बिहार में बड़ा रेल हादसा टला: टूटी पटरी से गुजरी तेज रफ्तार ट्रेन, लोको पायलट की सूझबूझ से बाल-बाल बची सैकड़ों यात्रियों की जान

बिहार में बड़ा रेल हादसा टला: टूटी पटरी से गुजरी तेज रफ्तार ट्रेन, लोको पायलट की सूझबूझ से बाल-बाल बची सैकड़ों यात्रियों की जान

बिहार के रेल नेटवर्क पर एक बार फिर बड़ा और भयानक रेल हादसा होने से बाल-बाल टल गया। तेज रफ्तार से दौड़ रही एक यात्री ट्रेन अचानक उस ट्रैक पर पहुंच गई, जिसकी पटरी बीच में से टूटी हुई थी। ट्रेन का इंजन और शुरुआती पहिए टूटी पटरी के ऊपर से गुजरे ही थे कि लोको पायलट (ट्रेन चालक) को पटरी में असामान्य झटके और तकनीकी गड़बड़ी का तुरंत आभास हो गया। लोको पायलट ने बिना एक सेकंड गंवाए गजब की सूझबूझ और तत्परता दिखाते हुए फौरन इमरजेंसी ब्रेक लगा दिए। इस सटीक और त्वरित फैसले की वजह से ट्रेन बिना डिरेल (पटरी से उतरे) हुए सुरक्षित रुक गई और बोगियों में सवार सैकड़ों यात्रियों की जान चमत्कारिक रूप से बच गई। घटना की सूचना मिलते ही रेल प्रशासन और तकनीकी टीमों में हड़कंप मच गया।

टूटी पटरी पर दौड़ रही थी ट्रेन, जोरदार झटके से सहमे यात्री

घटनाक्रम के अनुसार, ट्रेन अपने निर्धारित समय पर ट्रैक पर सामान्य गति से आगे बढ़ रही थी। अचानक ट्रैक के एक हिस्से में मेटल फ्रैक्चर (पटरी टूटी) होने के कारण पहियों के नीचे असामान्य कंपन और भारी आवाज उत्पन्न हुई। झटके इतने तेज थे कि बोगियों के भीतर अपनी सीटों पर बैठे यात्री बुरी तरह उछल पड़े और चीख-पुकार मचने लगी। यदि ट्रेन की गति नियंत्रित नहीं होती या लोको पायलट कुछ सेकंड की भी देरी करता, तो ट्रेन के कई डिब्बे तेज गति में एक-दूसरे के ऊपर चढ़कर पटरी से उतर सकते थे, जिससे भारी जनहानि हो सकती थी।

लोको पायलट की त्वरित सूझबूझ बनी सैकड़ों जिंदगियों की ढाल

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा और सराहनीय योगदान ट्रेन के लोको पायलट और सहायक लोको पायलट का रहा। असामान्य आवाज और केबिन में लगे उपकरणों पर दबाव में आए अचानक बदलाव को भांपते हुए पायलट ने बिना घबराए वैज्ञानिक तरीके से इमरजेंसी ब्रेक अप्लाई किए। अचानक ब्रेक लगाने पर भी ट्रेन संतुलित रही और एक बड़े हादसे में तब्दील होने से पहले ट्रैक पर सुरक्षित थम गई। ट्रेन के रुकते ही लोको पायलट ने तुरंत नीचे उतरकर ट्रैक का मुआयना किया, जहां पटरी दो हिस्सों में साफ तौर पर टूटी दिखाई दी। इसके बाद तुरंत वॉकी-टॉकी और रेलवे कंट्रोल रूम के जरिए नजदीकी स्टेशन मास्टर और कंट्रोलर को आपातकालीन संदेश भेजा गया।

रेलवे कंट्रोल रूम में मचा हड़कंप, रोकी गईं अन्य ट्रेनें

जैसे ही टूटी पटरी पर ट्रेन के रुकने और रेल फ्रैक्चर की सूचना दानापुर/सोनपुर रेल मंडल के ऑपरेटिंग कंट्रोल को मिली, पूरे महकमे में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। अधिकारियों ने तत्काल सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करते हुए उस रूट पर पीछे से आ रही अन्य मेल, एक्सप्रेस और मालगाड़ियों को आनन-फानन में पिछले स्टेशनों पर ही रेड सिग्नल देकर रोक दिया। इस त्वरित फैसले से रूट पर किसी अन्य ट्रेन के टकराने या द्वितीयक दुर्घटना का खतरा पूरी तरह समाप्त हो गया।

तकनीकी दल ने मौके पर पहुंचकर किया ट्रैक की मरम्मत का काम

घटना की गंभीरता को देखते हुए पीडब्ल्यूआई (Permanent Way Inspector), इंजीनियरिंग विंग और मंडल रेल सुरक्षा बल (RPF) की विशेष टीमें तत्काल भारी औजारों और स्पेयर ट्रैक्स के साथ घटनास्थल पर पहुंचीं। इंजीनियरिंग टीम ने सबसे पहले टूटे हुए रेलखंड का बारीकी से निरीक्षण किया और अस्थाई क्लैंप लगाकर सुरक्षित गति से ट्रेन को आगे के स्टेशन की तरफ रवाना कराया। इसके बाद ट्रैक को पूरी तरह काटकर वहां नया रेल का टुकड़ा वेल्डिंग के जरिए जोड़ा गया। लगभग दो से तीन घंटे के सघन मरम्मत कार्य के बाद ट्रैक की सुरक्षा जांच (Safety Clearance) पूरी की गई और रेल यातायात को सामान्य रूप से बहाल किया गया।

ट्रैक फ्रैक्चर के पीछे मौसम या मेंटेनेंस की लापरवाही

रेलवे के तकनीकी जानकारों के अनुसार, पटरियों में फ्रैक्चर होने के पीछे दो मुख्य कारण होते हैं। पहला, तापमान में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव (थर्मल स्ट्रेस) के कारण लोहे का सिकुड़ना और फैलना, जिससे कमजोर जोड़ों पर दरार आ जाती है। दूसरा, नियमित ट्रैक पेट्रोलिंग और अल्ट्रासोनिक फ्लॉ डिटेक्शन (USFD) टेस्टिंग में बरती जाने वाली संभावित लापरवाही। यह सवाल गंभीर है कि क्या पेट्रोलमैन या की-मैन ने नियमित गश्त के दौरान उस फ्रैक्चर को नहीं देखा, या फिर ट्रेन के गुजरने के कुछ ही समय पहले पटरी अचानक टूटी थी।

रेलवे ने दिए उच्चस्तरीय जांच के आदेश

पूर्व मध्य रेलवे प्रशासन ने इस अत्यंत गंभीर मामले का कड़ा संज्ञान लेते हुए उच्चस्तरीय संयुक्त जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। जांच दल इस बात की पड़ताल करेगा कि अंतिम बार उस सेक्शन पर ट्रैक की अल्ट्रासोनिक जांच कब हुई थी और ड्यूटी पर तैनात रेलकर्मियों ने सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया था या नहीं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि नियमित मेंटेनेंस या गश्त में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो जिम्मेदार कर्मचारियों और पर्यवेक्षकों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। वहीं, रेल यात्रियों और विभिन्न संगठनों ने सैकड़ों निर्दोष लोगों की जान बचाने वाले बहादुर लोको पायलट को रेलवे की ओर से विशेष पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित करने की मांग की है।