क्या यह सिर्फ़ राजनीति करने का एक तरीका नहीं है?
इस सियासी तू-तू-मैं-मैं के बीच, दिल्ली की जनता ज़हरीली हवा में सांस लेने को मजबूर है. एक तरफ़ प्रदूषण का जानलेवा संकट है, तो दूसरी तरफ़ उस पर हो रही सियासत. सवाल यह है कि जब तक यह राजनीतिक लड़ाई खत्म होगी, तब तक दिल्ली वालों की सांसों का क्या होगा?