एक महीने में 790 मनचलों को बिहार पुलिस की 'दीदियों' ने लपेटा
बिहार के शहरों, बाजारों और स्कूल-कॉलेज के रास्तों पर अक्सर छात्राओं और महिलाओं को परेशान करने वाले मनचलों और रोड रोमियो की अब खैर नहीं है क्योंकि बिहार पुलिस के विशेष महिला दस्ते यानी 'चैंपियन और तेज तर्रार पुलिस दीदियों' ने मनचलों के खिलाफ एक ऐसा ऐतिहासिक और आक्रामक अभियान छेड़ दिया है जिसने अपराधियों के मन में खौफ पैदा कर दिया है। पिछले महज एक महीने के भीतर बिहार पुलिस की इन महिला कर्मियों ने सादी वर्दी और स्कूटी पर सवार होकर राज्य के अलग-अलग जिलों में ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए करीब 790 से अधिक शोहदों और मनचलों को रंगेहाथों दबोचकर सबक सिखाया है। अत्याधुनिक स्कूटी और वायरलेस सेट से लैस होकर गलियों और चौराहों पर गश्त कर रही इन महिला पुलिसकर्मियों की कार्यशैली को देखकर हर कोई उनकी तारीफ कर रहा है। पहले जहां युड़कियां और महिलाएं छेड़खानी के डर से चुपचाप सहती थीं, वहीं अब पुलिस की इस खास पहल से आधी आबादी ने राहत की सांस ली है। आइए आज इस विस्तृत रिपोर्ट में जानते हैं कि बिहार पुलिस का यह महिला स्कूटी दस्ता कैसे काम कर रहा है और इस एक महीने के अभियान के दौरान क्या-क्या चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।
स्कूटी पर सवार महिला पुलिस बल का यह अनूठा और प्रभावी मॉडल कैसे करता है काम?
अक्सर यह देखा जाता था कि पारंपरिक पुलिस जीप या सायरन बजाती हुई गाड़ियों को देखकर मनचले और शोहदे बहुत दूर से ही सतर्क हो जाते थे और पुलिस के पहुंचने से पहले ही फरार हो जाते थे। इस समस्या से निजात पाने के लिए और मनचलों को उनकी ही भाषा में सबक सिखाने के लिए बिहार पुलिस मुख्यालय ने एक बेहद अनूठी और स्मार्ट रणनीति तैयार की। इसके तहत युवा महिला कांस्टेबलों और अधिकारियों को खास ट्रेनिंग देकर स्कूटी सौंपी गई, जो सादी वर्दी या पुलिस की हल्की पोशाक में शहर के कोचिंग संस्थानों, गर्ल्स कॉलेजों, बाजारों और सूनी गलियों में लगातार पेट्रोलिंग करती हैं। इन महिला कमांडोज के पास गुप्त कैमरे, वॉकी-टॉकी और तुरंत कार्रवाई करने वाले हथियार होते हैं। जैसे ही कोई मनचला किसी महिला या छात्रा पर फब्तियां कसता है या पीछा करने की कोशिश करता है, ये 'पुलिस दीदियां' फुर्ती के साथ उस पर झपट पड़ती हैं और उसे मौके पर ही धर दबोचती हैं। इस गुप्त और मोबाइल पेट्रोलिंग मॉडल ने अपराधियों को संभलने का मौका ही नहीं दिया है।
एक महीने में 790 मनचलों की धरपकड़: जेल की सलाखों के पीछे पहुंचे रोड रोमियो
पुलिस विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस विशेष अभियान के पहले ही महीने में पूरे राज्यभर से कुल 790 से अधिक ऐसे उपद्रवियों और मनचलों को चिन्हित कर गिरफ्तार किया गया है जो रोजाना लड़कियों को परेशान करते थे। पकड़े गए इन आरोपियों में से कई स्थानीय स्तर पर दबंगई दिखाने वाले युवक भी शामिल थे, जिन्हें पुलिस ने न केवल सड़क पर मुर्गा बनाया बल्कि उनके परिजनों को थाने बुलाकर सख्त चेतावनी भी दी। कई मामलों में गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें सीधे जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं के मन से डर को पूरी तरह खत्म करना है ताकि वे बिना किसी भय के अपनी शिक्षा और कार्यों के लिए बाहर निकल सकें। इस कार्रवाई के बाद से मुख्य बाजारों और कोचिंग हब के बाहर मंडराने वाले शोहदों की संख्या में भारी कमी दर्ज की गई है।
महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा पर बढ़ा भरोसा, समाज के हर वर्ग से मिल रही है सराहना
बिहार पुलिस के इस स्कूटी दस्ते की सफलता ने राज्य की कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा के प्रति लोगों का विश्वास काफी हद तक बढ़ा दिया है। कॉलेज की छात्राओं, कामकाजी महिलाओं और अभिभावकों ने पुलिस प्रशासन के इस कदम की भूरी-भूरी प्रशंसा की है। अभिभावकों का कहना है कि अब उन्हें अपनी बेटियों की कॉलेज और कोचिंग आवाजाही को लेकर पहले जितना मानसिक तनाव नहीं रहता क्योंकि उन्हें पता है कि किसी भी आपात स्थिति में 'पुलिस दीदियां' उनकी सुरक्षा के लिए मुस्तैद हैं। समाज के प्रबुद्ध नागरिकों और महिला संगठनों ने मांग की है कि इस अभियान को केवल एक महीने तक सीमित न रखकर इसे स्थायी रूप से और अधिक बड़े पैमाने पर पूरे बिहार के हर छोटे-बड़े कस्बे तक विस्तारित किया जाना चाहिए, ताकि अपराधी किस्म के लोगों में कानून का डर हमेशा के लिए कायम रहे।