Bihar Tax and Circle Rate Hike 2026: बिहार में जमीन रजिस्ट्री से लेकर गाड़ी खरीदना और स्टेट हाईवे पर चलना हुआ महंगा; सरकार के इन 5 फैसलों से आम आदमी की जेब पर बढ़ा भारी बोझ
बिहार में रहने वाले आम नागरिकों, नौकरीपेशा परिवारों और छोटे व्यापारियों के लिए बीता एक महीना भारी-भरकम आर्थिक बदलावों वाला रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary) की अगुवाई में बिहार कैबिनेट ने एक के बाद एक ऐसे कई बड़े और कड़े फैसले लिए हैं, जिनका सीधा असर राज्य की जनता की जेब और उनके मासिक बजट पर पड़ने जा रहा है।
सरकार ने जमीन के सर्किल रेट में ऐतिहासिक बढ़ोतरी करने से लेकर होल्डिंग टैक्स, मोटर वाहन टैक्स, स्टेट हाईवे टोल और यहाँ तक कि ग्रामीण इलाकों के लिए 'पंचायत टैक्स' को भी मंजूरी दे दी है। इसका मतलब साफ है कि यदि आप बिहार में जमीन खरीदने की सोच रहे हैं, नया वाहन (बाइक या ऑटो) लेने वाले हैं, पटना में अपना मकान रखते हैं या गांवों में रहते हैं—तो सरकार का कोई न कोई नया नियम आपको आर्थिक रूप से प्रभावित जरूर करेगा। आइए इन 5 बड़े फैसलों को विस्तार से समझते हैं:
1. जमीन खरीदना हुआ दोगुना महंगा, सर्किल रेट (MVR) में भारी उछाल
बिहार सरकार ने मिनिमम वैल्यू रजिस्टर (MVR) यानी जमीन के सरकारी सर्किल रेट में बड़ा संशोधन लागू कर दिया है। चूंकि किसी भी जमीन की रजिस्ट्री की फीस और स्टांप ड्यूटी उसके सर्किल रेट के आधार पर ही तय होती है, इसलिए इस फैसले से जमीन खरीदना अब बहुत महंगा हो गया है:
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शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ोतरी: नई व्यवस्था के तहत शहरी इलाकों में जमीन की न्यूनतम सरकारी कीमतों में सीधे 100 प्रतिशत (दोगुनी) तक की बढ़ोतरी कर दी गई है। वहीं, ग्रामीण और पेरिफेरल (शहर से सटे) क्षेत्रों में सर्किल रेट को 1.6 गुना तक बढ़ा दिया गया है।
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इन शहरों पर सबसे ज्यादा असर: पटना और रक्सौल जैसे प्रमुख शहरों के कई प्राइम लोकेशंस पर जमीन की सरकारी कीमतें रातों-रात दोगुनी हो चुकी हैं, जिससे आम आदमी के लिए घर बनाने का सपना और महंगा हो गया है।
2. पटना में 30 साल बाद बढ़ा होल्डिंग टैक्स (Holding Tax)
राजधानी पटना के मकान मालिकों पर भी सरकार ने अतिरिक्त टैक्स का बोझ डाल दिया है। नगर विकास एवं आवास विभाग ने होल्डिंग टैक्स की गणना के लिए उत्तरदायी वार्षिक किराया मूल्य (Annual Rental Value - ARV) में करीब 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी को हरी झंडी दे दी है।
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1995 के बाद पहला बड़ा बदलाव: पटना में होल्डिंग टैक्स के ढांचे में वर्ष 1995 के बाद यानी पूरे 30 साल बाद इतना बड़ा संशोधन किया गया है।
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दायरा: मुख्य सड़क, प्रधान मुख्य सड़क और अन्य लिंक रोड पर स्थित सभी आवासीय (Residential), व्यावसायिक (Commercial) और अन्य संपत्तियां इसके दायरे में आएंगी। टैक्स का यह नियम पक्के मकानों के साथ-साथ एस्बेस्टस और कच्चे मकानों पर भी प्रभावी होगा।
3. बिहार के स्टेट हाईवे (SH) और बड़े पुलों पर भी देना होगा टोल टैक्स
अब तक बिहार के लोगों को मुख्य रूप से केवल नेशनल हाईवे (NH) पर ही टोल टैक्स देना पड़ता था, लेकिन अब राज्य सरकार अपनी सड़कों से भी राजस्व वसूलने की तैयारी में है। कैबिनेट ने ‘पथ उपयोगकर्ता शुल्क (दरों का निर्धारण एवं संग्रहण) नियमावली-2026’ को मंजूरी दे दी है।
इसके तहत बिहार के स्टेट हाईवे, बड़े पुलों और नए बायपास पर सफर करने के लिए वाहन श्रेणी के अनुसार प्रति किलोमीटर की दर से नीचे दिए गए चार्ट के मुताबिक टोल देना होगा:
| वाहन की श्रेणी (Vehicle Type) | प्रस्तावित टोल दर (प्रति किलोमीटर) |
| कार, जीप और हल्के वाहन | ₹1.25 / किमी |
| छोटे कमर्शियल वाहन (Mini Trucks) | ₹2.00 / किमी |
| बस और दो एक्सल वाले ट्रक | ₹4.25 / किमी |
| भारी व्यावसायिक वाहन (Heavy Trucks) | ₹6.65 / किमी |
| सात एक्सल वाले विशाल वाहन | ₹8.10 / किमी |
नोट: फिलहाल इस नियमावली को केवल कैबिनेट की मंजूरी मिली है और इसे धरातल पर लागू किया जाना बाकी है। लागू होने के बाद माल ढुलाई (Freight) महंगी होगी, जिससे रोजमर्रा की चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं।
4. नई बाइक, स्कूटर और ऑटो रिक्शा खरीदना भी हुआ महंगा
यदि आप अपने लिए नई मोटरसाइकिल या ऑटो खरीदने की सोच रहे हैं, तो इसके लिए भी आपको पहले से अधिक पैसे चुकाने होंगे। सरकार ने मोटर वाहन कर (Motor Vehicle Tax) में निम्नलिखित संशोधन किए हैं:
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दोपहिया वाहन: नया बाइक या स्कूटर खरीदने पर अब 1 प्रतिशत अतिरिक्त मोटर वाहन टैक्स देना होगा, जिससे गाड़ियों की ऑन-रोड कीमत बढ़ जाएगी।
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तिपहिया वाहन: ऑटो रिक्शा या अन्य तीनपहिया व्यावसायिक वाहन खरीदने वालों पर सीधा ₹1,000 का अतिरिक्त टैक्स फिक्स कर दिया गया है।
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सरकार का तर्क: इस अतिरिक्त टैक्स से मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल राज्य के सड़क बुनियादी ढांचे (Road Infrastructure) को दुरुस्त करने और विकास कार्यों में किया जाएगा।
5. अब गांवों में भी लगेगा 'पंचायत टैक्स'; हर घर से होगी वसूली
बिहार सरकार ने ग्रामीण विकास के ढांचे को बदलने के लिए 'ग्राम पंचायत कर, दर और शुल्क नियमावली-2026' को मंजूरी दे दी है। इसके तहत अब ग्राम पंचायतों को अपने स्तर पर ₹50 से लेकर ₹5,000 तक के विभिन्न टैक्स और यूजर चार्ज वसूलने की कानूनी शक्ति मिल गई है।
किस पर कितना लगेगा सालाना टैक्स:
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पक्के मकान पर: ₹100 वार्षिक टैक्स।
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अर्ध-पक्के मकान पर: ₹50 वार्षिक टैक्स।
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प्रधानमंत्री आवास योजना के घर: ₹25 वार्षिक टैक्स।
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सफाई और जलापूर्ति शुल्क: हर घर से ₹30 सफाई शुल्क और ₹30 जलापूर्ति (Water Supply) शुल्क मासिक/वार्षिक आधार पर तय किया गया है।
कमर्शियल यूनिट्स पर भी शिकंजा:
गांवों में स्थित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों जैसे पेट्रोल पंप, रसोई गैस एजेंसी (LPG Agency), ईंट भट्ठा (Brick Kiln) और सिनेमा हॉल पर प्रतिवर्ष ₹5,000 तक का भारी व्यावसायिक शुल्क लगाया जाएगा। इसके अलावा, पंचायत क्षेत्रों में लगने वाले होर्डिंग्स और विज्ञापनों पर भी पंचायतें टैक्स वसूल सकेंगी।
आखिर क्यों टैक्स बढ़ा रही है बिहार सरकार?
इन सभी ताबड़तोड़ फैसलों पर सरकार का कहना है कि राज्य के विकास की गति को तेज करने के लिए राजस्व (Revenue) बढ़ाना बेहद अनिवार्य हो गया है। पंचायत टैक्स जैसे नियमों से स्थानीय ग्रामीण निकाय (Local Bodies) आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकेंगे और उन्हें छोटी-छोटी विकास योजनाओं के लिए सीधे राज्य या केंद्र सरकार के फंड पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
हालांकि, ग्राउंड रियलिटी और आम आदमी के नजरिए से देखें तो पिछले एक महीने के भीतर बैक-टू-बैक लिए गए इन फैसलों ने आम जनता, मध्यम वर्ग और छोटे व्यापारियों के घरेलू बजट को पूरी तरह से हिलाकर रख दिया है।