Bihar Politics : हार के बाद RJD का ऑपरेशन क्लीन भीतरघात करने वाले नेताओं की अब खैर नहीं, लिस्ट तैयार

Post

News India Live, Digital Desk : चुनाव का शोर थम चुका है, नतीजे आ चुके हैं, लेकिन RJD (राष्ट्रीय जनता दल) के अंदर अब असली "भूचाल" आना बाकी है। कहते हैं न, 'दुश्मन के वार से ज्यादा अपनों की गद्दारी चुभती है'। लगता है, राष्ट्रीय जनता दल इस समय इसी दर्द से गुजर रही है और अब वो इसे बर्दाश्त करने के मूड में बिल्कुल नहीं है।

खबर आ रही है कि पार्टी ने अपनी हार की समीक्षा (Review) शुरू कर दी है, और जो बात निकलकर सामने आ रही है, वो चौंकाने वाली है। RJD को अहसास हो गया है कि कई सीटों पर उन्हें विरोधियों ने नहीं, बल्कि उनकी अपनी पार्टी के नेताओं ने हराया है।

"भीतरघात" करने वालों की पहचान शुरू
पार्टी हाईकमान ने बहुत सख्त रुख अपना लिया है। RJD के प्रदेश कार्यालय में सन्नाटा तो है, लेकिन अंदरखाने बहुत बड़ी तैयारी चल रही है। जिला अध्यक्षों और प्रभारियों से रिपोर्ट मांगी गई है कि आखिर कहाँ चूक हुई? और सबसे जरूरी सवाल—किसने अंदर ही अंदर पार्टी के उम्मीदवार को हरवाने का काम किया?

ऐसे नेताओं की पहचान की जा रही है जो टिकट न मिलने से नाराज थे या जो प्रचार में तो साथ दिख रहे थे, लेकिन वोट विपक्ष को दिलवा रहे थे। इसे शुद्ध राजनीति की भाषा में "भीतरघात" कहते हैं।

अनुशासन का डंडा चलेगा
सूत्रों की मानें तो पार्टी ऐसे नेताओं की 'काली लिस्ट' (Blacklist) बना रही है। चाहे वो कितना भी पुराना नेता हो या रसूखदार हो, अगर यह साबित हो गया कि उसने चुनाव में "लालटेन" बुझाने की कोशिश की है, तो उस पर सख्त कार्रवाई होना तय माना जा रहा है। ऐसे लोगों को पार्टी से निलंबित या निष्कासित भी किया जा सकता है।

तेजस्वी यादव और जगदानंद सिंह (अगर सक्रिय भूमिका में हैं तो) या प्रदेश नेतृत्व स्पष्ट संदेश देना चाहता है कि अनुशासनहीनता अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 2025 (या अगले चुनाव) के लिए पार्टी को अभी से "कचरा साफ़" करना होगा।

नेताओं की सांसें अटकीं
इस खबर के बाद से उन नेताओं की नींद उड़ी हुई है जिन्होंने चुनाव के दौरान सुस्ती दिखाई थी या दबे-छुपे विरोधियों की मदद की थी। रिपोर्ट कार्ड बन रहा है और रिजल्ट जल्द ही सबके सामने होगा।

राजनीति में जीत-हार चलती रहती है, लेकिन धोखा कोई भी पार्टी नहीं भूलती। RJD का यह कदम बताता है कि पार्टी अब अपनी जड़ों को मजबूत करने और दीमक को हटाने के लिए 'एक्शन मोड' में आ गई है। अब देखना यह होगा कि गाज किन बड़े चेहरों पर गिरती है।

आप क्या मानते हैं? क्या जो नेता पार्टी के साथ गद्दारी करें, उन्हें दूसरा मौका मिलना चाहिए?