अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए 21 मिलियन अमेरिकी डॉलर की कथित अमेरिकी फंडिंग और इसे ‘रिश्वत योजना’ करार दिए जाने के बाद, भारत में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस फंडिंग को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं और इसकी विस्तृत जांच की मांग की है। वहीं, कांग्रेस ने सरकार से इस मुद्दे पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है, जिससे दशकों से यूएसएआईडी के जरिए भारत में दी गई मदद का पूरा विवरण सामने आ सके।
ट्रंप के आरोप: क्या भारत में अमेरिकी फंडिंग के जरिए हस्तक्षेप हुआ?
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक सार्वजनिक बयान में दावा किया कि अमेरिकी सरकार ने भारत में मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए 21 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 175 करोड़ रुपये) की राशि भेजी। उन्होंने इसे ‘रिश्वत’ करार दिया और सवाल उठाया कि आखिर अमेरिकी करदाताओं के पैसे का उपयोग भारत के चुनाव में क्यों किया गया?
ट्रंप का यह बयान भारतीय राजनीति में एक बड़ा विवाद खड़ा कर चुका है। उनका यह दावा पहली बार नहीं आया है, इससे पहले भी वे भारत में विदेशी फंडिंग को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। लेकिन इस बार उन्होंने इसे स्पष्ट रूप से ‘रिश्वत’ कहकर नया राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया।
BJP ने मामले में जांच की मांग की
ट्रंप के बयान के बाद, BJP ने तुरंत इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया। BJP नेता अमित मालवीय ने अमेरिकी फंडिंग को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि यह पैसा भारत में ‘डीप स्टेट एसेट्स’ को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल किया गया।
उन्होंने X (पहले ट्विटर) पर ट्रंप का वीडियो शेयर करते हुए लिखा:
“डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को 21 मिलियन डॉलर भेजे जाने की बात दोहराई है। इस बार उन्होंने इसे ‘रिश्वत’ भी कहा है। यह पैसा आखिर कहां गया और किस मकसद से इस्तेमाल हुआ, इसकी जांच होनी चाहिए।”
BJP का आरोप है कि इस फंडिंग के जरिए भारत में कुछ छिपे हुए प्रभावशाली समूहों (Deep State Assets) को मजबूत किया गया, जो इस तरह के मुद्दों को उठाने वालों को गुमराह करने का काम करते हैं।
BJP की ओर से इस मामले की गहराई से जांच कराने की मांग की गई है ताकि यह साफ हो सके कि यह पैसा कहां और कैसे खर्च हुआ।
कांग्रेस ने केंद्र सरकार से श्वेत पत्र जारी करने की मांग की
BJP के आरोपों के जवाब में, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया X पर पोस्ट कर सरकार से जवाब देने को कहा। उन्होंने लिखा:
“यूएसएआईडी का नाम इन दिनों काफी चर्चा में है। इसकी स्थापना 3 नवंबर 1961 को हुई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति जो भी दावा कर रहे हैं, वे बेतुके लगते हैं। लेकिन फिर भी, भारत सरकार को तुरंत इस पर एक श्वेत पत्र जारी करना चाहिए जिसमें दशकों से सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों को यूएसएआईडी द्वारा दिए गए समर्थन का पूरा विवरण हो।”
कांग्रेस का मानना है कि यदि भारत को इस तरह की कोई फंडिंग मिली भी है, तो इसकी पारदर्शिता जरूरी है। इसके लिए सरकार को विस्तृत रिपोर्ट जारी करनी चाहिए।
विवाद कैसे शुरू हुआ? डीओजीई की रिपोर्ट से सामने आया मामला
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब अमेरिकी सरकार के कार्यदक्षता विभाग (Department of Government Efficiency – DOGE) ने अमेरिकी करदाताओं की फंडिंग से चलने वाली पहलों की एक सूची जारी की।
इस सूची में ‘भारत में मतदान प्रक्रिया को मजबूत करने’ के लिए 21 मिलियन अमेरिकी डॉलर का उल्लेख था।
डीओजीई ने की फंडिंग में कटौती
एलन मस्क के DOGE विभाग ने 16 फरवरी को यह फंडिंग रद्द कर दी। X पर एक पोस्ट में, डीओजीई ने उन अमेरिकी करदाताओं के पैसों की सूची जारी की, जिन्हें अब रोक दिया गया है।
इस सूची में ‘भारत में मतदान के लिए 21 मिलियन अमेरिकी डॉलर’ भी शामिल था। जब यह जानकारी सार्वजनिक हुई, तो डोनाल्ड ट्रंप ने इसे उठाते हुए बड़ा मुद्दा बना दिया।
क्या भारत में चुनाव प्रभावित करने की कोशिश हुई?
इस पूरे विवाद के केंद्र में एक बड़ा सवाल यह है कि क्या वास्तव में अमेरिकी सरकार ने भारत में मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की थी?
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका अक्सर विभिन्न देशों में लोकतंत्र को बढ़ावा देने के लिए फंडिंग करता है, और यह कोई नई बात नहीं है। लेकिन इस बार, ट्रंप ने इसे ‘रिश्वत’ कहकर एक अलग मोड़ दे दिया।
BJP का मानना है कि इस फंडिंग का दुरुपयोग हुआ, जबकि कांग्रेस इसे राजनीतिक मुद्दा मान रही है और सरकार से स्पष्टीकरण मांग रही है।
अब आगे क्या होगा?
- BJP इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने वाली है और इसकी जांच की मांग कर रही है।
- कांग्रेस सरकार से जवाब देने और एक आधिकारिक श्वेत पत्र जारी करने की मांग कर रही है।
- DOGE ने यह फंडिंग पहले ही रद्द कर दी है, लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं कि यह पहले क्यों मंजूर की गई थी।
- ट्रंप इस मुद्दे को लेकर लगातार बयानबाजी कर रहे हैं, जिससे भारत-अमेरिका संबंधों पर भी असर पड़ सकता है।