Breast Cancer: कैंसर का इलाज ही काफी नहीं क्यों जरूरी है ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन? जानें वो सच जिसे अनदेखा कर रहे हैं मरीज
News India Live, Digital Desk: भारत में ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन एक कड़वा सच यह भी है कि यहाँ इलाज के दौरान बीमारी को तो खत्म कर दिया जाता है, मगर मरीज की मानसिक स्थिति और उसके शरीर की बनावट को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। हाल ही में आई रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों के आंकड़ों ने एक गंभीर चिंता पैदा कर दी है। भारत में कैंसर के डर से महिलाएं 'मास्टेक्टॉमी' (स्तन हटाने की प्रक्रिया) तो करा लेती हैं, लेकिन 'ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन' (स्तन पुनर्निर्माण) के बारे में या तो उन्हें जानकारी नहीं होती या वे इसे फिजूलखर्ची समझकर छोड़ देती हैं। अब समय आ गया है कि इस सोच को बदला जाए।
कैंसर से जंग जीत ली, लेकिन आत्मविश्वास का क्या? ब्रेस्ट कैंसर के इलाज के दौरान जब शरीर का एक अंग हटा दिया जाता है, तो इसका सीधा असर महिला के मानसिक स्वास्थ्य और आत्मविश्वास पर पड़ता है। कई महिलाएं सर्जरी के बाद डिप्रेशन, हीन भावना और 'बॉडी इमेज' के मुद्दों से जूझती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि कैंसर का इलाज सिर्फ ट्यूमर निकालना नहीं है, बल्कि मरीज को उसकी पुरानी जिंदगी वापस देना है। ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन इसमें सबसे बड़ी भूमिका निभाता है, जो महिला को शारीरिक और मानसिक रूप से दोबारा पूर्ण महसूस कराता है।
भारत में क्यों पीछे रह जाता है रिकंस्ट्रक्शन? ये हैं मुख्य कारण भारत में ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन न होने के पीछे कई सामाजिक और आर्थिक कारण हैं। पहला कारण जागरूकता की कमी है बहुत सी महिलाओं को पता ही नहीं होता कि सर्जरी के साथ ही या बाद में स्तन को दोबारा आकार दिया जा सकता है। दूसरा बड़ा कारण है 'लागत'। कैंसर के इलाज के भारी-भरकम खर्च के बाद लोग रिकंस्ट्रक्शन को एक 'कॉस्मेटिक' या लग्जरी प्रक्रिया मान लेते हैं। इसके अलावा, कई बार सर्जन्स भी केवल कैंसर मुक्त करने पर ध्यान देते हैं और मरीज को रिकंस्ट्रक्शन के विकल्पों के बारे में विस्तार से नहीं समझाते।
प्लास्टिक सर्जरी और ऑन्कोलॉजी का संगम: अब इलाज है मुमकिन मेडिकल साइंस ने अब इतनी तरक्की कर ली है कि कैंसर सर्जरी के दौरान ही प्लास्टिक सर्जरी के जरिए स्तन को प्राकृतिक रूप दिया जा सकता है। इसके लिए सिलिकॉन इम्प्लांट्स या मरीज के अपने शरीर के अन्य हिस्सों (जैसे पेट या पीठ) के टिश्यू का उपयोग किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों को भी ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन को 'कॉस्मेटिक सर्जरी' की जगह 'इलाज का अनिवार्य हिस्सा' मानना चाहिए, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर महिलाएं भी इसका लाभ उठा सकें।